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पुलिस से उठा विश्वास:जान पर खेल कर लूट को नाकाम करने वाले सिक्योरिटी गार्ड ने सुरक्षा के चलते, परिवार समेत छोड़ा घर

लुधियानाएक महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • मुथूट फाइनेंस में लूट की कोशिश का मामला
  • सात दिन बाद भी पुलिस नहीं पता कर पाई लुटेरों का नाम
  • रेकी करने और साजिश रचने वाले के बारे में भी नहीं कोई जानकारी

सुंदर नगर इलाके में मुथूट फिनकोर्प गोल्ड लोन कंपनी में लूट की नाकाम कोशिश के मामले में सात दिन बीत जाने के बाद लुटेरों की लोकेशन तो दूर उनका नाम तक पुलिस को पता नहीं चल पाया। वहीं, लुटेरों से मुकाबला करने वाले सुरजीत सिंह ने सुरक्षा के लिहाज से परिवार समेत अपना घर तक छोड़ दिया। क्योंकि उसे भी पुलिस पर विश्वास नहीं, इसलिए वो पुलिस को बिना बताए चला गया।

हालात ये हैं कि इस मामले पुलिस की इंवेस्टिगेशन जीरो है, उच्चाधिकारियों से लेकर निम्न तक के सभी मुलाजिमों ने इस केस पर काम करना तो बंद कर ही दिया, साथ ही साथ उनके पास मीडिया को बताने के लिए भी कोई अपडेट नहीं। पुलिस को तो ये तक नहीं पता कि जिस सिक्योरिटी गार्ड की वजह से इतनी बड़ी लूट की वारदात टल गई, वो ये शहर छोड़कर चला गया है।

सीसीटीवी फुटेज वायरल कर की खानापूर्ति, बिहार गई जांच टीम को अभी तक कोई लीड नहीं मिल पाई, जेल एंगल भी ठंडे बस्ते में

पुलिस ने इस घटनाक्रम के पहले दिन से ही फुटेज जुटानी शुरू कर दी। लेकिन हुआ क्या? पुलिस ने सिर्फ फुटेज को वायरल कर दिया। कहने को टीमें बिहार भी रवाना हुईं, लेकिन अभी तक इस मामले में कहीं भी कोई लीड नहीं मिल पाई और न किसी लुटेरे की पहचान हुई। गनीमत रही कि एक लुटेरे को सिक्योरिटी गार्ड ने ढेर कर दिया और उसकी पहचान हो गई। अगर वो भी भागने में कामयाब हो जाता तो शायद उसके बारे में भी कुछ पता नहीं लगता। अब पुलिस के पास सिवाये इस फुटेज के कुछ नहीं है। न तो वाहनों की डिटेल क्लीयर हो पाई, न ये पता चला कि रेकी किसने की और साजिश करने वाला कौन था? ये सभी सवाल अभी तक पहेली है। जोकि क्लीयर नहीं हो पाएं हैं।

मेरे परिवार ने कहा, हमें ईनाम नहीं चाहिए, जान बचानी है- सुरजीत सिंह

उधर, सुरजीत सिंह ने कहा कि उस घटना के बाद उनका परिवार डरा हुआ है। मुझे समझ नहीं आता कि मैंने सही किया या गलत। मेरे परिवार ने कहा कि हमें ईनाम नहीं चाहिए, उन्हें डर है कि लुटेरे कहीं उसे न मार दें। आखिर उन्होंने उनके साथी को मारा है। अब उन्हें अपने बच्चों और परिवार का डर है कि कहीं, लुटेरे उन पर हमला न कर दें। इसलिए वो किसी को बता नहीं रहे कि वो कहां जा रहे हैं। वहीं, इस मामले में पुलिस के हाथ मोबाइल फोन, साॅफ्टवेयर और डौंगल बरामद हुई थी। लेकिन अभी तक इसका खुलासा मीडिया के सामने पुलिस ने नहीं किया कि उनमें से क्या निकला और पुलिस की जांच कहां तक पहुंची। अभी तक एक काॅल ऐसा नहीं मिला, जिसमें आरोपियों के लोकल लिंक और उनकी स्टेटर्जी का पता चल सके। इसके अलावा जिस जेल कनेक्शन का नाम सामने आ रहा था। उसका भी कुछ पता नहीं चल पाा। फिलहाल उक्त मामले में मुलाजिम पिछले सात दिन से सिर्फ जिमनियां डाल रहें है, क्योंकि अमरप्रताप की पहचान के बाद भी कुछ बड़ा खुलासा पुलिस नहीं कर पाई।

मामले को लेकर टीमें कर रही हैं काम

अभी मामले की इंवेस्टिगेशन के लिए टीमें काम कर रही हैं। अभी किसी लुटेरे की पहचान नहीं हो पाई है। बाकी सिक्योरिटी गार्ड की बात है, वो वैसे ही अपने गांव गया होगा, शहर छोड़ने वाली कोई बात नहीं है।
-धर्मपाल, एसीपी नार्थ

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