पीपीसीबी ने कराया राज्य स्तरीय कार्यक्रम:क्लोरोफ्लोरोकार्बन के उपयोग पर अंकुश लगाने की जरूरत : माहिर

लुधियाना3 महीने पहले
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विश्व ओजोन दिवस पर पीएयू में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की तरफ से राज्य स्तरीय कार्यक्रम कराया गया। इसका उद्देश्य यही रहा कि ओजोन परत को खत्म करने वाले पदार्थों पर मॉन्ट्रियाल प्रोटोकॉल की याद दिलाई जा सके। जीएनई से प्रो. अवनीत कौर और सुशील मित्तल पूर्व उप निदेशक थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पटियाला ने यूवी रेडिएशनों के बुरे प्रभाव के बारे में अपनी राय दी। उन्होंने

क्लोरोफ्लोरोकार्बन के उपयोग पर अंकुश लगाने की आवश्यकता पर बल दिया, जो पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन परत के क्षरण का प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि भारत में इस क्षेत्र में रिसर्च और विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जरूरत के बारे क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे कि हाइड्रोफ्लोरोकार्बन के संभावी विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करने के बारे में विचार किया गया। इस मौके पर पीपीसीबी चेयरमैन प्रो. डॉ. आदर्श पाल विग, मेंबर सेक्रेटरी करुणेश गर्ग, चीफ इंजीनियर गुलशन राय, राजकुमार गोयल, गुरबख्श सिंह गिल भी उपस्थित रहे।

डॉ. आदर्शपाल विग ने कहा कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन के उपयोग पर अंकुश लगाने की जरूरत है। उन्होंने पराली जलाने के खतरे की तरफ भी इशारा किया, जोकि राज्य की प्रमुख समस्याओं में से एक है। उन्होंने उपलब्ध स्थायी पराली प्रबंधन प्रथाओं को आगे बढ़ाया और औद्योगिक इकाइयों को अपने बॉयलरों में ईंधन के रूप में पराली का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। सीएफसी के आधार पर एसी-रेफ्रिजरेटर को बाहर निकालना, सिंगल यूज प्लास्टिक, ग्रीन हाउस निकास के प्रमुख स्राेत जैविक ईंधन पर निर्भरता घटाने, इंटरसिटी यातायात कम करने जैसी प्रथाओं को अपनाने के बारे में जानकारी दी।

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