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पेंडेंसी का सच:बेटी को इंसाफ के लिए तीन साल, साइबर ठगी के पर्चे को डेढ़, फ्राॅड की कंप्लेंट को 2 साल से काट रहे चक्कर

लुधियाना24 दिन पहलेलेखक: गगनदीप रत्न
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सामान वुमन सेल में सड़ रहा। - Dainik Bhaskar
सामान वुमन सेल में सड़ रहा।
  • पुलिस विभाग में 7 हजार शिकायतें पेंडिंग, एक बार फिर जल्द हल करने के निर्देश
  • 6769 शिकायतें वुमन, साइबर सेल और ईओ विंग में ही पेंडिंग

डीजीपी ने सभी जिलों के अधिकारियों को थानों में पेंडेंसी खत्म करने के निर्देश दिए हैं। डीजीपी के निर्देश के बाद वुमन सेल से संबंधित पहला मेगा कैंप 24 जुलाई को लगाया जा रहा है। इसी कड़ी के तहत इसकी शुरुआत नो युअर केस के माध्यम से की जा चुकी है। लेकिन वो मात्र दिखावे है।

असलियत में सैंकड़ों लोग अपनी शिकायतें पुलिस थानों और बाकी के सेल व विंग में लेकर घूम रहे हैं, मगर उन्हें कोरोना का बहाना और तारीखों के फेर में उलझाकर चक्कर पर चक्कर लगवाए जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों द्वारा बताए आकंड़ों की बात करें तो लुधियाना पुलिस के थानों और सभी सेल व विंग में 7 हजार से ज्यादा मामलों की पेंडेंसी है। जिसमें तीन सेल काफी चर्चा में है। पहला वुमन सेल, दूसरा साइबर सेल और तीसरा ईओ (इकोनाॅमिक ओफेंस)।

जिसमें शिकायतों के सालों बाद भी लोगों का सामाधान नहीं हो रहा। इन विभागों में कई अफसर बदल गए, लेकिन शिकायतें टेबल से आगे नहीं बढ़ी। इन तीनों विभागों में 2200 शिकायतें पेंडिंग हैं। यहां तक कि सीपी ऑफिस और थानों में भेजी शिकायतों का रिकाॅर्ड मेनटेन नहीं है। कुछ शिकायतें थानों में धूल फांक रही हैं तो कुछ गायब कर दी गई हैं।

वुमन सेल : थाने तो कभी वुमन सेल के काट रही चक्कर
स्टाफ: 18 से ज्यादा| पेंडेंसी: 2450
गंगा देवी ने बताया कि उनकी बेटी की शादी चंडीगढ़ रोड पर रहने वाले शख्स के साथ हुई थी, जोकि उसे लेकर बरेली चला गया था। लेकिन बाद में उसे कुछ साल बाद छोड़कर फरार हो गया। उसकी शिकायत के लिए तीन साल पहले वो थाना साहनेवाल जाती रही, लेकिन तब उन्हें चक्कर लगवाते रहे। इसके बाद उनके इलाके की हदबंदी बदल गई और जमालपुर थाने में मामला आ गया। लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अब वुमेन सेल में घूम रही हूं, मगर यहां भी सुनने को कोई तैयार नहीं, वो चक्कर काटती जा रही है। मगर कोई मदद नहीं करता।
साइबर सेल: डेढ़ साल में की तीन शिकायतें, नहीं हुआ पर्चा
स्टाफ: 19 मुलाजिम | पेंडेंसी -2319
विनोद कौड़ा ने बताया कि वो अकाउंटेंट हैं। डेढ़ साल पहले उन्हें लाॅटरी निकलने का झांसा देकर साइबर ठगों ने उनके खाते से करीब साढ़े तीन लाख रुपए ट्रांसफर कर लिये थे। उक्त मामले की शिकायत उन्होंने साइबर सेल में दी, लेकिन दो महीने तक उन्हें नहीं बुलाया गया। इसके बाद कोरोना की वजह से आॅफिस बंद कर दिए गए, लिहाजा उन्होंने आॅनलाइन शिकायत की, फिर भी कुछ नहीं हुआ। 7 महीने पहले दोबारा शिकायत की, मगर आज तक एफआईआर नहीं हुई। अब उन्होंने थाने जाना ही बंद कर दिया।

ईओ विंग : तीन अफसर बदले जांच के नाम पर सिर्फ बहाने ​​​​​​​
स्टाफ: 5 के करीब|पेंडेंसी :करीब 3 हजार​​​​​​​
अमरजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने गोल्ड कंपनी में पैसे लगाए थे। जिन्होंने उन्हें प्राॅफिट के साथ करीब साढ़े 17 लाख रुपए देने का वादा किया थे। लेकिन बाद में वो मुकर गए। कंपनी की ओर से जो चेक उन्हें दिए गए थे वो बाउंस हो गए। इसकी शिकायत लेकर दो सालों से पुलिस विभाग के चक्कर काट रहे हैं। इस दौरान तीन अधिकारी बदल गए। लेकिन उनकी शिकायत वहीं की वहीं अटकी है। अब तक वो चार से ज्यादा बार शिकायत दे चुके हैं। लेकिन पर्चा अभी तक नहीं हुआ।
थाने-28: रेप पीड़िता से मुलाजिम बोला, मुंडा व्याह करवान गेआ
स्टाफ: 350 से ज्यादा पेंडेंसी: 4100 से ज्यादा
रेप का आरोप लगाने वाली युवती ने बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत थाने में दी थी। पहले तो वहां कार्रवाई नहीं और फिर एप्लीकेशन गुमा दी। फिर उन्होंने सीपी ऑफिस में शिकायत रजिस्टरी करवा दी। पहले तो उन्हें बताया ही नहीं गया कि उनकी शिकायत है कहां। फिर अचानक एक दिन उन्हें फाेकल पाॅइंट पुलिस ने फोन कर थाने बुलाया। जब वो थाने गई और उन्होंने युवक को बुलाने के लिए कहा तो मुलाजिम बोला, मुंडा तां पिंड व्याह करवान गया होया, जदों आऊगा तां ओहदे कोलों पुछ-गिछ करांगे। इसी तरह से वो अब तक चक्कर लगा रही है। लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा।

बाकी विंग का भी बुरा हाल
सूत्र बताते हैं कि बाकी के विंग का भी काफी बुरा हाल है। पीसीसी ब्रांच में 2 हजार से ज्यादा, आरटीआई विभाग में 920, असलाह विभाग में साढ़े 500 के करीब मामले पेंडिंग चल रहे हैं। फिर उक्त सभी मामलों की पेंडेंसी को खत्म करनें के लिए कैंप लगाने शुरू किए जा रहे हैं। जिसकी शुरूआत वुमन सेल के लिए लगाए मेगा कैंप से की जा रही है।
दूसरे कामों में उलझाया
पेंडेंसी के ये हालात बनने का कारण ये है कि अधिकारियों और मुलाजिमों को दूसरे कामों में उलझा कर रखा जाता है। जिसकी वजह से न तो वो केसों को डील कर पाते हैं और न ही सही ढंग से डाक निकाल पाते हैं। जिसकी वजह से सालों से चली आ रहीं पेंडेंसी 7 हजार का आकंड़ा भी पार कर गई हैं।​​​​​​​

पेंडेंसी को तेजी से निपटा रहे
पेंडेंसी इतनी ज्यादा नहीं है। जितनी है, उसे तेजी से निपटाया जा रहा है। सभी विभागों और थानों को निर्देश जारी किए गए हैं, कि वो जितनी भी पेंडेंसी बची है। उसे जल्द निपटाएं और शिकायत के लिए आने वाले लोगों के मामलों को जल्दी से जल्दी सुलझाएं।
-जे.एलनचेजियन, जॉइंट सीपी

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