इंटरनेशनल डॉटर्स डे:वानिया जैन स्टोन आर्ट सीखाकर तो एक्षा सेठी केक बनाकर, जरूरतमंदों की कर रही सहायता

लुधियाना4 महीने पहले
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वानिया और एक्षा - Dainik Bhaskar
वानिया और एक्षा
  • 11 वर्षीय दो होनहार बेटियां दूसरों के लिए बनींं मिसाल

समाज सेवा का जज्बा मन में हो तो उम्र भी कोई मायने नहीं रखती। इस बात का उदाहरण हैं शहर के अगर नगर और एसबीएस नगर की रहने वाली 11 साल की वानिया जैन और एक्षा सेठी। इस छोटी उम्र में वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी जी रही हैं।

वानिया और एक्षा का इतनी कम उम्र में जरूरतमंदों के लिए कुछ करने का जज्बा उनको दूसरों से अलग बनाता है। आज इंटरनेशनल डाॅटर्स डे पर पढ़िए शहर की इन दो होनहार बेटियों की कहानी जो दूसरों के लिए मिसाल बन गई हैं।

300 बच्चों को सीखा चुकी आर्ट

11 साल की वानिया ने लॉकडाउन के दौरान स्टोन आर्ट सीखना शुरू किया और अपनी इस कला को खुद तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि दूसरे बच्चों को भी सिखाने में दिलचस्पी दिखाई। इसके लिए वह करीब 20 ऑनलाइन वर्कशॉप आयोजित कर चुकी है। 300 से ज्यादा बच्चे इसका हिस्सा बन चुके हैं। चार एनजीओ सम्मानित कर चुकी हैं, क्योंकि वह अपनी कमाई से खुद के लिए खर्च नहीं करती है, बल्कि चैरिटी करती है। पेरेंट्स एडवोकेट आदित्य जैन और शिवानी जैन बेटी की इस सोच पर बहुत गर्व महसूस करते हैं।

स्ट्रीट डॉग्स को भी देती है फीड

11 साल की एक्षा सेठी ने लॉकडाउन में अपने बेकिंग के शौक को समय दिया और ऑनलाइन क्लासें लगाकर केक, कप केक, डिज़ाइनर केक, कुकीज़ जैसी चीजें बनानी सीखी। पहले घर के मेंबर्स और गेस्ट को बना कर खिलाया। रेस्पॉन्स अच्छा मिला तो खुद का बिजनेस शुरू कर दिया। अब ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। कुछ भी बनाती है तो फीडबैक लेना नहीं भूलती, क्योंकि अपनी हर डिश को खास बनाना चाहती है। खासबात है कि अपनी कमाई से एक तरफ सेविंग तो, दूसरी तरफ चैरिटी करती है। डॉग लवर्स है तो स्ट्रीट डॉग्स को भी फीड देती है और उनका पूरा ध्यान रखती हैं।

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