लुधियाना में प्लॉट आवंटन घोटाला:विजिलेंस को मिला इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और निगम के 4 अफसरों का 2 दिन का रिमांड, कई सबूत लगे हाथ

लुधियाना4 महीने पहले
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पंजाब विजिलेंस ने शुक्रवार को लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (LIT) के 3 अधिकारियों सहित निगम के जेई पर केस दर्ज किया। इन चारों आरोपियों को विजिलेंस ने अदालत में पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी 4 आरोपियों का विजिलेंस को दो दिन का रिमांड दे दिया।

आरोपियों में LIT इंजीनियर बूटा सिंह, XEN जगदेव सिंह, JE इंद्रजीत सिंह, नगर निगम का JE मनदीप सिंह समेत मॉडल टाउन एक्सटेंशन निवासी कमलदीप सिंह शामिल हैं।​​​​​​ विजिलेंस ने जगदेव सिंह, इंद्रजीत सिंह, कमलदीप सिंह और मनदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी ने मिलीभगत से LDP योजना के तहत अनाधिकृत व्यक्तियों को प्लॉट आवंटित किए थे।

बता दें कि इसी मामले में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन रमन बाला बाला सुब्रमण्यम और बूटा राम फरार हैं, जिनको विजिलेंस तलाश रही है। विजिलेंस की टीम का कहना है कि जल्द ही इन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पूर्व चेयरमैन रमन बाला सुब्रमण्यम द्वारा जमानत याचिका लगाई गई है, जिसकी सुनवाई 20 सितंबर को होनी है।

सूत्रों के मुताबिक, चारों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर विजिलेंस अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। आरोपी कई सवालों पर चुप रहते हैं और कइयों के जवाब घुमा फिरा कर दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि विजिलेंस के हाथ कई सबूत लगे हैं। आरोपियों का 2 दिन का रिमांड मिला है। SSP रविंदरपाल सिंह संधू ने बताया कि चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। बाकी खुलासे मामले की जांच के बाद ही हो पाएंगे।

क्या है मामला

विजिलेंस ने जगदेव सिंह, इंद्रजीत सिंह, कमलदीप सिंह और मनदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी ने मिलीभगत से LDP योजना के तहत अनाधिकृत व्यक्तियों को प्लॉट आवंटित किए थे। हालांकि कुछ आवंटियों की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके प्लॉटों को LIT अधिकारियों द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले अनधिकृत व्यक्तियों को फिर से आवंटित किया गया और लाभार्थियों से रिश्वत ली गई।

मॉडल टाउन एक्सटेंशन, लुधियाना में प्लॉट नंबर 1544-डी एक व्यक्ति कमलदीप सिंह को आवंटित किया गया था। बूटा राम ट्रस्ट इंजीनियर, इंद्रजीत सिंह, जगदेव सिंह, मनदीप सिंह ने इलाके में पानी और सीवरेज की सुविधा नहीं होने संबंधी LIT को झूठी रिपोर्ट तैयार करके दी थी। आवंटी का पक्ष लेते हुए अधिकारियों/कर्मचारियों ने 27 लाख रुपए का गैर-निर्माण जुर्माना माफ कर दिया था, जबकि इसे आवंटी से वसूलना जरूरी था।

लेकिन वसूली न होने के चलते राज्य के राजकोष को वित्तीय नुकसान हुआ था। इससे पहले भी इसी तरह का मामला संख्या 09 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7ए, 8, 12, 13 (2) के तहत और धारा 409, 420, 467, 471, 120-बी के तहत दर्ज किया गया है।

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