वर्षा ऋतु शुरू:जुलाई में 15 दिन बारिश की संभावना, सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करने के समय से वर्षा ऋतु का होता है आरंभ

नवांशहर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

सूर्य ने सौभाग्य योग में बुधवार सुबह 11:42 बजे आद्रा नक्षत्र में प्रवेश किया है। ज्योतिषियों के मुताबिक इसी के साथ वर्षा ऋतु आरंभ हो गई है। खेती-किसानी के कार्य शुरू हो गए। इस बार अच्छी वर्षा के योग बन रहे हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि ज्योतिष शास्त्र में प्रकृति से उत्तम तरीके से साम्य स्थापित किया गया है। यही वजह है कि प्रकृति, मौसम, पर्यावरण में होने वाले पल-पल के बदलाव को ज्योतिषीय गणना के माध्यम से सटीक बताया जा सकता है। वर्षा ऋतु की बात करें तो सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करने के समय से वर्षा ऋतु का आरंभ माना जाता है।

साथ ही इससे गर्मी का ताप कम होकर शीतलता का अहसास होगा। आद्रा से नौ नक्षत्र तक वर्षा ऋतु का चक्र होता है। यानि सूर्य जब आद्रा से चित्रा नक्षत्र तक पहुंचता है तब तक वर्षा ऋतु चलती है। आषाढ़ शुक्ल सप्तमी 6 जुलाई रात्रि तक आद्रा नक्षत्र रहेगा। ज्योतिषाचार्य रामरतन एवं कमलेश राणा ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र और मानव जीवन में सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करना उत्तम माना गया है। सूर्य को आरोग्य के कारक, ऊर्जा और प्रकाश के प्रतीक, जीवन में उम्मीद के संवाहक और संसार की आत्मा बताया गया है।

इस योग में भारतीय धर्म के अनुसार सूर्य देव की पूजा की जाती है, जिससे हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। जून में सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही बारिश सहित कई लाभ हमें मिलने लगेंगे। ग्रह नक्षत्रों की स्थिति के हिसाब से इस बार भरपूर बारिश के योग बन रहे हैं। क्योंकि आद्रा नक्षत्र में सूर्य की जून से जुलाई तक उपस्थित होना देशभर में वर्षा यानी मानसून होने की संभावना को दर्शाता है। आद्रा नक्षत्र सत्ताईस नक्षत्रों में एक नक्षत्र है। इस नक्षत्र में सूर्य के आगमन पर पूरे देश का किसान अपने कृषि के औजारों का पूजन करते हैं। आद्रा शब्द से पता चलता है कि यह ‘वर्षा ऋतु’ का नक्षत्र हैं।

कुछ स्थानों पर मध्यम या खंड वृष्टि के भी योग
सूर्य के आद्रा प्रवेश के समय चंद्र पूर्ण जलचर राशि मीन में स्थित होकर सूर्य से केंद्र स्थान में होने के कारण देश के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होगी। कहीं मध्यम या खंड वृष्टि के योग। पक्षांत तक पश्चिमोत्तर भारत में धीरे-धीरे वर्षा के योग बनेंगे। कुछ नक्षत्रों में ही ग्रहों के योग बनने पर वर्षा की भविष्यवाणी की जाती है। विशेष रूप से समस्त नक्षत्रों में से आद्रा नक्षत्र, अश्लेषा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र, मघानक्षत्र, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र। यदि रोहिणी नक्षत्र का बास समुद्र तट पर हो तो घनघोर वर्षा के योग का निर्माण होता है।

आद्रा नक्षत्र 22 जून से, वही पुनर्वसु नक्षत्र 6 जुलाई, पुष्य नक्षत्र 20 जुलाई, अश्लेषा नक्षत्र 3 अगस्त, मघा नक्षत्र 17 अगस्त, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र 3 अगस्त, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र 13 सितंबर एवं हस्त नक्षत्र 27 सितंबर तक श्रेष्ठ बारिश होने की संभावना है। 10 अक्टूबर से चित्रा नक्षत्र रहेगा। जुलाई में 2, 3, 4, 8, 11, 16, 19, 27, 28 और 29 को अच्छी बारिश का योग है। अगस्त में देश के पहाड़ी क्षेत्रों में जोरदार बारिश की संभावना। मैदानी इलाकों में भी तेज हवा के साथ बारिश इस महीने 15 दिन होने के आसार रहेंगे।

खबरें और भी हैं...