मजीठिया को जमानत की इनसाइड स्टोरी:नशा तस्करों से फंड के सबूत नहीं जुटा सके; सरेंडर के बाद पुलिस रिमांड नहीं मांगा गया

चंडीगढ़2 महीने पहले
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पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की नशा तस्करों से साठगांठ के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। नशा तस्करों से फंड के कोई सबूत अब तक नहीं मिल सका। वहीं नशा तस्कर सत्ता को घर और गाड़ी देने के आरोप पहले के हैं जबकि सत्ता पर केस उसके बाद दर्ज हुआ। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मजीठिया के सरेंडर करने के बाद पुलिस ने कभी रिमांड नहीं मांगा। बुधवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद इसी आधार पर मजीठिया को जमानत दे दी गई।

मजीठिया के जमानत ऑर्डर पर हाईकोर्ट की ऑब्जर्वेशन।
मजीठिया के जमानत ऑर्डर पर हाईकोर्ट की ऑब्जर्वेशन।

हाईकोर्ट ने इस मामले में 26 पन्नों का ऑर्डर जारी किया है। जिसमें मजीठिया पर केस दर्ज करते वक्त लगाए हर आरोप पर अपनी ऑब्जर्वेशन दी...

वित्तीय लेन-देन पर : मजीठिया के नशा तस्करों से रुपए लेने के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे सामने जो सबूत रखे गए, वह ये साबित नहीं करते कि मजीठिया को नशा तस्करी के जरिए वित्तीय मदद पहुंचाई गई।

नशा तस्करों को संरक्षण देने पर : नशा तस्करों को संरक्षण के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों के मुताबिक मजीठिया ने 2011 में सतप्रीत सत्ता को अपने घर में ठहराया और गाड़ी दी। वहीं राज्य सरकार ने सत्ता और पिंदी को 23 दिसंबर 2021 को केस में नामजद किया। वहीं पिंदी और अमरिंदर लाडी को 16 अगस्त 2014 और 22 अप्रैल 2014 में भगौड़ा करार दिया गया। यह 2013 के बाद पंजाब में नहीं आए। मजीठिया से इनके मिलने की बात 2013 से पहले की है। उस वक्त तक वह किसी भी तरह के आरोपी नहीं थे। ऐसे में मजीठिया को उनके पनाह देने की बात साबित नहीं होती।

केस 8 साल देरी से दर्ज किया : मजीठिया पर आरोप लगे कि वित्तीय लेन-देन 2007 से 2013 के बीच हुआ। जब सतप्रीत सत्ता और परमिंदर पिंदी पंजाब आते थे। हालांकि यह केस 8 साल बाद 20 दिसंबर 2021 को दर्ज किया गया।

ड्रग्स की रिकवरी नहीं हुई : हाईकोर्ट ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं कि उनके कब्जे में ड्रग्स हो, ड्रग्स की ट्रांसपोर्टेशन की गई हो या स्टोर किया गया हो। उनसे कोई ड्रग्स की रिकवरी भी नहीं हुई।

FIR के 8 महीने बाद भी सबूत जुटा रहे : हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार अभी तक सबूत जुटाने में लगी हुई है। मजीठिया पर केस दर्ज हुए 8 महीने बीत चुके हैं। पुलिस ने मजीठिया का रिमांड तक नहीं मांगा और उन्हें ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया गया।

मजीठिया न केस में कसूरवार, न आगे इसकी उम्मीद : हाईकोर्ट ने कहा कि पूरे सबूत देखने के बाद ऐसा नहीं लगता कि मजीठिया इस केस में कसूरवार हैं। वहीं जमानत मिलने पर वह कोई ऐसा क्राइम करेंगे। ट्रायल खत्म होने में समय लगेगा। ऐसे में मजीठिया को अनिश्चितकाल के लिए जेल में रखने से किसी सफल उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होगी। हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह उनका ऑब्जर्वेशन है। केस का ट्रायल स्वतंत्र रूप से चलता रहेगा।

बोनी अजनाला ने सिक्योरिटी के लिए आरोप लगाए
बोनी अजनाला ने कहा कि सतप्रीत सत्ता के सामने परमिंदर पिंदी ने उसे कहा कि वह अमेरिका-कनाडा में मेडिसिन में इस्तेमाल होने वाला कैमिकल सप्लाई करते हैं। जिसमें बिक्रम मजीठिया भी उनके पार्टनर हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस बयान में कहीं भी साल, समय और जगह का जिक्र नहीं है, जहां यह सब मिले थे। कई कैमिकल ऐसे भी होते हैं, जो NPDS एक्ट के अधीन नशे की कैटेगरी में नहीं आते। ऐसा लगता है कि बोनी अजनाला ने सिक्योरिटी वापस लेने के लिए यह सब कहा। नई सरकार आने पर अजनाला की सिक्योरिटी वापस ली गई थी। इसके खिलाफ वह हाईकोर्ट पहुंचे तो सिक्योरिटी वापस दे दी गई।