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पंजाब कांग्रेस में कलह:घमासान से निपटने की कवायद में मंत्री और विधायक दिल्ली तलब, 3 सदस्यीय कमेटी करेगी वन-टू-वन बातचीत

चंडीगढ़20 दिन पहले
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पंजाब के मुख्यमंंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय से खींचतान चली आ रही है। - Dainik Bhaskar
पंजाब के मुख्यमंंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय से खींचतान चली आ रही है।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उन्हीं की कैबिनेट के मंत्री रह चुके नवजोत सिंह सिद्धू में चल रही तनातनी से निपटने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए पार्टी ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। साथ ही सूबे के मंत्री-विधायकों को दिल्ली तलब किया है। सिद्धू समेत सूबे के 25 मंत्री-विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं। सोमवार से इनके साथ विशेष कमेटी एक-एक कर बात करेगी। बाकी मंत्रियों और विधायकों से कमेटी मंगलवार को मिलेगी।

तीन सदस्यीय कमेटी में खड़गे, अग्रवाल और रावत शामिल
कांग्रेस में चल रही इस अंतरकलह को खत्म करने के लिए बनाई गई कमेटी में मल्लिकार्जुन खड़गे, जय प्रकाश अग्रवाल और हरीश रावत हैं। यह कमेटी कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक करके उनका फीडबैक लेगी। यह बैठक तीन हिस्सों में होगी। एक हिस्से में मंत्री और विधायक हैं। दूसरे हिस्से में पार्टी के सांसद, राज्यसभा सदस्य और प्रदेश प्रधान हैं और तीसरे चरण में कमेटी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी बात कर सकती है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि कमेटी मुख्यमंत्री के साथ कब बैठक करेगी।

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में होने वाली सोमवार को पहले चरण की बैठक के लिए नवजोत सिंह सिद्धू समेत 10 विधायक रविवार शाम को ही दिल्ली पहुंच गए। यह अलग बात है कि सिद्धू को पहले दिन मिलने वाले विधायकों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। सिद्धू मंगलवार को कमेटी के सामने पेश होंगे। इस दिन 8 मंत्री और बाकी के विधायक कमेटी के सामने पेश होंगे।

पंजाब में कांग्रेस के 80 विधायक हैं। वहीं, पार्टी ने मंत्रियों और विधायकों को बुलाने में भी संतुलन बनाने की कोशिश की है। कमेटी ने एक जोन के विधायकों को एक बार में नहीं बुलाया, बल्कि माझा, दोआबा और मालवा के विधायकों को एक साथ बुलाया है, ताकि हरेक जोन का सही फीडबैक कमेटी तक पहुंचे।

आज की लिस्ट में हैं इन मंत्री-विधायकों के नाम
सोमवार को पहले चरण की बैठक में शामिल होने वाले कैबिनेट मंत्रियों में ब्रह्म मोहिंद्रा, मनप्रीत बादल, ओपी सोनी, साधु सिंह धर्मसोत, सुंदर शाम अरोड़ा, अरुणा चौधरी, सुखजिंदर रंधावा, बलबीर सिंह सिद्धू शामिल हैं।

बैठक में शामिल होने वाले बाकी लोगों में स्पीकर राणा केपी सिंह के अलावा विधायकों में राणा गुरजीत सिंह, रणदीप सिंह नाभा, संगत सिंह गिलजियां, गुरकीरत कोटली, कुलजीत नागरा, पवन आदिया, राजकुमार वेरका, इंदरबीर बुलारिया, सुखविंदर सिंह डैनी, सुरजीत धीमान, अजायब सिंह भट्टी, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, अंगद सिंह, सुखपाल भुल्लर शामिल हैं।

इसलिए बिगड़ी बात
2015 के गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटना के बाद कोटकपूरा में धरने पर बैठे लोगों पर हुई फायरिंग को लेकर पंजाब सरकार ने SIT बनाई थी। पिछले महीने हाईकोर्ट ने इस SIT और उसकी रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस में खासी खींचतान शुरू हो गई। कांग्रेस के एक धड़े ने यह आरोप लगाया कि एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में सही ढंग से केस को पेश नहीं किया, जबकि नवजोत सिंह सिद्धू इस मसले को लेकर लगातार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला बोलते आ रहे हैं।

पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू, राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा, सांसद रवनीत बिट्टू एकजुट हो गए। इसके बाद विधायक परगट सिंह, सुरजीत सिंह धीमान ने भी सरकार की कारगुजारी पर सवाल खड़े किए।

हाल ही में 26 मई को किसान आंदोलन के 6 माह पूरे होने पर एक ओर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसान संगठनों से प्रदर्शन नहीं करने की अपील की थी, वहींं इसके उलट नवजोत सिद्धू ने पटियाला और अमृतसर स्थित अपने घर पर कृषि कानूनों के विरोध में काले झंडे फहराए थे।