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किसानों का अमृतसर से दिल्ली कूच:दरबार साहिब में अरदास के बाद 700 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रवाना हुए 50 हजार किसान-मजदूर

चंडीगढ़एक वर्ष पहले
अमृतसर में दरबार साहिब में आंदोलन की कामयाबी के लिए अरदास करते किसान मजदूर संघर्ष समिति के प्रधान सर्वण सिंह पंधेर और अन्य पदाधिकारी।
  • किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रधान सरवण सिंह पंधेर कर रहे हैं संघर्ष कूच का नेतृत्व
  • बोले-15 में से 12 मांगें मानने को सरकार तैयार है, इसका मतलब ये तीनों कृषि कानून सही नहीं हैं

कृषि कानूनों के खिलाफ देश में किसान आंदोलन हो रहा है। दिल्ली की सीमा पर पंजाब-हरियाणा के हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। शुक्रवार को 700 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में करीब 50 हजार किसान-मजदूर अमृतसर से दिल्ली के लिए निकल पड़े हैं। वहीं, भारतीय किसान यूनियन के चीफ बलबीर एस राजेवाल का कहना है कि किसानों का ट्रेनें रोकने का कोई प्रोग्राम नहीं है।

दरअसल, किसान नेताओं ने बीते दिनों हुई बैठक में 15 मांगें रखी थी, जिनमें से सरकार 12 मांगें मानने को तैयार है। ऐसे में किसानों को लगता है कि ये तीनों कृषि कानून पूरी तरह सही नहीं हैं। इसी के चलते अब किसान अपना आंदोलन बढ़ाने जा रहे हैं। काफिले का नेतृत्व कर रहे किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रमुख सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि हम छह महीने के लिए राशन और सामान लेकर दिल्ली जा रहे हैं और हम दिल्ली को जीतने के बाद ही लौटेंगे।

जालंधर से आगे बढ़े
दोपहर बाद तक किसानों का जत्था जालंधर पहुंच चुका था। जालंधर-अमृतसर हाईवे पर एक साइड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन लगी हुई थी। इसके चलते जाम की स्थिति बन गई। दिल्ली रवाना होने से पहले किसानों ने श्री हरमंदिर साहिब में अरदास की। इसके बाद गोल्डन गेट पर इकट्ठा हुए।

अमृतसर के गोल्डन गेट से रवाना होता किसान-मजदूरों का काफिला।
अमृतसर के गोल्डन गेट से रवाना होता किसान-मजदूरों का काफिला।

कृषि मंत्री की अपील का नहीं है असर
10 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से अपील की है कि किसान अपना आंदोलन खत्म करें। सरकार किसानों के साथ बातचीत करने को तैयार है। वह एक तारीख तय करें और हम उनकी हर शंकाओं को दूर करेंगे। कोरोना का खतरा है और ठंड भी काफी है। हम आंदोलन कर रहे किसानों को लेकर चिंता में हैं। किसान संगठनों को हमारे दिए प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए।

दिल्ली को घेरने की तैयारी
दूसरी ओर माना जा रहा है कि सरकार कृषि कानूनों को रद्द नहीं करेगी। सरकार ने किसानों के सामने कृषि कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। ऐसे में किसानों ने दिल्ली घेरने का मन बना लिया है। किसानों ने ऐलान कर दिया है कि किसान अब दिल्ली को और ज्यादा घेरने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए किसानों ने आगरा-दिल्ली रोड और जयपुर-दिल्ली रोड को बंद करने की चेतावनी दी है। किसान 12 दिसंबर को टोल प्लाजा को फ्री करवा सकते हैं।

‘भाजपा को राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए’
राजनीतिक दलों के समर्थन के अलावा चीन-पाकिस्तान से फंडिंग के सवाल पर किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि इस तरह के जघन्य काम भाजपा ही कर सकती है। हम ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देते।

कहां-कहां से आए किसान?
जत्थे में शामिल होने के लिए अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर से पहुंचे, जो ब्यास के पुल पर मिले। फिरोजपुर, जालंधर, कपूरथला, मोगा और फाजिल्का जिलों के किसानों का जत्था फिरोजपुर से रवाना हुआ। यहां से लुधियाना की दोराहा मंडी में पहुंचकर इकट्ठे अमृतसर से आ रहे जत्थे के साथ मिल जाएंगे।

पुलिस बल भी सक्रिय
जब से किसानों ने जयपुर-दिल्ली मार्ग और आगरा-दिल्ली रोड को जाम करने का ऐलान किया है। पुलिस एक्टिव हो गई है। भारी पुलिस बल को दोनों रास्तों पर तैनात किया जा रहा है।