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लुधियाना में फर्जी कॉल सेंटर में करोड़ों ठगने का मामला:खुलासा- लखन ने जाना था कनाडा, फिर ऑस्ट्रेलिया में भी बिछाना था ठगी का नेटवर्क, अब तक 39 गिरफ्तार

लुधियाना3 दिन पहले
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भारत में बैठकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ठगी का नेटवर्क चलाया जा रहा था। - प्रतीकात्मक तस्वीर - Dainik Bhaskar
भारत में बैठकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ठगी का नेटवर्क चलाया जा रहा था। - प्रतीकात्मक तस्वीर

पंजाब के लुधियाना जिले की पक्खोवाल रोड पर चलाए जा रहे फर्जी कॉल सेंटर मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। अगर पुलिस और देरी करती तो न तो किंग पिन हाथ लगना था और यहां से दो अन्य देशों में ठगी का रैकेट शुरू हो जाना था। क्योंकि मामले में पकड़ा गया आरोपी लखन अपने भाई के पास कनाडा भागने की फिराक में था। इसके बाद यह पूरा फर्जीवाड़ा सोमल सूद ने संभालना था।

पुलिस के हाथ इसके पक्के सबूत लगे हैं। पुलिस इस मामले में 39 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन यूके में रह रहे इनके साथी गुजराती की गिरफ्तारी अभी बाकी है। जिसके लिए पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है। क्योंकि आरोपियों द्वारा यूके के अलावा कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी यह रैकेट शुरू किया जाना था और इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई थी।

बेहद चालाक है गुजराती, छापामारी की पल-पल की खबर थी उसे

यूूके में फर्जी अकाउंट नंबर मुहैया करवाने वाला गुजराती बेहद शाितर था। पुलिस की ओर से सूरत से पकड़े गए नमन सुखादिया ने बताया था कि जब पुलिस ने रेड की तो उसे हर पल की जानकारी थी और वह उसे मोहाली बैठकर ही रेड की फोटो व्हाट्सऐप पर भेज रहा था।

सोमल के लेन-देन की जांच हुई तो होंगे कई खुलासे

सोमल सूद की ओर से अपनी इमाारत किराए पर दी गई थी औेर उसके आगे एयरटेल का सेंटर चला रहा था। वह हमेशा से पुलिस वालों के साथ बने होने की बात करता था। यही कारण है कि अब उसके साथ हुए सभी लेन-देन की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है।

सभी 39 आरोपियों के फाइनेंशियल रिकॉर्ड की हो रही जांच

पुलिस ने अब तक दिल्ली, गुजराज, नाइजीरिया और लुधियाना निवासी 39 आरोपियों को काबू किया गया है। वहीं अब तक की जांच में सामने आया है कि यह लोग यूके में दूसरे देशों से आए नागरिकों को वीएस कॉलिंग सिस्टम के माध्यम से कॉल करते थे और उन्हें सरकारी इनकम टैक्स अफसर होने की बात कहकर डराते और सरकारी अकाउंट कहकर फर्जी अकाउंट में पैसे जमा करवा लेते थे।

जिन्हें यूके में बैठा गुजराती निकलवा लेता था और फिर हवाला या क्रिपटोक्रेंसी के जरिए पैसे भारत मंगवा लिए जाते थे। पुलिस ने अदालत से इजाजत लेकर मोबाइल वॉलेट से मिले 60 लाख रुपए की क्रिपटोक्रेंसी को कैश करवा इस केस में प्रॉपर्टी बना लिया है। अब पुलिस इन सभी आरोपियों द्वारा किए गए पैसे के लेन-देन की जांच कर रही है।

यूके के पीड़ितों को जांच में शामिल करेगी पुलिस

स्थानीय पुलिस डायरेक्टर जरनल ऑफ पुलिस कार्यालय के माध्यम से यूके की सरकार से संपर्क कर रही है। मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स के जरिए उन लोगों तक पहुंचा जा रहा है, जो ठगी का शिकार हुए हैं। बताया जा रहा है कि वहां की सरकार की तरफ से उनके नागरिकों के साथ होने वाले फ्रॉड की भरपाई कर दी जाती है तो पुलिस को लग रहा है कि शायद कोई नागरिक सामने नहीं आए, फिर भी प्रयास जरूर करेंगे। इसकी पुष्टि करते हुए एडीसीपी इनवेस्टिगेशन रुपिंदर कौर भट्टी का कहना है कि अभी मामले की गहन जांच की जा रही है। हम यूके में रह रहे व्यक्ति का लुक आउट सर्कुलर भी जारी करवा रहे हैं।

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