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  • If The Straw Is Managed In The Field For 3 Years, Then The Wheat Crop May Increase By 10% In The Fourth Year.

पीएयू की रिसर्च में खुलासा:3 साल तक खेत में ही पराली का प्रबंधन हो तो चौथे साल गेहूं की फसल में 10% तक हो सकता है इजाफा

लुधियानाएक महीने पहले
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(रागिनी कौशल) पीएयू के प्रोफेसरों ने खुलासा किया कि तीन साल तक खेत में धान की पराली का प्रबंधन किया जाए तो इससे चौथे साल की गेहूं की फसल में 10 % तक इजाफा हो सकता है। जो यूरिया के इस्तेमाल में कमी से भी हासिल हो सकता है। यह खुलासा मिट्टी विज्ञान विभाग के डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. जेएस कंग और डॉ. हरमीत सिंह के 8 साल तक की रिसर्च में हुआ है।

प्रोफेसर डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि खेत में पराली का प्रबंधन करने से खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और चौथे साल में नाइट्रोजन का इस्तेमाल भी कम हो जाता है। धान की पराली में 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाशियम, 1.2 किलोग्राम सल्फर, 400 किलोग्राम कार्बन और कई तरह के माइक्रो न्यूट्रिएंट्स होते हैं।

इस पोषक तत्वों का इस्तेमाल खेत में ही इनका प्रबंधन कर किया जा सकता है। इससे मिट्‌टी अच्छी होती है और पैदावार बढ़ती है। उन्होंने बताया कि रिसर्च में पाया गया है कि जिस खेत में पराली जलाई जाती है उसके मुकाबले हैप्पी सीडर के साथ खेत में ही पराली का प्रबंधन करने पर चौथे साल प्रति एकड़ 20 किलोग्राम कम यूरिया डालने के साथ साथ गेहूं की उपज में भी 10 फीसदी इजाफा हुआ।

लेकिन किसानों को यूनिवर्सिटी की बताई गई सिफारिश को अपनाना होगा। अगर किसान पराली को जलाते या खेत से हटा देते हैं तो किसानों को सिफारिश की गई नाइट्रोजन से भी कहीं ज्यादा नाइट्रोजन की मात्रा को खेतों में बढ़ाना पड़ता है जिससे जमीन और पर्यावरण के लिए नुकसान है ही साथ ही खेती के खर्चों को भी बढ़ा कर किसानों की आमदन को कम करता है।

पराली जलाने या खेत से हटाने पर किसानों को ‌~650 करोड़ों का होता है नुकसान

पराली को जलाने से किसानों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पराली को जलाने से नाइट्रोजन 30 किलोग्राम, फास्फोरस 3.5 किलोग्राम, पोटेशियम 6.5 कि.ग्रा, सल्फर और कार्बन का 2400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का नुकसान होता है। वहीं, प्रति हेक्टेयर 1960 रुपये का नुकसान होता है। 200 लाख टन की धान की पराली जलाने से सूबे के किसानों को साल भर का 650 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

धान की पराली से बनाई जा सकती है बायोगैस

जानकारों के मुताबिक हैप्पी सीडर का इस्तेमाल करने से पहले खेतों में से पराली को हटाने पर धान की पराली का कई तरह से प्रयोग किया जा सकता है। इसमें पराली बायोचार बनाई जा सकती है। इसके अलावा धान की पराली से कंपोस्ट तैयार की जा सकती है। यहां तक कि धान की पराली से बायोगैस भी तैयार की जा सकती है। जिससे कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता। कम खर्च में भट्ठी बनाकर किसान बायोचार तैयार कर सकते हैं।

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