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दिल्ली मोर्चा:खेतां ते घरां दी फिकर न करेयो, दिल्ली मोर्चा जित्त के ही मुड़ेओ, लोड़ पई तां सानू वी बुला लेओ

पंजाब5 महीने पहले
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खेता ते घरां दी फिकर न करेयो, दिल्ली मोर्चा जीत के ही मुडेयो। खेता ते पशुआं नू असी देख लवांगे, तुसी काले कानून रद करवा के ही मुडेयो। लोड पई ता सानू वी दिल्ली बुला लेयो। कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर जहां किसान दिल्ली की सीमां पर डटे हैं वहीं उनकी अनुपस्थिति में महिला किसानों ने जिले के धरनों के साथ-साथ खेतों के कामकाज की कमान भी संभाल ली है।

हालांकि कई परिवारों में एक-एक पुरुष किसान हैं बावजूद महिलाएं कंधा से कंधा मिलाकर खेतों में भी काम देख रही हैं। मैनपॉवर की कमी न हो इसलिए वुमन पॉवर इस्तेमाल की जा रही है। किसान किसी भी हालत में दिल्ली मोर्चे को कमजोर नहीं होने देना चाहते हैं। ऐसे में दिल्ली टीकरी बॉडर और सिंघु बार्डर पर किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

जिले से भी लगातार किसानों का दिल्ली के लिए कूच जारी है। वहीं, महिलाओं ने पूरा कामकाज संभाल रखा है। कई गांवों में तो महिलाएं खेतों का काम भी देख रही हैं। महिलाएं खेतों से पशु के लिए चारा पूरा कर रहीं है। खेतों में जमीन की निगरानी कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर जमीन को खाद भी लगा रही हैं।

पुरुषों के बराबर महिलाएं : सप्ताह में दो दिन अपने खेतों में और बाकी दिन जिलों में चल रहे धरनों में पहुंच रहीं महिलाएं

सुबह चूल्हा चौका और खेतों का काम, 10 बजे से धरने में जाते हैं

संगरूर | महिलाओं ने कहा कि उनके घरों से पति-बेटे और माताएं दिल्ली गईं हैंहमने तय किया है कि सप्ताह में दो दिन खेत में काम करेंगे बाकी दिन सुबह जल्दी उठकर चूल्हा-चौका और खेतों का काम करेंगे। सुबह 10 बजे से पहले आसपास के धरनों में जाते हैं। जितनी ताकत पुरुषों ने लगा रखी है उतनी ही महिला भी भागीदारी दिखा रही हैं।

पति-बच्चे सब संघर्ष में शामिल, धरनों में भी जाते हैं और खेती भी संभाल रहे

पातड़ां/पटियाला | पातड़ां के गांव बनवाला की गुरमेल काैर ने बताया कि गेहूं की फसल लग चुकी हैं। अगर समय पर खाद व पानी न दिया जाए ताे फसल खराब हाेने का खतरा है। चूंकि दिल्ली में किसान आंदाेलन कब खत्म हाेगा कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसलिए हम गांव की सभी महिलाओं ने खेत में काम करने का फैसला किया है।

कह भेजा है...खेतों में खाद-पानी सब दे देंगे पर जीत के ही लौटना

फाजिल्का | गांव बेगांवाली के किसान नेता अश्वनी कुमार की धर्मपत्नी कमला देवी ने कहा कि चाहे खाल की सफाई हो या खेतों में खाद डालने या स्प्रे करने का काम अथवा चारे को काटकर पशुओं को डालने इत्यादि का काम, वह बाखूबी इन्हें संभाल रही हैं। वह गांव की अकेली ऐसी महिला नहीं है, बल्कि महिलाएं चंदो देवी, दुर्गा देवी, पार्वती देवी भी शामिल हैं।

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