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पर्व:लोहड़ी और मकर संक्रांति पर शहर में दिखेगा संस्कृति-भाईचारे का अनूठा संगम

मनप्रीत काैर | लुधियाना15 दिन पहले
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  • सुख-समृद्धि और उम्मीदों वाले दोनों पर्व आज-कल, यहां रह रहे दूसरे राज्यों-समुदायों से जुड़े लोग श्रद्धाभाव से मनाएंगे त्योहार

लोहड़ी यूं तो पंजाब और हरियाणा का मुख्य पर्व है, लेकिन पूरे उत्तर भारत के साथ अब यह दुनियाभर में धूमधाम से मनाया जाने लगा है। इस त्योहार को किसानों के नए साल के रूप में देखा जाता है। लोहड़ी और मकर संक्रांति पर्व देश के तमाम राज्यों में मनाते हैं। मसलन लोहड़ी पर पंजाब में फसलों से हुई आमदनी की खुशियां मनाते हैं।

वहीं, अलाव जला उसमें गुड़, गजक, तिल आदि डाल समृद्धि की कामना की जाती है। फिर उसके इर्द-गिर्द नाचते-गाते खुशी मनाते हैं। आग में गुड़, तिल, रेवड़ी गजक आदि डालकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। दूसरी तरफ लुधियाना में रह रहे दूसरे राज्यों-समुदायों के लोग लोहड़ी और मकर संक्रांति का त्योहार अपने अंदाज में मनाते हैं।

केरल: विष्णु जी की शोभायात्रा निकालेंगे
बीजू वी.कृष्णन के मुताबिक संक्रांति पर्व पर फोकल पॉइंट स्थित श्री अय्यपा मंदिर से केरल वाले पारंपरिक वस्त्र पहन भगवान विष्णु(अय्यपा) शोभायात्रा निकालते हैं। मान्यता है कि विष्णु जी ने इस दिन असुरों का अंत किया था। इसी खुशी में शोभायात्रा निकाली जाती है।

यूपी-बिहार: पूजा के बाद खाएंगे तिलकुट
अभिलेश कुमार ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन यूपी-बिहार में मान्यता है कि इस अवधि में स्नान-दान व दही-चूड़ा के साथ तिलकुट खाने का फल अत्यंत शुभकारी होता है। भगवान विष्णु की पूजा के बाद प्रसाद के रूप में बच्चों को तिलकुट खिलाते हैं। बच्चे से यह भी कहते हैं कि तू मेरा तिलकुट भरेगा यानी जिंदगी भर हमारा ख्याल रखेगा। इस दिन काली दाल की खिचड़ी भी बना कर खाने की मान्यता है।

उड़ीसा: बनाकर बांटते हैं मकर चावल
उत्कल समाज के संतोष कुमार रथ ने बताया कि उड़ीसा के 20 हजार से ज्यादा लोग लुधियाना में बसे हुए हैं। जो मकर संक्रांति धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन नए चावल यानी मकर चावल बनाकर पूजा करके बाद में घर के सदस्यों में बांटते हैं। इस दिन एक-दूसरे को मकर नाम से ही पुकारा जाता है। लोहड़ी को भोगी बोला जाता है, जिसे सब मिलकर मनाते हैं। उस खुशी में सब घरों में स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं।

उत्तराखंड : संक्रांति पर दो नदियों के संगम में नहाने की प्रथा

गढ़वाल जनकल्याण सभा के सेक्रेटरी दीपक बोड़ाई ने बताया कि मकर संक्रांति को स्नान का अत्यधिक महत्व है। उत्तराखंड में मकर संक्रांति के दिन दो नदियों के संगम में नहाने की प्रथा है। इस दिन पकौड़े और खिचड़ी बनाई जाती है। इस पर्व पर तिल, गुड़, जौ, चावल आदि का दानकर स्वयं खिचड़ी खाने का विधान है। यही वजह है कि इस पर्व का नाम ही खिचड़ीपड़ गया। उत्तराखंड के करीब डेढ लाख लोग शहर में बसे हैं।

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