सिद्धू के गुनाह 'कबूलने' का VIDEO:कहा- मैं बुद्ध नहीं कि कोई एक गाल पर चांटा मारे, दूसरा आगे कर दूं; सुप्रीम कोर्ट में पेश हुआ

चंडीगढ़एक महीने पहलेलेखक: मनीष शर्मा

रोडरेज केस में सुप्रीम कोर्ट से एक साल की सजा के बाद नवजोत सिद्धू कैद काटने पटियाला जेल में चले गए हैं। इसी दौरान उनका एक वीडियो सामने आया है। जिसमें सिद्धू 34 साल पहले हुई इस घटना पर खुलकर अपनी बात कह रहे हैं। सिद्धू ने मृतक को ही घटना का जिम्मेदार ठहराया। हालांकि अंत में उन्होंने कहा कि मैं कोई बुद्ध नहीं कि कोई एक गाल पर चांटा मारे और मैं दूसरा आगे कर दूं। सिद्धू ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बात कही थी। यह इंटरव्यू 15 अप्रैल 2006 का है। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने सबूत के तौर पर पुनर्विचार याचिका में इसे सुप्रीम कोर्ट में भी पेश किया था।

वीडियो में बोले सिद्धू - मैं इसे सुधार सकता तो बुजुर्ग को वापस ले आता
आदमी अगर बाजार में चला जा रहा हो, कोई उसे रोककर गालियां देने लग जाए। वह आदमी कहे कि गालियां मत दीजिए, अपनी उम्र का ख्याल कीजिए। फिर भी वह गालियां देता रहे। फिर झड़प हो जाए। वह भी 2 घूंसे मारे, आप भी 2 घूंसे मारो और बात यहां तक आ जाए कि वह आदमी अकाल चलाना कर (मर) जाए। आपका मोटिव और इंटेंट उसे मारने की नहीं थी। बाजार में हजार तू तू-मैं मैं होती हैं। इंटेंट कभी मारने की नहीं रही। सिद्धू से गलती के सवाल पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं कोई गौतम बुद्ध तो हूं नहीं कि कोई एक गाल पर चांटा मारा और मैं दूसरा आगे कर दूं। सिद्धू इतना जरूर कहा था मुझे उस बात का दुख है। मैं अगर किसी घटना को सुधार सकता तो मैं उस बुजुर्ग को वापस ले आता।

परवीन कौर
परवीन कौर

हमने सुप्रीम कोर्ट में दिया था वीडियो : परवीन कौर
इस बारे में मृतक गुरनाम सिंह की बहू परवीन कौर ने कहा कि हमने यह वीडियो सुप्रीम कोर्ट में भी दिया था। इसका यूट्यूब लिंक भी सुप्रीम कोर्ट में दिया था। इसमें सिद्धू सब कुछ कबूल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह भी बताया गया था कि इससे पहले सिद्धू का अदालत के बाहर गुनाह कबूलने का यह बयान सबूत के तौर पर पेश नहीं किया गया।

मृतक गुरनाम सिंह
मृतक गुरनाम सिंह

2018 में सजा से बच गए थे सिद्धू, 2022 में एक साल कैद
सिद्धू का 27 दिसंबर 1988 को पटियाला में पार्किंग को लेकर 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह से झगड़ा हुआ था। झगड़े में गुरनाम सिंह को मुक्का लगा। जिसके बाद उनकी मौत हो गई। सिद्धू और उनके दोस्त पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हो गया। 1999 में सेशन कोर्ट से सिद्धू बरी हो गए। 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू को 3 साल कैद और एक लाख जुर्माने की सजा सुना दी। सिद्धू ने 2007 में कोर्ट में सरेंडर किया और जेल चले गए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी पिटीशन दायर कर दी। 16 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को गैर इरादतन हत्या की धारा से बरी कर दिया। उन्हें सिर्फ 323IPC यानी चोट पहुंचाने के आरोप में एक हजार जुर्माना लगा। पीड़ित परिवार की पुनर्विचार याचिका में अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक साल की सजा सुना दी।