CM भगवंत मान दिल्ली रवाना:बोले- नीति आयोग के बुलाने पर भी कैप्टन और चन्नी नहीं गए, मैं पूरा होमवर्क करके जा रहा

चंडीगढ़12 दिन पहले
दिल्ली रवाना होने से पहले चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते सीएम भगवंत मान।

पंजाब के CM भगवंत मान 2 दिन के दौरे पर दिल्ली रवाना हो गए हैं। दिल्ली में वह नीति आयोग की गवर्निंग कौंसिल की मीटिंग में हिस्सा लेंगे। यह मीटिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होगी। चंडीगढ़ से रवाना होने से पहले CM मान ने कहा कि नीति आयोग ने बार-बार CM रहते कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत चन्नी को बुलाया। उन्हें कहा कि पंजाब की जरूरतों के बारे में बताओ, लेकिन वह कभी नहीं गए। मैं पूरा होमवर्क कर जा रहा हूं।

3 साल बाद पंजाब का कोई प्रतिनिधि जा रहा
CM भगवंत मान ने कहा कि नीति आयोग की मीटिंग 2 दिन चलनी है। पंजाब से जुड़ी हर समस्या को आयोग के सामने रखूंगा। पंजाब की बदकिस्मती रही कि कैप्टन और चन्नी बार-बार बुलाने पर भी नहीं गए। 3 साल बाद पंजाब का कोई प्रतिनिधि इस मीटिंग में जा रहा है।

सीएम बनने के बाद भगवंत मान ने पीएम मोदी से मिलकर पंजाब के लिए 1 लाख करोड़ का स्पेशल पैकेज मांगा था। मान ने कहा था कि पंजाब पर 3 लाख करोड़ कर्जा है, इसलिए 2 किश्तों में यह पैकेज दिया जाए।
सीएम बनने के बाद भगवंत मान ने पीएम मोदी से मिलकर पंजाब के लिए 1 लाख करोड़ का स्पेशल पैकेज मांगा था। मान ने कहा था कि पंजाब पर 3 लाख करोड़ कर्जा है, इसलिए 2 किश्तों में यह पैकेज दिया जाए।

मीटिंग में उठाने वाले मुद्दों की लिस्ट गिनाई
CM मान ने कहा कि मीटिंग में पानी, किसानों की कर्ज माफी, MSP की लीगल गारंटी, कनाल सिस्टम को बहाल करने, बुड्ढे नाले की सफाई, इंडस्ट्री को बढ़िया माहौल देने, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, हेल्थ से जुड़े मुद्दे उठाऊंगा। मान ने कहा कि मैंने पूरी स्पीच नीति आयोग की 7वीं मीटिंग के लिए भेज दिया है। पंजाब के भले का कोई भी मौका मिले, मैं उसे छोड़ूंगा नहीं।

पंजाब सरकार का तर्क, आंदोलन में हमारे किसान रहे लेकिन प्रतिनिधि नहीं
केंद्र सरकार ने हाल ही में MSP कमेटी बनाई है। यह कमेटी फसलों पर मिल रही MSP को प्रभावी बनाने के सुझाव देगी। इसमें पंजाब सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है। पंजाब सरकार का तर्क है कि सिंघु बॉर्डर पर 378 दिन चले किसान आंदोलन में सबसे ज्यादा पंजाब के किसान थे। सबसे ज्यादा पंजाब के किसानों की ही इसमें मौत भी हुई। इसी आंदोलन को खत्म करने की शर्त के बदले MSP कमेटी बनी।इसके बावजूद पीड़ित किसानों की जगह इसमें कृषि सुधार कानूनों का समर्थन करने वालों को मेंबर लिया गया है।

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