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पंजाब में गरमाई कांग्रेस की सियासत:प्रदेश प्रधान बदलने से पहले नवजोत सिद्धू का शक्ति प्रदर्शन; कपूरथला में समर्थकों से बंद कमरे में मीटिंग

चंडीगढ़6 महीने पहले
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पंजाब में कांग्रेस प्रधान बदलने से पहले नवजोत सिद्धू ने हाईकमान को ताकत दिखानी शुरू कर दी है। सिद्धू ने कपूरथला पहुंचकर अपने समर्थक विधायकों और उम्मीदवारों के साथ बंद कमरे मीटिंग की। यह मीटिंग सुल्तानपुर लोधी से चुनाव लड़ने वाले नवतेज चीमा के घर पर हुई। खास बात यह है कि दिल्ली में शनिवार को ही कांग्रेस हाईकमान की मीटिंग हुई। इसमें बाकी राज्यों के साथ पंजाब में भी नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा की गई।

सिद्धू ने मुलाकात की एक फोटो ट्वीट की और लिखा कि पंजाब के हक-सच की लड़ाई नेक नीयत और ईमानदारी से लड़ेंगे। मीटिंग में मौजूद रहे अश्वनी सेखड़ी ने कहा कि यह सिर्फ पंजाब के लोगों की आवाज उठाने के लिए चर्चा थी।

यह हुए मीटिंग में शामिल

नवजोत सिद्धू की मीटिंग में कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा, बलविंदर धालीवाल के अलावा सिद्धू के करीबी अश्वनी सेखड़ी, राकेश पांडे, रूपिंदर रूबी, नाजर सिंह मानशाहिया, मोहिंदर केपी, सुनील दत्ती समेत कई पुराने कांग्रेसी शामिल रहे।

हाईकमान पर दबाव बना रहे सिद्धू

नवजोत सिद्धू की यह कोशिश हाईकमान पर दबाव बनाने की है। सिद्धू से हाल ही में कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि सिद्धू ने हार की जिम्मेदारी नहीं ली। सिद्धू लगातार कह रहे हैं कि चुनाव चरणजीत चन्नी की अगुवाई में लड़ा गया। इसलिए हार की जिम्मेदारी मेरी नहीं चन्नी की है।

पहले भी दिखाते रहे तेवर

सिद्धू पहले भी कांग्रेस हाईकमान को तेवर दिखाते रहे हैं। उन्होंने पटियाला में खुलेआम कह दिया था कि फैसला लेने की छूट न मिली तो ईंट से ईंट खड़का देंगे। इसके बाद चुनाव से पहले वह CM चेहरा घोषित करने की मांग करते रहे। जब चन्नी को सीएम चेहरा बना दिया गया तो उन्होंने पार्टी प्रधान के तौर पर प्रचार की जिम्मेदारी छोड़ दी। यही नहीं, धूरी में प्रचार के समय प्रियंका गांधी की मौजूदगी में उन्होंने जनसभा को संबोधित करने तक से इन्कार कर दिया था।

कांग्रेस में माझा एक्सप्रेस का अलग गुट

चुनावी हार के बाद कांग्रेस में माझा एक्सप्रेस के नाम से जाने जाते सुखजिंदर रंधावा, तृप्त राजिंदर बाजवा और सुखबिंदर सिंह सुख सरकारिया का अलग गुट है। खास बात यह है कि आप की आंधी वाले इन चुनावों में यह तीनों ही जीतने में कामयाब रहे। पूर्व CM चरणजीत चन्नी फिलहाल खामोश हैं लेकिन उन्हें भी इसी गुट का माना जाता है।

विरोधी दल के नेता की भी लड़ाई

पंजाब कांग्रेस में अभी विरोधी दल के नेता की भी लड़ाई चल रही है। 117 सीटों में से 92 सीटें जीतने वाली आप के बाद कांग्रेस के सबसे ज्यादा 18 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस से विधायक सुखजिंदर रंधावा, सुखपाल खैहरा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा इस कुर्सी पर दावेदारी ठोक रहे हैं।

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