पटियाला जेल से अस्पताल लाए गए सिद्धू:बीमारियां बता स्पेशल डाइट मांग रहे; डॉक्टरों ने किए टेस्ट; कोर्ट को देंगे रिपोर्ट

चंडीगढ़3 महीने पहले

रोड रेज केस में पटियाला जेल में बंद नवजोत सिद्धू को कड़ी सुरक्षा में राजिंदरा अस्पताल लाया गया है। अस्पताल में उनका मेडिकल चेकअप करवाया गया। सिद्धूू ने कोर्ट में स्पेशल डाइट के लिए पिटीशन दायर की है। जिसके बारे में कोर्ट ने राजिंदरा अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी गई है। इसी संबंध में सिद्धू की तरफ से बीमारी के दावों की जांच की जा रही है। इसके बाद मेडिकल बोर्ड कोर्ट में सिद्धू के लिए डाइट प्लान बनाकर पेश करेगा। सिद्धू जेल में सिर्फ सलाद, फल और उबली सब्जियां ही खा रहे हैं।

राजिंदरा अस्पताल के सुपिरटेंडेंट डॉ. हरनाम सिंह रेखी ने कहा कि 2 डॉक्टरों और एक डाइटीशियन का बोर्ड बनाया गया है। उन्होंने सिद्धू के ब्लड और यूरीन के कुछ टेस्ट करवाए हैं। उनके इलाज के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

सिद्धू जेल की दाल-रोटी नहीं खा रहे। उनका तर्क है कि उन्हें गेहूं से एलर्जी है। इसलिए वह रोटी नहीं खा सकते। वहीं लिवर प्रॉब्लम और ब्लड क्लॉटिंग यानी खून के थक्के बनने की समस्या है। वह सब चीजें नहीं खा सकते। उन्हें कुछ खास फल और स्पेशल डाइट दी जाए।

जेल से जवाब नहीं मिला तो कोर्ट पहुंचे सिद्धू
नवजोत सिद्धू ने बीमारी का हवाला देकर जेल प्रशासन से स्पेशल डाइट की अनुमति मांगी थी। हालांकि, वहां से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में पिटीशन दायर कर दी। जिसके बाद कोर्ट ने राजिंदरा अस्पताल के सुपरिटेंडेंट को इसकी रिपोर्ट बनाने को कहा। सुपरिटेंडेंट ने डॉक्टरों का बोर्ड बना दिया। जिसने सिद्धू की बीमारी के मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की।

SC से भी मांगी थी मोहलत, आज क्यूरेटिव पिटीशन कर सकते हैं दायर
सिद्धू ने अपनी बीमारी का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट से भी सरेंडर करने के लिए मोहलत मांगी थी। इसके लिए उन्होंने क्यूरेटिव पिटीशन पर अर्जेंट हियरिंग की मांग की थी। हालांकि, इसकी सुनवाई नहीं हो सकी। जिसकी वजह से शुक्रवार को सिद्धू को सरेंडर करना पड़ा। वहीं सिद्धू के वकील आज सुप्रीम कोर्ट में उनकी सजा के खिलाफ क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर सकते हैं।

34 साल पुराने केस में हुई एक साल की कैद
सिद्धू को 34 साल पुराने रोड रेज केस में एक साल की कैद हुई है। सिद्धू का 1988 में पटियाला में पार्किंग को लेकर बुजुर्ग गुरनाम सिंह से झगड़ा हो गया था। इस घटना के बाद बुजुर्ग की मौत हो गई। सिद्धू लोअर कोर्ट से बरी हो गए। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें सजा दे दी। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सिद्धू को सिर्फ एक हजार जुर्माने की सजा हुई। पीड़ित परिवार ने इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला बदलते हुए सिद्धू को एक साल कैद की सजा सुना दी।