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पंजाब में बिजली संकट की आहट:​​​​​​​गर्मियां शुरू होने से पहले ही ठप होने लगे प्राइवेट थर्मल प्लांट यूनिट; कोयले की कमी ने बढ़ाई चिंता

चंडीगढ़10 महीने पहले
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पंजाब में गर्मी का सीजन शुरू होते ही बिजली संकट की आहट आने लगी है। अभी पूरी तरह से AC चलने शुरू भी नहीं हुए लेकिन बिजली की मांग पिछले साल के 7 हजार मेगावाट के मुकाबले 8 हजार मेगावाट को क्रॉस कर रही है। राज्य में तीन निजी थर्मल प्लांट में कोयला संकट पैदा होने लगा है। इनमें गोइंदवाल साहिब, राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल शामिल हैं। गुरुवार को इनकी 7 में से 5 ही यूनिट चली हैं। तलवंडी साबो थर्मल प्लांट की एक यूनिट बंद करनी पड़ी। इससे राज्य में छोटे-छोट कट लगने शुरू भी हो गए हैं।

हालांकि पावरकॉम के लेहरा मुहब्बत और रोपड़ थर्मल प्लांट को लेकर अभी चिंताजनक स्थिति नहीं है। यहां करीब 18 से 22 दिन का कोयला बचा हुआ है। हालांकि इनकी 8 में से 4 ही यूनिट बिजली की प्रोडक्शन कर रही हैं।

पिछली बार चन्नी संकट नहीं संभाल सके, इस बार CM मान के आगे यह चुनौती होगी
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कोयले की कमी या कीमत बढ़ी
कोयला संकट के बीच यह बात भी अहम है कि सप्लाई के मुकाबले बिजली की बढ़ी कीमत से दिक्कत बढ़ी है। जानकारों के मुताबिक कोल इंडिया लिमिटेड ने पब्लिक सेक्टर थर्मल प्लांटों के लिए तो 4 हजार रुपए प्रति मीट्रिक टन का एग्रीमेंट किया है। हालांकि निजी थर्मल प्लांट ऑनलाइन बोली के जरिए कोयला खरीदते हैं। गर्मियों में इसकी मांग बढ़ने पर रेट भी तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिस वजह से कोयला संकट पैदा हो रहा है।

पिछले साल पंजाब ने झेला ब्लैक आउट
पंजाब में पिछले साल अक्टूबर महीने में पंजाबियों ने बिजली संकट झेला। कोयले की कमी की वजह से प्राइवेट थर्मल प्लांटों में बिजली उत्पादन ठप हो गया था। भीषण गर्मी में लोगों को 3 से 4 घंटे तक के कट झेलने पड़े।

चन्नी सरकार नहीं संभाल सकी, अब CM मान के लिए चुनौती
पिछले साल हुए बिजली संकट को संभालने में तत्कालीन CM चरणजीत चन्नी की अगुवाई वाली सरकार नहीं संभाल सकी। खेती और इंडस्ट्री को पर्याप्त बिजली देना तो दूर, कोयला संकट से घरों में भी बत्ती गुल हो गई। अब पंजाब में CM भगवंत मान की अगुवाई में आम आदमी पार्टी की सरकार बन गई है। ऐसे में उन्हें अब बिजली संकट की चुनौती को झेलना होगा।

पावरकॉम का दावा, पूरी बिजली का प्रबंध
पावरकॉम के अफसरों का दावा है कि इस बार 15,500 मेगावाट बिजली का प्रबंध किया गया है। पिछली बार बिजली की सर्वाधिक मांग 14 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी। उन्होंने दावा किया कि इस बार हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और मेघालय से 2000 से 2500 मेगावाट तक बिजली खरीदी गई है। यह बिजली इस साल जून से सितंबर महीने तक मिलेगी।

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