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राहुल गांधी के ऐलान से जंग तेज:पंजाब में CM चेहरे की लॉबिंग; सिद्धू विधानसभा चुनाव जीते, लेकिन चन्नी ने लोकसभा में पार्टी को भी जिताया

चंडीगढ़8 महीने पहलेलेखक: मनीष शर्मा
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पंजाब में कांग्रेस का CM चेहरे की घोषणा के राहुल गांधी के फैसले से चरणजीत चन्नी और नवजोत सिद्धू के बीच जंग तेज हो गई है। पार्टी के कार्यकर्ता और नेता हाईकमान के आगे उनका नाम रखें, इसके लिए लॉबिंग शुरू हो गई है। इसके बीच खास बात यह है कि 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव का रिजल्ट और दलित वोट बैंक का गणित देखें तो वह चन्नी के पक्ष में है।

चन्नी न केवल अपनी सीट से जीते बल्कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को अपनी सीट से ज्यादा वोट दिलाई। सिद्धू के मामले में यह बिल्कुल उलट है। वहीं चन्नी के सहारे कांग्रेस पंजाब में 32% दलित वोट बैंक को साध सकती है। सिद्धू जिस जट्‌टसिख कम्युनिटी से हैं, उनके सिर्फ 19% वोट हैं, उसमें भी अकाली दल का दबदबा माना जाता है।

पढ़िए... चन्नी और सिद्धू के चुनावी आंकड़े

चरणजीत चन्नी : चन्नी 2017 में चमकौर साहिब सीट से विधायक बने। उन्हें 61 हजार 60 वोटें पड़ी। उनका वोट प्रतिशत 42.26% रहा। इसके बाद जब 2019 में लोकसभा चुनाव हुए तो आनंदपुर साहिब सीट से कांग्रेस प्रत्याशी को चमकौर साहिब से 46.99% वोट मिले। मतलब यह कि चन्नी खुद ही नहीं जीते बल्कि पार्टी की जीत में उनकी सीट का बड़ा योगदान रहा। इसी सीट से मनीष तिवारी सांसद हैं, जो अक्सर सिद्धू पर निशाना साधते रहे हैं।

नवजोत सिद्धू : सिद्धू 2017 में अमृतसर ईस्ट से विधायक बने। सिद्धू को 67 हजार 865 वोट मिले। सिद्धू का दबदबा ऐसा था कि खुद चुनाव लड़े तो उन्हें अमृतसर ईस्ट से 61.01% यानी आधे से ज्यादा वोट मिले। हालांकि 2 साल बाद लोकसभा चुनाव हुए तो यह कांग्रेस के लोकसभा कैंडिडेट के लिए यह वोट शेयर 53.2% रह गया। वहीं अकाली-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार का वोट प्रतिशत 2017 में 17.82% के मुकाबले बढ़कर 40.33% हो गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह भी कह चुके हैं कि सिद्धू भीड़ इकट्‌ठी कर सकते हैं लेकिन चुनाव नहीं जिता सकते। लोकसभा चुनाव में सिद्धू को बठिंडा और गुरदासपुर की जिम्मेदारी दी थी। दोनों जगह सिद्धू ने प्रचार किया। दोनों ही सीटें कांग्रेस हार गई।

जो वजह कैप्टन को हटाने की बनी, वही सिद्धू के साथ भी
पंजाब कांग्रेस में CM चेहरे की जंग के बीच एक और दिलचस्प पहलू है। जिस वजह से कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी से हटना पड़ा, लगभग वही सिद्धू के साथ भी है। कैप्टन के खिलाफ बगावत करने वाले चन्नी, मंत्री सुखजिंदर रंधावा, तृप्त राजिंदर बाजवा, विधायक कुलबीर जीरा जैसे कई नेता पहले सिद्धू के साथ थे। जिन्होंने कैप्टन को हटाने के लिए पूरा मोर्चा संभाला।

हालांकि रंधावा और सिद्धू में CM की कुर्सी की जंग हो गई और चरणजीत चन्नी CM बन गए। जिसके बाद इनका ग्रुप चन्नी के साथ है। जो खुलकर चन्नी को सीएम चेहरा बनाने की वकालत कर रहे हैं। कैप्टन के जाने के बाद उनके जो करीबी कांग्रेस में रह गए, वह भी चन्नी के समर्थन में हैं। हालांकि सिद्धू के एजेंडे और बोलने की कला पंजाब के युवाओं को खूब रास आ रही है।

111 दिन में ताबड़तोड़ फैसले लिए लेकिन ED रेड के बाद सवालों में चन्नी
CM बनने के बाद चन्नी ने 111 दिन में ताबड़तोड़ फैसले लिए। कैप्टन की महाराजा छवि को तोड़ा। वीआईपी इमेज को भी काफी कम किया। हालांकि अंतिम दिनों में उनकी साली के बेटे भूपिंदर हनी पर ED की रेड से सीएम भी सवालों में हैं।

चन्नी ने इसे राजनीतिक बदलाखोरी बताया लेकिन 18 लाख कैपिटल इन्वेस्टमेंट की कंपनी चलाने वाले हनी के घर से मिले 10 करोड़ से सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्षी भी चन्नी को घेर रहे हैं क्योंकि अवैध रेत माफिया पंजाब के सबसे बड़े मुद्दों में से एक है। कैप्टन अमरिंदर सिंह भी सीधे चन्नी पर अवैध रेत खनन को लेकर आरोप लगा रहे हैं। इसके उलट सिद्धू के सियासी जीवन में ऐसे कोई आरोप नहीं है।

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