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संगरूर लोकसभा उपचुनाव:30 मई से 6 जून तक नामांकन; 23 को मतदान; 26 को रिजल्ट; CM की बहन लड़ सकती है चुनाव

चंडीगढ़एक महीने पहले
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पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट का उपचुनाव के लिए 23 जून को मतदान होगा। 30 मई से 6 जून तक नामांकन होंगे। 7 जून को नामांकन की पड़ताल होगी। 9 जून तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। 26 जून को इसका रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। पंजाब के CM भगवंत मान के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई थी।

उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिलने और धूरी सीट से विधायक चुने जाने के बाद यह सीट खाली की थी। उपचुनाव के लिए पूरे संगरूर सीट के दायरे में तत्काल प्रभाव से चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। आम आदमी पार्टी यहां से सीएम भगवंत मान की बहन मनप्रीत कौर को चुनाव लड़ा सकती है।

विधायक चुने जाने के बाद संगरूर लोकसभा सीट से इस्तीफा देते सीएम भगवंत मान।
विधायक चुने जाने के बाद संगरूर लोकसभा सीट से इस्तीफा देते सीएम भगवंत मान।

भगवंत मान की गढ़ है संगरूर सीट
संगरूर सीट CM भगवंत मान का गढ़ है। मान ने यहां से लगातार 2 लोकसभा चुनाव जीते। 2019 में जब पूरे देश में AAP के सब लोकसभा कैंडिडेट हार गए तो अकेले मान ही जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। मान ने जिस धूरी सीट से विधायक का चुनाव जीता, वह भी इसी सीट के अधीन आती है।

मान सरकार की साख दांव पर
संगरूर उपचुनाव को लेकर मान सरकार की साख दांव पर रहेगी। नई सरकार के करीब ढ़ाई महीने बाद यह उपचुनाव हो रहे हैं। यहां जीते तो उनकी सरकार की कारगुजारी पर मुहर लग जाएगी। जिसका फायदा आगे हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनाव में होगा। अगर आप यह सीट हार गई तो फिर तय है कि इससे सरकार के आगे बड़ी चुनौती होगी। वहीं सियासी तौर पर आम आदमी पार्टी के लिए यह नुकसानदेह साबित होगा।

अभी किसी ने नहीं की उम्मीदवार की घोषणा
यहां से चुनाव लड़ने के लिए अभी किसी पार्टी ने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। आम आदमी पार्टी को लेकर यहां से कई नाम चर्चा में हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम CM भगवंत मान की बहन मनप्रीत कौर का है। जो खुद भी चुनाव लड़ने में दिलचस्पी दिखा चुकी हैं। मान के करीबी दोस्त पंजाबी कॉमेडियन कर्मजीत अनमोल भी चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा यहां से पूर्व विधायक अरविंद खन्ना को उतार सकती है। कांग्रेस और अकाली दल भी यहां किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतार सकता है। कांग्रेस के पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के लिए भी यहां चुनौती होगी। पंजाब विस चुनाव में करारी हार और उनके प्रधानगी पद संभालने के बाद यह पंजाब में यह पहला चुनाव है।