रोपड़ वन विभाग में करोड़ों का घोटाला:नालागढ़ के 2 भाइयों समेत 3 गिरफ्तार; 90 हजार प्रति एकड़ वाली जमीन 9.90 लाख में बेच दी

रोपड़3 महीने पहले
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पंजाब के रूपनगर (रोपड़) में वन विभाग के लिए भूमि खरीदने के मामले में करोड़ों रुपए की हेराफेरी होने का मामला सामने आया है। अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके गांव करूरा की 90 हजार रुपए प्रति एकड़ वाली जमीन को 9.90 लाख में बेचकर वन विभाग को करोड़ों का चूना लगाया गया। रजिस्ट्री में भी अधिकारियों की मिलीभगत से हेराफेरी की गई।

दरअसल, यह मामला उस वक्त सामने आया, जब वन विभाग टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से 2019 में खरीदी गई जमीन का म्यूटेशन करवाने जा रहा था। विभाग ने जितनी जमीन 54 एकड़ और 8 मरला (गैर वन क्षेत्र) के लिए पैसे दिए थे, माल रिकॉर्ड में उतनी जमीन थी ही नहीं। जिस गांव करूरा में यह जमीन खरीदी गई थी, वह नूरपुर बेदी तहसील के तहत आता है।

रजिस्ट्री वाले दिन नूरपुर बेदी का तहसीलदार ड्य़ूटी पर था, लेकिन बावजूद इसके जमीन की रजिस्ट्री आनंदपुर साहिब वाले रजिस्ट्रार के पास करवा दी गई। वन विभाग के अधिकारियों ने तत्कालीन तहसीलदार आनंदपुर साहिब के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए सचिव वित विभाग के पत्र लिखा है। जमीन घोटाले का पर्दाफ़ाश होने के बाद अब वन विभाग हरकत में आया।

विभाग ने हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में फ्रेंड्स कालोनी वार्ड नंबर 7 निवासी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के हिमाचल से एकमात्र सदस्य दलजीत सिंह भिंडर एवं उनके भाई अमरिंदर सिंह भिंडर पुत्र जोगिंदर सिंह भिंडर और मालुपेटा (शहीद भगत सिंह नगर) निवासी टेक चंद पुत्र कमल किशोर के खिलाफ धोखाधडी का मामला दर्ज कराकर इन्हें गिरफ्तार करा दिया है।

नर्सरी लगाने के लिए खरीदी थी जमीन

वन विभाग ने पौधों की नर्सरी लगाने के लिए रूपनगर में जमीन खरीदने के लिए 2019 में टेंडर निकाला था। जमीन खरीदने के लिए वन विभाग ने विशेष तौर पर एक कमेटी का भी गठन किया था, जिसने जमीन की औसत वैल्यू और मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजे की रकम तय करनी थी, लेकिन हैरानी की बात है कि कमेटी ने बिना मार्केट वैल्यू और औसत देखे जमीन का रेट तय कर दिया। माल रिकॉर्ड में यह भी नहीं जांचा परखा गया कि उन्हें जितनी जमीन एकड़ और 8 मरला (गैर वन क्षेत्र) भूमि चाहिए, वह रकबा पूरा है भी या नहीं।

घोटाले से पहले करवाए थे जमीन के तबादले

वन विभाग की जांच में सामने आया है कि जिस भूमि को नालागढ़ के सिंह बंधुओं ने वन विभाग को बेचा, वह तबादले की जमीन थी और विवादित जगह थी। टेंडर निकलने के बाद दोनों भाइयों ने पहले विवादित जमीन का तबादला करवाया औऱ उसे वन विभाग को बेच दिया। जमीन की रजिस्ट्री भी जिस तहसील नूरपुर बेदी में होनी चाहिए थी, वहां पर न करवाकर आनंदपुर साहिब में करवा दी।

तत्कालीन तहसीलदार, वसीका नवीस समेत एनओसी जारी करने वाले तमाम अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। इन पर भी अब गाज गिरना लगभग तय है। क्योंकि इन्हीं की वजह से सरकार के खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगा है।