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गन्ने का रेट:अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत कम, पंजाब में गन्ने का रेट अधिक, मिल पर अभी भी 15 करोड़ बकाया

नवांशहर2 महीने पहले
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  • घाटे की मुख्य वजह ,चीनी की कीमत और पैदावार में 10 रुपए का अंतर

चीनी मिल बीते सालों से लगातार घाटे में ही जा रही है, जिसके चलते लगातार हालात ऐसे पैदा हो रहे हैं कि मिल पर मौजूदा समय में भी गन्ना किसानों की करीब 15 करोड़ 30 लाख रुपए की देनदारी खड़ी है। इसके पीछे के कारणों पर गौर किया जाए तो तस्वीर कुछ और ही निकल कर सामने आती है कि चीनी मिल के घाटे के पीछे मुख्य वजह है चीनी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत और इसके विपरीत पंजाब में गन्ने का अधिक रेट। यही मुख्य वजह है जिसके चलते चीनी मिल लगातार घाटे में ही जा रही है और यह घाटा हर साल ही सामने आ रहा है।

चाहे चीनी मिल द्वारा तय लक्ष्य के अनुसार गन्ना पिराई की जाए या फिर लक्ष्य से कम मगर पड़ने वाला घाटा सामने आ ही जाता है। जिसके चलते हालात यह हैं कि चीनी मिल का नया पिराई सीजन भी शुरू हो गया है, मगर इसके बावजूद गन्ना किसानों का बकाया करीब 15 करोड़ 30 लाख रुपए बनता है बीते पिराई सीजन से संबंधित है और चीनी मिल पर किसानों का बकाया है। फिलहाल की स्थिति यह है कि चीनी मिल के पास फंड नहीं है ताकि वह बीते सीजन का बकाया गन्ना किसानों को वापस कर दे। जिसके चलते चीनी मिल को सरकार की ग्रांट का ही इंतजार है।

चीनी की कीमत और पैदावार में करीब 10 रुपए का अंतर है। यही अंतर चीनी मिल के घाटे की मुख्य वजह बताई जा रही है। इसी वजह से चीनी मिल का घाटा बढ़ता ही जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार द्वार गन्ने की कीमत 275 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई है, जबकि राज्य सरकार ने गन्ने की कीमत पर 35 रुपए बोनस की घोषणा की हुई है।

जिसके चलते चीनी मिल को प्रति क्विंटल 310 रुपए किसानों को अदा करने पड़ रहे हैं। मिल द्वारा 1 क्विंटल गन्ने से 9 किलो चीनी की पैदावार की जाती है। जिसके चलते मिल के खर्च सहित गन्ने की कीमत के अनुसार चीनी करीब 42 से 44 रुपए के लगभग प्रति किलो मिल को पड़ती है। मगर बाजारी कीमत की बात करें तो चीनी की कीमत 32 से 34 रुपए प्रति किलो तक ही मिल पाती है।

वहीं 9 किलो की पैदावार व गन्ने की प्रति क्विंटल की कीमत को देखा जाए तो करीब साढ़े 34 रुपए प्रति किलो चीनी सिर्फ बनती ही है, जबकि इस पर चीनी मिल के अन्य खर्चे और पड़ जाते हैं। इसी वजह से मिल पर हर साल किसानों की देनदारी बढ़ जाती है।

सरकार ने चीनी मिल को जारी किए 16 करोड़ 40 लाख रुपए, अभी भी किसानों का बकाया बाकी

मिली जानकारी के अनुसार केंद्र व राज्य सरकार द्वारा गन्ने की तय की गई कीमत में अंतर के चलते सरकार द्वारा चीनी मिल को हर सीजन कुछ राशि जारी की जाती है, ताकि चीनी मिल किसानों की देनदारी निपटा सके। साल 2019-2020 के सीजन के दौरान अभी तक चीनी मिल को 16 करोड़, 39 लाख 87 हजार रुपए प्राप्त हुए हैं, जबकि बीते सीजन के किसानों को अभी 15 करोड़ 30 लाख रुपए और देेने हैं। बीते सालों के सीजन की बात करें तो साल 2015-16 के दौरान 23 करोड़ 42 लाख, साल 2016-17 के दौरान 16 करोड़ 42 लाख, साल 2017-18 के दौरान 19 करोड़ 93 लाख, साल 2018-19 में 13 करोड़ 7 लाख रुपए की राशि सरकार ने मिल को जारी की है।

इस सीजन के दौरान करीब 30 लाख क्विंटल गन्ना पिराई का अनुमान
मिली जानकारी के अनुसार इस सीजन के दौरान करीब 30 लाख क्विंटल गन्ना पिराई का अनुमान है। मिल द्वारा गन्ना बाउंड कर लिया गया है और सीजन शुरू हो चुका है। जिसके चलते चीनी मिल में लगातार गन्ना आ रहा है। मिल प्रबंधन के जीएम सुरिंदर पाल का कहना है कि मिल द्वारा जो गन्ना बाउंड किया गया है उसकी अधिकतर रिकवरी की जाएगी। मगर गन्ने व चीनी की कीमत सरकारों द्वार तय की जाती है। इसलिए कीमतों को अधिक या कम करना सरकार के स्तर पर ही किया जा सकता है।

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