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  • The Municipal Corporation Had To Make 638 Families Of 5 Slum Areas To Own The Occupied Lands, The Survey Entangled Work.

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स्लम डवैलर्स स्कीम फ्लॉप:नगर निगम ने 5 स्लम एरिया के 638 परिवारों को कब्जे की जमीनों का मालिक बनाना था, सर्वे में गड़बड़ी से काम फंसा

जालंधर11 दिन पहले
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सरकार की स्लम डवैलर्स स्कीम सही से शुरू होने से पहले ही फ्लॉप हो गई है। निगम द्वारा कराए सर्वे में कई खामियां सामने आने के बाद जिले में स्कीम का काम फंस गया है। जबकि बुधवार को ही गढ़ा के जीवन सिंह कालोनी के 3 परिवारों को कब्जे की जमीन का मालिकाना हक देना था, जिस पर वो 12 साल से अधिक समय से घर बनाकर बसे हुए हैं। खास बात है कि निगम ने सिटी के 5 स्लम का सर्वे कर 638 लाभार्थी परिवारों की लिस्ट तैयार की थी। इसमें से एकमात्र जीवन सिंह नगर स्लम निगम की जमीन पर है, जहां के 26 परिवारों को कब्जे के जमीन का मालिक बनाने में भी कई तकनीकी पेंच फंसे हैं।

जबकि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र वाले संजय गांधी नगर और काजी मंडी की जमीन की एनओसी देने से इंकार कर दिया है। पॉवरकाम की मिल्कियत वाली चौगिट्टी के अंबेडकर नगर की एनओसी पर फैसला पटियाला स्थित पॉवरकाम के हेड ऑफिस में होगा। ऐसे में निगम ने दोबारा सर्वे कराने का फैसला किया है, लेकिन स्कीम को लागू कर सूबे में अव्वल जिला बनने का जालंधर का सपना टूट गया है। कारण पटियाला में 8 लाभार्थी को कब्जे की जमीन का मालिक बनाने का काम हो चुका है।

फिलहाल निगम की जमीन पर बसे जीवन सिंह नगर स्लम एरिया के 26 परिवारों को स्कीम का लाभ मिलने की उम्मीद

इधर... संजय गांधी कॉलोनी में स्कीम की खुशी में पार्षद ने लड्डू तक बांट दिए... उधर, जेआईटी चेयरमैन बोले- ये स्लम ही नहीं, अधिकांश मकान लेंटर वाले, सीवरेज-वाटर-स्ट्रीट लाइट की सुविधा भी उपलब्ध

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया का कहना है कि एनओसी के लिए भेजी गई चिट्ठी का जवाब भेज दिया गया है। फिलहाल किसी जमीन की एनओसी नहीं दी गई है। कारण काजी मंडी में 120 फुटी रोड साइट का कब्जा खाली कराने के लिए पहले ही सरकार से 55 कब्जाधारी परिवार को शिफ्ट कराने के लिए सरकार से मंजूरी हो रखी है। ऐसे में 128 परिवार को मौके पर पक्का करने से रोड का काम कभी पूरा नहीं हो पाएगा। उधर, संजय गांधी नगर में अधिकांश मकान लेंटर वाले हैं, सीवरेज, वाटर सप्लाई और स्ट्रीट लाइट की सुविधा है। इसलिए वो स्लम की कैटेगरी से ऊपर है। ट्रस्ट इस जमीन की मलकीयत देने के लिए लोगों से सरकार द्वारा तय कीमत लेने के बाद ही जमीन अलॉट करेगा।

भगत सिंह कॉलोनी में सेंट्रल गवर्नमेंट की जमीन को सर्वे में ट्रस्ट की बताया, वहां भी पेच फंसा

निगम टीम ने सर्वे में 5 में से एक स्लम एरिया भगत सिंह कालोनी का बताया था, जहां कब्जे की जमीन पर 79 परिवार रह रहे हैं, लेकिन ट्रस्ट चेयरमैन ने मीटिंग में उनकी जमीन होने से इंकार किया। उनका कहना है कि यह जमीन ट्रस्ट की प्रापर्टी से बाहर है, बाद में पड़ताल में पता लगा कि यह जमीन सेंट्रल गवर्नमेंट सहित एक और विभाग की है। जबकि सरकार की स्कीम में सेंट्रल गवर्नमेंट की जमीन के कब्जे को इससे बाहर रखा गया है।

मेयर राजा ने कहा, नए सिरे से सर्वे कराना जरूरी...
मेयर जगदीश राजा ने बताया कि सर्वे के कई खामियां सामने आई है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को भी एतराज है। जीवन सिंह नगर के लोगों को तो जल्द ही जमीन का मालिक बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, लेकिन दूसरे स्लम के लिए नए सिरे से सर्वे करने को कहा गया है।
30 वर्ग मीटर से अधिक जमीन का रेट भी अभी तक तय नहीं
मेयर ने बताया कि स्कीम में कब्जे वालों को 30 वर्ग मीटर तक की जमीन मुफ्त में दी जानी है, लेकिन इसके ऊपर के रकबे की कीमत ली जाएगी, जो कलेक्टर रेट का कुछ हिस्सा होगा, लेकिन अभी यह रेट तय नहीं हुआ है। इसलिए भी लोगों को कब्जे की जमीन देने की प्रक्रिया में कुछ समय लग रहा है।

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