मदर्स-डे:मां के रूप में आदर्श है दिव्यांग राजू बाला का संघर्ष, स्पेशल बच्चों को पढ़ाती हैं

पठानकोट14 दिन पहले
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  • मां शब्द बीज की तरह लघु और बरगद की तरह विराट है, मां अपने आप में संपूर्ण ग्रंथ है

उत्तम गार्डन कालोनी की दिव्यांग राजू बाला महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं और मां के रूप में एक आदर्श। खुद 70 फीसदी दिव्यांग होने पर उन्होंने संघर्ष करके बीए और बीएड किया। बाद में लवली यूनिवर्सिटी जालंधर से डिप्लोमा इन स्पेशल चिल्ड्रन एजूकेशन किया और अब सरकारी प्राइमरी स्कूल आनंदपुर रोड में स्पेशल बच्चों काे पढ़ाती हैं। घर में पति विकास गुप्ता और ढाई साल की बेटी निष्ठा अकेले होने के कारण बेटी को साथ स्कूटी (स्पेशल व्हीकल) पर लेकर जाती हैं।

गांवों में जाकर पैदल किया सर्वे

दिव्यांग राजू बाला ने अपने संघर्ष की कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्लस टू करने के बाद जब इन्हें सरकारी नौकरी मिली तो इसके बाद पठानकोट के साथ लगते विभिन्न गांवों में स्पेशल बच्चों को ढूंढने के लिए सर्वे किया इस दौरान 1700 स्पेशल बच्चों की पहचान की गई लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत उन्हें तब होती थी जब वह पैदल चलते चलते गिर जाती थी लेकिन इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने काम में दाेबारा लग जाती थी। अभी मैं अपने स्कूल 45 स्पेशल बच्चों को पढ़ाती है जिन्हें वह अपने बच्चों की तरह ही प्यार करती है उन्हें पढ़ाती है।

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