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  • After 558 Years, Guru And Saturn Will Sell In Their Respective Zodiac Signs, Bhadra Will Remain Till 9.29 Am, Rakhi Will Be Tied All Day.

रक्षाबंधन कल:558 साल बाद गुरु और शनि अपनी-अपनी राशि में रहेंगे बिक्री, सुबह 9.29 बजे तक रहेगी भद्रा, पूरे दिन बांध सकेंगे राखी

पटियाला7 दिन पहले
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  • मेष, वृष, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर, मीन राशि के लोगों के लिए शुभ रहेगा समय
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सोमवार को रक्षाबंधन होगा। सुबह 9.29 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा के बाद ही बहनों को अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधना चाहिए। 9.29 के बाद पूरे दिन राखी बांध सकते हैं। 3 तारीख को सुबह 7.30 बजे के बाद पूरे दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। पूर्णिमा पर पूजन के बाद अपने गुरु का आशीर्वाद भी अवश्य लें।

डॉ. पंडित शिव भारद्वाज ने बताया रक्षाबंधन पर गुरु अपनी राशि धनु में और शनि मकर में वक्री रहेगा। इस दिन चंद्र भी शनि के साथ मकर में रहेगा। ऐसा योग 558 साल पहले 1462 में बना था। उस साल में 22 जुलाई को रक्षाबंधन मनाया गया था। इस बार रक्षाबंधन पर राहु मिथुन राशि में, केतु धनु राशि में है।

राशियों पर ग्रहों का असर
डॉ. शिव भारद्वाज के मुताबिक मेष, वृष, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर, मीन राशि के लोगों के लिए ग्रहों के योग शुभ रहने वाले हैं। इन लोगों को कड़ी मेहनत का फल मिल सकता है। स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। नौकरी में सफलता मिलने के योग हैं। कर्क राशि के लिए समय सामान्य रहेगा। मिथुन, सिंह, तुला, कुंभ राशि के लोगों को संभलकर रहना होगा। इन लोगों को समय का साथ नहीं मिल पाएगा। कार्य की अधिकता रहेगी।

विधिवत पूजा के बाद बांधना चाहिए रक्षासूत्र

रक्षाबंधन पर सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए। स्नान के बाद देवी-देवताओं की पूजा करें। पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। इन शुभ कामों के बाद पीले रेशमी वस्त्र में सरसों, केसर, चंदन, चावल, दूर्वा और अपने सामर्थ्य के अनुसार सोना या चांदी रख लें और धागा बांधकर रक्षासूत्र बना लें। इसके बाद घर के मंदिर में एक कलश की स्थापना करें। उस पर रक्षासूत्र को रखें, विधिवत पूजन करें। पूजा में हार-फूल चढ़ाएं। वस्त्र अर्पित करें, भोग लगाएं, दीपक जलाकर आरती करें। पूजन के बाद रक्षासूत्र दाहिने हाथ की कलाई पर बंधवाना चाहिए।

सबसे पहले इंद्राणी ने देवराज इंद्र को बांधा था रक्षासूत्र
पं. भारद्वाज के मुताबिक प्राचीन समय में देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हो रहा था। असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवराज इंद्र और सभी देवता इस समस्या को दूर करने के लिए देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे। इंद्र ने देवगुरु से कहा कि मैं स्वर्ग छोड़कर नहीं जा सकता, असुरों ने हमें पराजित कर दिया, हमें फिर से युद्ध करना होगा।

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