एग्रो टिप्स:दयालगढ़ के बुध सिंह 150 एकड़ में कर रहे खेती, नहीं जलाते पराली

पटियाला15 दिन पहले
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9 साल से नहीं जलाए अवशेष - Dainik Bhaskar
9 साल से नहीं जलाए अवशेष

जिला पटियाला के गांव दयालगढ़ के किसान बुध सिंह 9 साल से धान की पराली सहित अन्य अवशेष जलाए बिना सफल खेती कर रहे हैं। बुध सिंह ने बताया कि वे अपनी और ठेके पर ली 150 एकड़ जमीन में खेती कर रहे हैं। धान की कटाई के बाद पराली के प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर और एमबी पलाओ का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पराली को बिना आग लगाए 9 साल से खेती कर रहे हैं। सुपर एसएमएस वाली कंबाइन से धान की कटाई के बाद मल्चर, पलटावें हल और रोटावेटर सुपर सीडर की मदद से खेत तैयार कर गेहूं की बिजाई करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे फसलों पर खादों के इस्तेमाल में कमी आती है, जबकि पैदावार पहले से बढ़ती है।

जमीन के लिए देसी घी का काम करते हैं अवशेष इसलिए इन्हें जलाने की बजाय खेत में मिला दें

किसान बुध सिंह ने बताया कि अवशेष खेत में ही मिला देने चाहिए। यह जमीन के लिए देसी घी का काम करते हैं। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और इससे यूरिया और डीएपी सहित अन्य खादों के इस्तेमाल में भी कमी आती है, जिससे खेती खर्च कम होते हैं, जबकि पैदावार भी बढ़ती है। इसलिए किसानों को पराली कभी नहीं जलानी चाहिए।

100 दुधारू पशु भी रखे, खाद की जगह डाल रहे रूड़ी

किसान बुध सिंह ने बताया कि खेती के साथ-साथ वह डेयरी फार्मिंग भी कर रहे हैं। उन्के पास 100 दुधारू पशु हैं। इससे भी अच्छी कमाई हो रही है। पशुओं के गोबर से बनी रूड़ी खाद का प्रयोग खेतों में करते हैं। वहीं, गोबर गैस प्लांट भी लगाया है, इससे तैयार गैस का घर में प्रयोग कर रहे हैं।

डीसी ने की किसान के प्रयासों की सराहना

इधर, पटियाला की डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने किसान बुध सिंह के प्रायसों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अन्य किसानों को भी खेती के साथ-साथ डेयरी फार्मिंग जैसे सहायक व्यवसाय अपनाकर अपनी आमदन बढ़ानी चाहिए। बताया कि सरकार के अलग-अलग विभागों की ओर से सहायक कारोबार शुरू करने के इच्छुक किसानों को बाकायदा ट्रेनिंग भी करवाई जाती हैै।

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