‘सोने’ की खुशी:एनआईएस में अनुशासन, अभ्यास से नीरज ने जीता सोना, 6 साल तक नहीं ली छुट‌्टी

पटियाला3 महीने पहलेलेखक: शशांक सिंह
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  • पटियाला में देर रात आतिशबाजी, प्रैक्टिस के दौरान नीरज को सिखानेे वाले कोच बोले-
  • हॉस्टल, मेस सहित अलग-अलग हिस्सों में जमकर सेलिब्रेशन
  • 2015 में पटियाला में सीनियर फेडरेशन कप खेला, यहीं बनाया था अपना बेस्ट 88.06 मीटर

एनआईएस में प्रैक्टिस करने वाले नीरज चोपड़ा ने टाेक्याे ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता है। नीरज 6 साल पहले से एनआईएस में प्रैक्टिस कर रहे हैं। यहां के काेच रहे बहादुर सिंह और कमाल अली खान का कहना है कि वह काफी अनुशासन में रहता था। प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान देता और जो सोचता था वह करके मानता। कोविड के चलते 2 साल से उसने एनआईएस में ही प्रैक्टिस की और ओलंपिक शुरू होने के 15 दिन पहले ही वह विदेश में ट्रेनिंग के लिए गया था। उसने एनआईएस में दो टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। 2015 में वह पहली बार पटियाला में सीनियर फेडरेशन कप खेला था।

इधर देर रात नीरज के मेडल जीतने की खुशी में जमकर आतिशबाजी की गई और केक काटकर जश्न मनाया गया। खिलाड़ियों ने हॉस्टल के बाहर आतिशबाजी की। कहा कि उनके मेडल जीतने पर कई युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। 2008 में इंडिविजुअल में अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड जीता था उसके बाद अब नीरज ने यह उपलब्धि हासिल की है।

नीरज का गोल्ड आने का एक कारण यह भी है कि एनआईएस में 3 महीने पहले जैवलिन थ्रोवर केटीजी मशीन लगाई गई थी। जिससे जेवलिन थ्रो करने वाले प्लेयरों की ताकत और स्पीड बढ़े। जर्मनी और चीन के बाद भारत तीसरा ऐसा देश था जिसने विशेष मशीनें लगाई थी।

ही इज रियल स्पोर्ट्स मेन : कोच कमाल खान
इंडिया जूनियर एथलेटिक्स टीम के चीफ कोच कमाल अली खान ने बताया कि नीरज चोपड़ा रियल स्पोर्ट्स मैन हैं। उन्होंने दूसरे खिलाड़ियाें के सामने उदाहरण पेश किया है। जूनियर खिलाड़ी उनकाे देखें और अपना रोल मॉडल बनाएं। बताया कि नीरज प्रैक्टिस और प्रैक्टिस के बाद भी अनुशासन में रहते हैं।

इतना अनुशासन मैंने किसी खिलाड़ी में नहीं देखा। यह इंडिया का पहला जूनियर वर्ल्ड एथलीट है जिसने गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एनआईएस पटियाला ने सपोर्ट किया और इक्यूपमेंट मुहैया करवाए, जिससे यह उपलब्धि एनआईएस के खाते में जुड़ी है

नीरज जो कहता था वही करता था : पूर्व कोच बहादुर
इंडियन एथलेटिक्स टीम के पूर्व कोच बहादुर सिंह ने नीरज चोपड़ा को बधाई दी। बताया कि पहली बार जब वह एनआईएस आया था तब वह 73 और 74 की रेंज में भाला फेंकता था। वह अनुशासन में रहता था। 6 साल तक प्रैक्टिस के दौरान छुट्‌टी नहीं ली। उसने एशियन, कॉमनवेल्थ गेम्स और जूनियर गेम्स में मेडल जीते हैं।

उम्मीद थी नीरज सभी से 5 मीटर आगे फेंकेगा : ईडी
एनआईएस के ईडी कर्नल राज विश्वनोई ने नीरज चोपड़ा को बधाई दी। कहा कि वह काफी अनुशासन में रहता था और एनआईएस में लंबे समये से प्रैक्टिस कर रहा था। कोविड के समय उसने कड़ी मेहनत की। सभी सपोर्टिंग स्टाफ से पहले ही कहा था कि जितने एथलीट भाग ले रहे हैं वह उनसे 5 मीटर आगे ही फेंकेगा। मैच के दौरान उसने कुछ ऐसा ही किया।

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