कोरोना प्रहार:बीर जी श्मशान में पहले रोजाना 20 क्विंटल लकड़ी लगती थी, अब 60 क्विंटल, एक दिन में 11 मौतें

पटियाला6 महीने पहले
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पटियाला के बीर जी श्मशान घाट में रिजर्व रखी गई लकड़ियां। - Dainik Bhaskar
पटियाला के बीर जी श्मशान घाट में रिजर्व रखी गई लकड़ियां।
  • पहले जहां रोज होते थे 2 से 3 संस्कार, वहीं अब 20 के पार, कोविड से 3 दिन में 30 की मौत

कोरोना से हो रही मौतों के बीच बीर जी श्मशानघाट में संस्कार की जगह नहीं मिल रही है। श्मशानघाट में शेड बनाकर 20 संस्कार स्थल बनाए हैं, लेकिन अब रोजाना मरने वालों की संख्या 20 से ऊपर होने (कोरोना और सामान्य दोनों) के कारण श्मशानघाट मैनेजमेंट कमेटी ने शेड से बाहर पार्क में लोगों को संस्कार करने की अनुमति दे दी है। यहां पार्कों में जब जगह फुल हुई तो अब लोगों काे इलेक्ट्राॅनिक क्रिमेशन मशीन में संस्कार शुरू किए गए हैं।

पहले इस मशीन में महीने में 2 से 3 संस्कार होते थे, अब यहां रोजाना 5 से 7 संस्कार हो रहे हैं। मैनेजमेंट कमेटी सदस्य कुंदन गोगिया के मुताबिक संस्कार के बाद वो मृतक की अस्थियां 2 घंटे बाद परिजनों के सौंप देते हैं। श्मशानघाट में आम दिनों में औसतन 5 से 8 संस्कार होते थे, इस अप्रैल महीने में यह आंकड़ा रोजाना 20 से 25 के बीच है। रोजाना संस्कार के लिए लगने वाली 20 क्विंटल लक्कड़ की जगह अब रोजाना 3 गुणा ज्यादा यानी 60 क्विंटल लक्कड़ की खपत हो रही है। हालात काे देखते हुए कमेटी ने 300 क्विंटल लक्कड़ रिजर्व रख ली है। गौरतलब है कि पटियाला और सनौर के 6 श्मशानों में संस्कार कराने वाले 3 आचार्यों की एडवांस बुकिंग चल रही है।

दूसरे दिन फूल चुगने की अपील, क्योंकि सभी 25 लॉकर बुक

आम तौर पर अस्थियां (फूल) चुगने की रस्म तीसरे दिन होती है, लेकिन श्मशाम में संस्कार की जगह न मिलने के कारण अब कमेटी मृतक के परिजनों को संस्कार के दूसरे दिन फूल चुगने की अपील कर रहे हैं। कुंदन गोगिया के मुताबिक चूंकि यह मामला अपने-अपने धर्म से जुड़ा है, इसलिए इसमें आदेश नहीं हैं, बल्कि अपील है।

अगर कोई रिती रिवाजों का हवाला देता है तो उस स्पेशल केस में उसे छूट भी दे देते हैं। पहला नए संस्कार के लिए जगह खाली तो होती ही है, दूसरा श्मशानघाट में अस्थियां रखने की जगह की किल्लत है। यहां वैसे अस्थियां रखने के 25 लॉकर हैं, ये सभी 25 लाॅकर बुक हो चुके हैं। मैनेजमेंट कमेटी ने अब 4 लोहे के रैक एक अलग कमरे में रखे हैं। रैक पर अस्थियों के थैले पर मृतक का नाम लिखकर रखवाया जा रहा है ताकि पहचान हो सके।

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