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प्रतिभा का उपयोग:पटियाला के हरप्रीत सरीन को पौधों में नैनो सेंसर लगाकर पानी की क्वाॅलिटी चेक करने की खोज पर अमेरिका में मिला एडिसन पुरस्कार

पटियाला6 महीने पहले
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हरप्रीत इससे पहले न्यूयार्क के गूगल ऑफिस में भी बतौर कंप्यूटर इंजीनियर रिसर्च वर्क कर चुके हैं। - Dainik Bhaskar
हरप्रीत इससे पहले न्यूयार्क के गूगल ऑफिस में भी बतौर कंप्यूटर इंजीनियर रिसर्च वर्क कर चुके हैं।
  • इंडस्ट्री से निकलने वाले पानी की क्वालिटी और विषैलेपन की मात्रा बताएगा अरगस का पौधा

पिछले कई सालों से न्यूयार्क की पार्सन यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर रिसर्च वर्क कर रहे पटियाला के युवा साइंटिस्ट हरप्रीत सरीन ने पौधों की एनर्जी से रोबोट चलाने की खोज के बाद अब पौधों में नैनो सेंसर लगाकर पानी की गुणवत्ता और विषैलेपन को दर्शाने की खोज की है। उनकी इस खोज को अमेरिका में स्वच्छ जल प्रौद्योगिकी की श्रेणी में गोल्ड एडिसन अवाॅर्ड दिया गया है। दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत में हरप्रीत ने बताया कि कई सालों की रिसर्च के बाद ऐसा केमिकल नैनो सेंसर बनाया है जो 2 पदार्थ लैड फिलिक डीएनए और कार्बन नैनोट्यूब्स को एक साथ मिलाकर पानी में डूबे अरगस पौधों की पत्तियों में प्रेशर इंजेक्शन द्वारा इंजेक्ट किया जाता है। इसके 2 घंटे बाद पौधे की पत्तियां विशेष चमक देकर बताती हैं कि पौधा जिस पानी में डूबा है उसकी क्वालिटी कितनी शुद्ध हैं? वो कितना विषैला है।

हरप्रीत के मुताबिक फैक्ट्रियों में से निकलने वाले हैवी मैटल के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए उनका पौधों के जरिए पानी की जांच का यह नमूना बेहद कारगर है। इसे फैक्ट्रियों के अलावा नदी के ताल और घरों के बाहर भी यूज किया जा सकता है। उनकी इस खोज को अमेरिका सरकार ने इनवायरमेंट सुधार में एक बड़ा कदम बताते हुए बीती 25 अप्रैल को न्यू कैलोसा साउंड कनवेंशन सेंटर में आयोजित एक समारोह में एडिसन अवाॅर्ड देकर सम्मानित किया है। यह पुरस्कार 1987 से साल बाद दुनिया में प्रसिद्ध साइंसटिस्ट थॉमस एडिसन के नाम पर दिया जाता है।

पौधे का प्रोजेक्ट इंडस्ट्री, नदियों-नालों के अलावा घरों के बाहर भी है कारगर

पहले भी कई कारनामें

पौधों की एनर्जी से चला चुके हैं रोबोट

हरप्रीत इससे पहले न्यूयार्क के गूगल ऑफिस में भी बतौर कंप्यूटर इंजीनियर रिसर्च वर्क कर चुके हैं। उन्होंने 3 साल पहले पौधों की एनर्जी से रोबोट चलाकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। उन्होंने इसे इलोवा नाम दिया। इस प्रोजेक्ट से हरप्रीत ने यह साबित करने की कोशिश की थी कि पौधे रोशनी, धरती का खिंचाव और तापमान की तरफ आकर्षित होकर विकास करते हैं।

हरप्रीत ने एक ऐसा प्रोजेक्ट भी बनाया था जो आपकी आवाज सुनकर दुनिया भर के देशों का मौसम हूबहू दर्शाता है। इस प्रोजेक्ट को अोएसिस में गूगल के पूर्व सीईओ सुंदर पिचाई ने लांच किया था। यह प्रोजेक्ट खुद चलने वाला एयर सिस्टम है, इससे दुनिया के किसी भी देश के मौसम को लेकर सवाल पूछ सकते हैं।

न्यूयाॅर्क की पार्सन यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर हैं तैनात

पटियाला के फुलकियां इनक्लेव के रहने वाले हरप्रीत के पिता सुरिंदरपाल इंजीनियर रिटायर्ड हैं, जबकि मां प्राइवेट स्कूल टीचर हैं। हरप्रीत की स्कूलिंग अवर लेडी फातिमा स्कूल से हुई हैं। इसके बाद यूनिवर्सिटी पटियाला से बी-टेक की। फिर न्यूयाॅर्क गए जहां मास्टर फॉर एमअाईटी की। फिर गूगल से जुड़े और अब न्यूयार्क की पार्सन यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर पढ़ा रहे हैं। पटियाला में बी-टेक करते समय से ही हरप्रीत ब्लाइंड लोगों के लिए स्पेशल एटीएम तैयार करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

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