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रीडर्स अलर्ट:मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चाेरी की तो जिग तकनीक से पकड़े जाएंगे, प्रति यूनिट 10 रुपए वसूला जाएगा जुर्माना

पटियाला4 दिन पहलेलेखक: राज पारचा
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मीटर की रीडिंग छुपाने के लिए उपभोक्ता करते थे छेड़छाड़, अब पावरकाॅम कसेगा शिकंजा - Dainik Bhaskar
मीटर की रीडिंग छुपाने के लिए उपभोक्ता करते थे छेड़छाड़, अब पावरकाॅम कसेगा शिकंजा

रीडिंग छुपाने के लिए मीटर को किसी प्रकार खराब करना या आग लगाकर मोटे बिजली बिल से अब बचना आसान नहीं होगा। पीएसपीसीएल की पटियाला मीटरिंग सर्कल लैब (एमई) में जिग तकनीक के जरिए जले-सड़े मीटर से मेमोरी निकालकर खर्च की गई यूनिट्स की सही डिटेल 15 मिनट में निकाली जाती है। पीएसपीसीएल ने पिछले डेढ़ साल में 5 लाख 34 हजार 681 यूनिट चोरी पकड़ी है।

पावरकाॅम ने डेढ़ साल में 5 लाख से ज्यादा यूनिट बिजली की चाेरी पकड़ी

अब इन उपभोक्ताओं से 10 रुपए प्रति यूनिट जुर्माना वसूला जा रहा है। एमई लैब में रोज औसतन 6-7 मीटर जांच के लिए आते हैं। विभाग के मुताबिक 485 दिन में 3 हजार से अधिक मीटर से बिजली चाेरियां पकड़ी जा चुकी हैं। जिनमें उपभोक्ता द्वारा जानबूझकर मीटर को या तो जलाया होता है या फिर मीटर का डिस्प्ले किसी प्रकार से खराब किया हाेता है। लैब के अधिकारियों ने बताया कि मीटर इलेक्ट्रिक फॉल्ट से जला है या फिर उपभोक्ता ने स्वयं जलाया है, इसका आसानी से पता चल जाता है।

औसत बिल आने के बाद पता चलती है बिजली चाेरी

विभागीय अधिकारियाें की मानें ताे कुछ उपभाेक्ता किसी मीटर रीडर या फिर बिजली के जानकार से मिलभगत कर मीटर स्पार्क कर देते हैं या फिर रीडिंग वाले डिस्पले काे किसी चीज से ताेड़कर या खराब कर देते हैं। जिससे बिजली बिल अवरेज में आने लगता है। जबकि बिजली आम दिनाें की तुलना में कई गुना ज्यादा खर्च करते हैं। जब विभाग के पास ओसत बिल एक-दाे बार बनकर जाता है। विभागीय अधिकारी एेसे मीटर काे उतरवा कर एमई लैब में जांच के लिए मंगवाते हैं। यहां लैब में चेक करने के बाद पता चलता है कि क्या असलियत है।

2 एसडीओकी कमेटी करती जांच
पीएसपीसीएल की प्रदेश में 14 एमई लैब हैं, इन सभी लैबाें में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। जांच के वक्त उपभोक्ता को बुलाया जाता है। उपभोक्ताओं के एमई लैब नहीं पहुंचने की स्थिति में दो एसडीओ की कमेटी बनाकर उनकी उपस्थिति में मीटर की जांच होती है। जांच से पता चलता है मीटर फॉल्ट से जला या उपभोक्ता ने जलाया।

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