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कोविड-19:लॉकडाउन-4 में छूट का असर, दिल्ली से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण

पटियाला4 महीने पहले
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  • मंडी गाेबिंदगढ़ का एक्यूअाई-237, सूबे में सबसे ज्यादा प्रदूषित रही आबोहवा

(राज पारचा) कोविड-19 महामारी के मद्देनजर लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के चौथे चरण में काफी राहत दिए जाने के बाद प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है। लॉकडाउन के पहले व दूसरे चरण के मुकाबले सूबे की हवा खराब हाेने लग गई है। मंडी गाेबिंदगढ़ में प्रदूषण का स्तर लगभग तीन गुना दर्ज किया गया। सूबे का एयर क्वाॅलिटी इंडेक्स दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित रिकाॅर्ड किया गया है। लॉकडाउन के पहले व दूसरे चरण के दौरान सभी प्रकार के उद्योगों में काम बंद था। इसके अलावा वाहनों का आवागमन भी काफी कम था। केवल आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं से जुड़े वाहनों या फिर मूवमेंट पास के जरिए ही वाहनों को आने जाने की अनुमति दी जा रही थी।

उद्योग, वाहन बंद होने के कारण लॉकडाउन के पहले व दूसरे चरण में सूबे में पीएम 2.5 प्रदूषण के कणों का स्तर 50 से 90 प्रति मीटर क्यूब तक रहा। जो पूरी तरह खतरे की श्रेणी से बाहर था। पीएम 10 का स्तर भी 70 से 100 प्रति मीटर क्यूब तक ही सीमित रहा था। यह आंकड़ा भी काफी संतोषजनक था। इस दौरान लोगों को भी सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा मिलने पर राहत महसूस हो रही थी। लेकिन लॉकडाउन के तीसरे चरण में उद्योगों में नियमों की पालना करते हुए दोबारा से काम शुरू करने तथा दुकानों को खोलने की अनुमति के बाद से ही प्रदूषण का स्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है।

लॉकडाउन चौथे चरण में अन्य कई प्रकार की राहत देने के बाद सड़कों पर वाहनों की संख्या भी बढ़ गई है। इस स्थिति में पीएम 2.5 339 प्रति मीटर क्यूब तथा पीएम 10 का आंकड़ा 297 प्रति मीटर क्यूब दर्ज किया गया। ये दोनों आंकड़े खतरे के निशान के बिल्कुल पास है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मैंबर सेक्रेटरी करुणेश गर्ग ने बताया कि पीएम 2.5 व पीएम 10 का स्तर 100 तक संतोषजनक की श्रेणी में आता है। श्वास रोगियों को हो सकती है परेशानी चेस्ट विशेषज्ञ डा. विकास गाेयल ने कहा कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण श्वास से संबंधित रोगियों को और अधिक दिक्कत हो सकती है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण बढ़ने के कारण फेफड़ों से संबंधित रोगों के अलावा दमा, हृदय रोग से पीड़ित लोगों की दिक्कतें बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में लोगों को कम से कम घरों से बाहर निकलना चाहिए। इसके साथ ही फेस मास्क का प्रयोग आवश्यक रूप से करना चाहिए। जिससे प्रदूषण के साथ-साथ कोविड-19 से भी बचाव किया जा सके।  एयर क्वालिटी इंडेक्स मुख्य रूप से 8 प्रदूशकों (पीएम10, पीएम 2.5, एनओ2, एसओO2, सीओ, ओ3, एनएच3, ओर पीबी ) से मिलाकर बनाया जाता है। वायु प्रदूषण का मतलब है हवा में सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ-2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ-2), और कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ)की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए मापदंड से अधिक है।

यह हमें ऐसे पहुंचाता है नुकसान

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 10 को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं। इन कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर होता है। इससे छोटे कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या कम होता है। इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्‍ट्रक्‍शन और कूड़ा व पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है। सांस लेते वक्त इन कणों को रोकने का हमारे शरीर में कोई सिस्टम नहीं है। ऐसे में पीएम 2.5 हमारे फेफड़ों में काफी भीतर तक पहुंचता है। पराली काे आग लगाने वाले लाेगाें काे भी इससे हाेने वाले नुकसान के प्रति गंभीरता से साेचने की जरूरत है।

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