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हिंदी दिवस का आयोजन:कविताओं के दौर में अंधेरों-उजालों का भाव बता आशावादिता का संदेश दिया

पटियाला13 दिन पहले
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हिंदी भाषा सम्मेलन ने उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहयोग से हिंदी दिवस का आयोजन कालिदास प्रेक्षागृह शेरांवाला गेट में किया। अध्यक्षता हिंदी के विद्वान डॉ. मनमोहन सहगल ने की। मुख्य अतिथि जगजीत सिंह दर्दी, विशेष अतिथि डॉ. केशव देव रहे। मां शारदे को माल्यार्पण कर दीप प्रज्जलन के बाद प्रिंसिपल पंकज कौशिक ने सरस्वती-वन्दना का गायन किया। पांच हिंदी विद्वानों डॉ. केशव देव, डॉ. हरिंदर कुमार, हर्षकुमार ‘हर्ष’, सुशील कुमार आज़ाद और पंकज कौशिक द्वारा हिंदी के विकास-विस्तार के संबंध में शोध पत्र पढ़े गए। सेमिनार के साथ ही कविता पाठ का कार्यक्रम भी रखा गया था।

इसमें हरी दत्त हबीब, जगजीत सिंह साहनी, सीआर मित्तल, वर्षा गोयल, गुरदर्शन गुसील, सुनीता कुमारी, रविंदर शर्मा, आशा शर्मा, प्रो. सुभाष शर्मा, कैप्टन चमकौर सिंह, किरन सिंगला, किरन गर्ग, अनिल भारती, भगवान दास गुप्ता, जसविंदर खारा, चरण पुआदी, सतीश विद्रोही, डॉ. दीप शिखा, नीता अहसास, सुरिंदर गर्ग ने भाग लिया। पंकज कौशिक का गीत ‘चले जो साथ मिलकर तो यह भारत मुस्कुराएगा, बहुत बड़ा है सफर थोड़ी दूर तो साथ चलो। मंजीत कौर ने अंधेरों-उजालों का भाव बताते आशावादिता का संदेश दिया। रमनदीप कौर, शैली, कमला शर्मा, मनु वैश्य, हरजिंदर कौर इत्यादि ने भी अपनी-अपनी कविताएं पेश की। जागृति गौर ने

पारिवारिक संबंधों में उपजने वाले प्रेम को परिभाषित किया। हिंदी दिवस कार्यक्रम में लगभग 72 हिंदी प्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। दो हिंदी काव्य पुस्तकों डॉ. जीएस आनंद की ‘शिकवा’ और सुनील कुमारी शर्मा ‘नीलू’ की ‘जागते ख़्वाब’ का विमोचन भी किया गया। हिंदी भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष हर्षकुमार ‘हर्ष’ ने देश की सरकारों को सावधान किया कि अंग्रेजी नगरों से होते हुए गांवों की चौखट भी लांघ चुकी है। मंच का संचालन सुशील कुमार आज़ाद और मनु वैश्य ने किया।

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