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बेशर्म राजनीति:ओवरब्रिज की राजनीति ने नवजात से मां छीनी, विधायक का 5 साल बाद दर्द जागा, बोले- पुल बनाऊंगा या फिर चुनाव नहीं लड़ूंगा

मंडी गोविंदगढ़22 दिन पहलेलेखक: स्वर्णजीत सिंह अश्क
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मंडी गोबिंदगढ़ में सियासत की भेंट चढ़ा ब्रिज, बंद फाटक पर डिलिवरी, महिला की मौत - Dainik Bhaskar
मंडी गोबिंदगढ़ में सियासत की भेंट चढ़ा ब्रिज, बंद फाटक पर डिलिवरी, महिला की मौत

लाेहा नगरी का फाटक नंबर 151-सी बंद होने से गर्भवति ने बच्ची को जन्म दे वहीं पर दम तोड़ दिया। गुस्से से लाल बेबस पिता की आंखों में आंसुओं से ज्यादा कातिल फाटक घूम रहा था। उसके आगे पत्नी की लाश और गोद में किलकारियां मारती बच्ची थी। इस हादसे को जिसने भी देखा उसके दिल में लाखों कांटे चुभने के बराबर दर्द हुआ होगा। ऐसा पहली बार नहीं कई दफा हो चुका है। इससे पहले भी फाटक तीन लोगों से मां छीन चुका है। रिकॉर्ड के बाहर कितने हैं, जिसके परिवार पर कहर बरपा वही जानता है। स्थानीय लोग सियायत को इन कत्ल को सीधा जिम्मेदार मानते हैं।

कहते हैं इस फाटक पर आेवरब्रिज बन गया होता तो आज उनके परिवार के कई सदस्य जिंदा होते। सियासत कितनी बली लेकर इस पुल का निर्माण करवाएगी किसी भी सत्ताधारी के पास सही जवाब नहीं है। अकाली दल का कहना है कि उनकी सरकार ने पुल बनाने के लिए पैसा मंजूर कर दिया था। कांग्रेस ने सत्ता में आने पर काम नहीं करवाया। विधायक काका रणदीप ने अक्टूबर में पुल बनवाने या न बनवाने पर चुनाव न लड़ने की बात कही।

बिंदु के पति धर्मेंद्र ने बताया कि रात 8 बजे के करीब उसने 108 नंबर पर कॉल की। एम्बुलेंस आने में देरी हाे रही थी, इसलिए 8:30 बजे जब पत्नी की तबीयत ज्यादा खराब होने लगी ताे ऑटो से उसे अस्पताल ले जाने लगे। रास्ते में रेलवे फाटक बंद होने के कारण 30 से 40 मिनट तक रुकना पड़ा। ज्यादा दर्द के चलते पत्नी ने वहीं बच्ची काे जन्म दिया। जब फाटक खुला ताे पत्नी काे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टराें ने उसे मृतक करार दे दिया। गोरखपुर के रहने वाले धरमिंदर ने बताया कि वह काम के सिलसिले में 3 साल से पंजाब में रह रहा है। उसकी डेढ़ साल की एक बेटी भी है। जिस फाटक के पास डिलीवरी हुई थी, उससे 100 मीटर दूर ही उसका घर और 200 मीटर दूर अस्पताल है।

मौत की लूपलाइन...छाेटी लूपलाइन और गाेदाम के कारण ज्यादा समय तक बंद रहता है फाटक

रेलवे अधिकारियाें की मानें ताे स्टेशन पर लूप लाइनों की लम्बाई 686 मीटर होनी चाहिए। यहां लूप लाइन नंबर एक 655 मीटर और लूप लाइन नंबर दो 650 मीटर की है। रेलवे क्रासिंग 151 सी के पास मॉल गोदाम है, जहां कोई न कोई रैक लोड हाेता रहता है। गोदाम के कारण मालगाड़ियों की शंटिंग चलती रहती है। दिन में 25 गाड़ियां गुजरती हैं। जब सवारी गाड़ी को पास देना होता है तो मालगाड़ी काे लूप लाइन पर रोक लेते हैं।

तब बैठक में 17 सदस्याें ने किया था विराेध
5 साल पहले पुल पास करने के लिए नगर काउंसिल की बैठक हुई थी। पुल पास करने की जगह उसे अगली बैठक तक लंबित कर दिया गया था। तब सभी ने कहा का था कि वह पुल के पक्ष में हैं। मगर 17 सदस्यों ने मौजूदा नक्शे के विरोध में यह कहते हुए वोट डाला था कि उनकाे ऐतराज है, उसे दाेबारा बनाया जाए। तबके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पुल काे बनाने की घाेषणाा की थी। कई बार रेलवे की टीम दाैरा कर चुकी है। पर सियासत के चलते पुल नहीं बन पा रहा है।

कांग्रेस की सरकार बनते ही रुकवा दिया गया था काम
बिंदु की मौत नहीं, कत्ल हुआ है। शिअद सरकार के समय डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने पुल का नींवपत्थर रखा था और रुपए जारी किए थे। कांग्रेस सरकार बनते ही पुल का काम हलका विधायक और नगर कौंसिल ने रुकवा दिया। साढ़े चार साल बाद भी विधायक पुल का काम शुरू नहीं करा सके।
-गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना, शिअद हलका इंचार्ज अमलोह

परिवार से हमदर्दी, शिअद गंदी राजनीति कर रही
बिंदु की मौत पर बहुत दुःख हुआ है। परिवार के साथ हमदर्दी है। अकाली दल की सोच पर तरस आता है कि वह गंदी राजनीति पर आ गए हैं। उनकी सरकार में पुल नहीं बना। वादा करता हूं, अगर पुल नहीं बना तो चुनाव नहीं लडूंगा। अगले महीने काम शुरू हो जाएगा।
-काका रणदीप सिंह, विधायक।

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