कोयले की घटती आपूर्ति:पंजाब में बढ़ सकता है बिजली का संकट, थर्मल प्लांटाें में 3 दिन से भी कम का स्टॉक बचा

पटियाला20 दिन पहले
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  • राज्य में कोविड के कारण 10,000 से अधिक औद्योगिक इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं

कोयले की बिगड़ती आवक और घटती आपूर्ति पंजाब में बिजली संकट पैदा हाे रहा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। राज्य में कोविड के कारण 10,000 से अधिक औद्योगिक इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं और किसी भी तरह की आउटेज से स्थिति और खराब होने की संभावना है।

पंजाब के कोयले से चलने वाले थर्मल प्लांटाें के पास अब तीन दिन से भी कम का स्टॉक बचा है। त्याेहारी सीजन की शुरुआत के साथ 10 अक्टूबर के बाद मांग बढ़ने की उम्मीद है। जबकि राज्य अभी भी बिजली संकट का सामना कर रहा है, अगर आने वाले सप्ताह में कोयले की स्थिति में सुधार नहीं होता है, परेशानी हाे सकती है।

पिछले महीने असामान्य रूप से भारी बारिश के कारण प्रमुख कोयला खनन केंद्रों में भीग गए कोयला गड्ढों ने स्थिति को और खराब कर दिया है। वर्तमान में बिजली की मांग लगभग 9,000 मेगावाट है, जिसमें केंद्रीय क्षेत्र 5010 मेगावाट, निजी थर्मल 3000 मेगावाट, दो राज्य के अपने थर्मल 1091 मेगावाट, जबकि राज्य के अपने वाले हाइड्रो का योगदान है। 392 मेगावाट सौर और बायोमास 291 मेगावाट की आपूर्ति करती हैं।

बिजली विशेषज्ञों ने इस बात कि पुष्टि की है कि मानसून से पहले पर्याप्त कोयला भंडार नहीं बनाने के कारण आपूर्ति अपर्याप्त है। एक पूर्व मुख्य इंजीनियर ने कहा कि सीआईएल पहले ही कह चुकी है कि अगर थर्मल पावर चलाना है तो इसके लिए पहले ही 15 दिन का कोयला एडवांस में रखना होगा।

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) द्वारा निर्धारित 22-दिवसीय ईंधन स्टॉक, थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स में कम कोयले की स्थिति को टाला जा सकता था। पीएसपीसीएल के एक अधिकारी ने कहा, हमारे अधिकांश प्लांट अपनी क्षमता से आधे से भी कम पर चल रहे हैं, क्योंकि एक यूनिट को बंद करने और फिर से चालू करने में लाखों रुपये का खर्च आता है।

तलवंडी साबो के पास 2.5 और राजपुरा थर्मल के पास 2.9 दिन का बचा स्टॉक

पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अनुसार निजी थर्मलाें के पास तीन दिन से कम का स्टॉक है और यदि कम क्षमता पर चलाया जाता है, तो यह कुछ और दिनों तक चलेगा। तलवंडी साबो के पास जहां 2.5 दिन का स्टॉक है, वहीं राजपुरा थर्मल के पास 2.9 दिन और गोइंदवाल का स्टॉक है। गाैरतलब है कि तलवंडी साबाे थर्मल प्लांट में राेज 18.9 मीट्रिक टन काेयले की खपत है, जबकि एनपीलएल राजपुरा 15 एमटी, जीविके 7 एमटी, लहरा- 6 एमटी, राेपड़ 7.8 एमटी राेज जरूरत है।

सरकार को मामले से अवगत कराया गया था कि कोयले का स्टॉक कम है : अधिकारी

अधिकारियाें ने बताया कि कोविड के कारण लॉकडाउन के बाद उद्योग ने आखिरकार काम करना शुरू कर दिया है और अब कोई भी बिजली की कमी राज्य की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करेगी, सरकार को इस मामले से अवगत कराया गया था कि भारत का बिजली क्षेत्र कोयले का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में राज्य द्वारा संचालित कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) जीवाश्म ईंधन का सबसे बड़ा खनिक है। कोयले का स्टॉक कम है।

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