विरोध / श्रम कानून में किए बदलाव को लेकर जत्थेबंदियों का केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

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  • मजदूर विरोधी फैसलों को रद करने और बेरोजगार मजदूरों के खातों में 10,000 रुपए डालने की मांग

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

पटियाला. मिनी सचिवालय के बाहर 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के बुलावे पर केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से किए जा रहे मजदूर विरोधी कदमों का विरोध किया गया। डिप्टी कमिश्नर को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम अपनी मांगों संबंधित मांग पत्र सौंपा। रोष प्रदर्शन में निर्मल सिंह धालीवाल एटक, मदनजीत डकाला इंटक, सुच्चा सिंह सीटू, दर्शन सिंह लुबाना पससफ, हरी सिंह दौनकलां सीटीयू पंजाब और दर्शन सिंह बेलूमाजरा पससफ मौजूद थे।

उन्होंने अपनी प्रमुख मांगें, मेहनताना 21000 रुपए करना, डीए का 1 मई 2020 को जारी किया नोटिफिकेशन लागू करना, श्रम कानून को निरस्त करना, मजदूर विरोधी फैसले रद्द करने, मुलाजिमों और पेंशनरों का डीए बंद करने का फैसला रद्द करना, काेरोना कारण बेरोजगार मजदूरों के खातों में 10000 रुपए डालना, बिना दस्तावेज सबूतों से मजदूरों को राशन मुहैया करना, प्रवासी मजदूर कानून 1979 को मजबूत करना, मनरेगा के अंतर्गत 200 दिनों के लिए काम देना और बजट 1,50,000 करोड़ रुपए करना, सरकारी और पब्लिक सैक्टर की उभरकर सामने आई भूमिका को मद्देनजर रखते इसको मजबूत करना, काेरोना के संकट समय ड्यूटियों निभा रहे समूचे कर्मचारियों और अधिकारियों की सेहत सुरक्षा के पुख़्ता इंतजाम करना, बिजली बिल 2020 वापस लेना और 20 लाख करोड़ रुपए का प्रधानमंत्री की तरफ से ऐलाने गए पैकेज को कर्ज के मकड़जाल की बजाय हकीकी वित्तीय मदद का पैकेज बनाना आदि शामिल थे। यहां उत्तम सिंह बागड़ी, बलदेव राज बत्ता, तरसेम सिंह, अमरजीत घनौर, जगमोहन नोलक्खा आदि ने भी संबाेधन किया।

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