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लॉकडाउन का असर:मुफ्त सफर से सरकार के पास पीआरटीसी का फंसा रुपए 150 करोड़, 9 हजार कर्मियों की सैलरी का भी संकट

पटियालाएक महीने पहलेलेखक: राणा रणधीर
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पहले ही सारे खर्चे निकाल कर कारपोरेशन बड़ी मुश्किल से अपने 9 हजार के करीब मुलाजिमों व पेंशनरों को हर महीने सैलरी व पेंशन दे पा रहा है, जो तकरीबन 18 करोड़ रुपए बनती है। - Dainik Bhaskar
पहले ही सारे खर्चे निकाल कर कारपोरेशन बड़ी मुश्किल से अपने 9 हजार के करीब मुलाजिमों व पेंशनरों को हर महीने सैलरी व पेंशन दे पा रहा है, जो तकरीबन 18 करोड़ रुपए बनती है।
  • रोज की आमदनी सवा करोड़ से घट 45 लाख पहुंची, 3 महीने एडवांस सफर कराती है पीआरटीसी

पीआरटीसी की बसों में महिलाओं को मुफ्त बस सफर की सुविधा मिलने और अब लॉकडाउन से यात्रियों की संख्या 3 गुणा कम हो गई है। पीआरटीसी की रोजाना आमदन भी सवा करोड़ तक पहुंच गई थी जो इन दोनों घटनाक्रमों के बाद करीबन 45 लाख तक पहुंच गई है। इधर सवारियां कम होने से पीआरटीसी ने पटियाला-दिल्ली, अजमेर, जयपुर और वृंदावन जैसे लंबे रूट बंद कर दिए हैं। पटियाला से दिल्ली के लिए रोजाना 25 से ज्यादा टाइम हैं। पटियाला-अजमेर रूट पर 1 टाइम, पटियाला जयपुर रूट पर 2 टाइम, पटियाला-वृंदावन पर 1 टाइम चल रहा है। इसके अलावा अन्य लांग रूट्स पर भी सवारियां देखकर ही बसें चलाई जा रही हैं। पटियाला डीपो के जनरल मैनेजर तजिंदरपाल सिंह गरेवाल बताते हैं कि इसे रूट बंद करना नहीं कहेंगे। उनकी सभी बसें हमेशा तैयार बर तैयार हैं, लेकिन अगर लॉकडाउन की वजह से सवारी ही नहीं हैं तो बस चलाने का कोई फायदा नहीं है। इधर माना यह भी जा रहा है कि पंजाब समेत पड़ोसी राज्य हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी लॉकडाउन होने की वजह से इंटरस्टेट बस सर्विस में दिक्कतें आ रही थीं, जिसके चलते पीआरटीसी मैनेजमेंट ने यह फैसला लिया है।

लॉकडाउन से यात्री 3 गुणा घटे, पटियाला-दिल्ली, अजमेर, जयपुर और वृंदावन भी बंद

पीआरटीसी अपनी बसों में दिव्यांगों, सीनियर सिटीजन, पत्रकारों, पुलिस मुलाजिमों, विद्यार्थियों आदि को छूट पर सफर की सुविधा देती है। इसका बिल तीन महीने का करीब 25 करोड़ रुपए बनता है। इस राशि का भुगतान पंजाब सरकार करती है। लेकिन पिछले कई महीनों से पंजाब सरकार यह भुगतान नहीं कर रही है। यह बकाया इस समय करीब 150 करोड़ पहुंच गया है। इसके बाद सरकार द्वारा महिलाओं के लिए सरकारी बसों में फ्री सफर की सुविधा दे दी है तो इस फैसले से भी पीआरटीसी को रोजाना करीबन 40 से 45 लाख रोजाना रेवेन्यू कम आ रहा है। पहले ही सारे खर्चे निकाल कर कारपोरेशन बड़ी मुश्किल से अपने 9 हजार के करीब मुलाजिमों व पेंशनरों को हर महीने सैलरी व पेंशन दे पा रहा है, जो तकरीबन 18 करोड़ रुपए बनती है। पीआरटीसी मैनेजमेंट को चिंता इस बात की है कि सरकार के पास 150 करोड़ फंसे हैं। अगर मुफ्त बस सफर के बिल का भुगतान भी समय पर न किय गया, तो सैलरी, पेंशन कहां से देंगे?

लांग रूट्स की बसें न रोकने को हो रहा विचार

विभिन्न लांग रूट्स पर बस सर्विस चलाने का अधिकार राज्य के अलग अलग डीपो मैनेजरों को दिया है। वो अपने यहां यात्रियों की संख्या देखकर बस चलाने या न चलाने का फैसला कर रहे हैं। आप देखिए न, अगर बस सड़क पर दौड़ेगी तो डीजल से लेकर अन्य खर्चे तो वैसे ही पड़ेंगे, इसलिए खर्चे को देखते हुए कुछ लांग रूट्स की बस सर्विस को रोकने के पहलु पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है।

-सुरिंदर सिंह, जनरल मैनेजर
पीआरटीसी हैड आफिस पटियाला

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