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राजपुरा आईटी पार्क प्रोजेक्ट:हर साल बदलता शामलाट जमीन का पट्टा, नेताओं-अफसराें ने मर्जी से काश्तकार बनाकर मुआवजे का हकदार बना दिया

पटियाला2 महीने पहले
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  • 6 गांवों की 1100 एकड़ शामलाट जमीन बेचने के खिलाफ किसानों का अांदोलन, बोले-

पंजाब सरकार के महत्वाकांक्षी राजपुरा आईटी पार्क प्रोजेक्ट (सरकारी रिकॉर्ड में अमृतसर कोलकाता इंटीग्रेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट) के लिए 6 गांवों की 1100 एकड़ शामलाट जमीन काॅरपोरेट घरानों को बेचने और जारी मुआवजे की राशि के आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगाकर किसानों ने शुक्रवार को आकड़ में आदोलन शुरू किया।

क्रांतिकारी किसान यूनियन के पटियाला देहाती प्रधान गुरध्यान सिंह धन्ना के नेतृत्व में किसानों ने अारोप लगाया कि शामलाट जमीन को एक्वायर करने के दौरान तारबंदी की जा रही है जिससे आस पास के गांवों के किसानों का रास्ता बंद हो गया है। जमीन के मुआवजे के आवंटन में भारी गड़बड़ी हुई है, इसकी जांच होनी चाहिए।

किसनाें ने कहा कि 4 गांवों के सैंकड़ों लोगों का हक मारकर सियासी पार्टियों के नेताओं की शह पर कुछ चहेते लोगों को करोड़ों रुपए बांट दिए गए। गुरध्यान सिंह धन्ना ने कहा कि इन गांव के कुछ किसानों ने मुआवजे के आवंटन में हेराफेरी का आरोप लगाकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती भी दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय तिवारी और राजेश भारद्वाज की अदालत ने कोर्ट के अगले आदेश तक प्रोजेक्ट में अब आगे कोई भी पैसा न बांटने का ईदेश जारी किया है।

काेर्ट से कहा-मुआवजे का तरीका गलत
गांव के किसानों ने कोर्ट से कहा है कि 43.82 करोड़ की रकम याचिकाकर्ता व खेवटदारों को विवादित जमीन में उनके हिस्से के मुताबिक बांटी जाए। मामले में पार्टी बनाए गए लोगों को 9 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से दी जा रही 15 करोड़ से ज्यादा की रकम पर रोक लगाई जाए। यह रकम विस्थापन मुआवजे के रूप में गलत तरीके से दी जा रही है। किसानों ने कहा इस मामले में तुरंत आरोपियों के खिलाफ एफआईआर हो ।

प्रस्ताव पास- नेताओं को गांव में न आने दें
क्रांतिकारी किसान यूनियन ब्लॉक प्रधान गुरध्यान सिंह धन्ना ने बताया कि गांव अांकड़ में नई समिति का गठन किया गया। प्रस्ताव पास कर फैसला किया है कि संयुक्त किसान मोर्चा के निर्देशों पर जिले के किसी भी गांव में किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता को नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि जब तक केंद्र सरकार कृषि सुधार बिलों को रद्द नहीं करती, तब तक गांव नेता का सामूहिक विरोध करें।

इसलिए है किसानों का विरोध
राजपुरा आईटी पार्क का काम शुरू होने से पहले ही विवादों में है। गांव के लोगों का कहना है कि प्रोजेक्ट में फर्जी काश्तकार बनाकर सरकार का पैसा खाने की तैयारी हो रही है। गांव सेहरा, सेहरी, आकड़, आकड़ी, पबरा और तख्तूमाजरा की 1104 एकड़ शामलाट जमीन को सरकार ने प्रोजेक्ट में लिया है। गांव के लोगों का कहना है कि कई साल से पंचायती नियम के तहत काश्तकार इस शामलाट जमीन को ठेके पर लेकर खेती करते आ रहे हैं।

नियम के मुताबिक ठेके पर जमीन लेने का हर साल नया पट्टानामा होता है, जाे साल बाद अपने आप रद्द हो जाता है। हर साल इस जमीन का काश्तकार बदलता रहता है। कुछ नेताओं ने सरकारी अफसरों के साथ मिलकर पिछले साल की रसीदें निकालकर अपने चहेते लोगों को मर्जी से काश्तकार बनाकर मुआवजे का हकदार बना दिया।

जबकि जमीन के असली मालिकों को नजरंदाज कर दिया गया है। किसानों का कहना है कि जब इस जमीन को ठेके पर लेने वाले काश्तकार का पट्टानामा साल बाद रद्द हो जाता है तो फिर सरकार ने मुआवजा लेने वाले काश्तकारों की पहचान कैसे की है, यह लोगों को बताया जाना चाहिए।

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