अधिकारियों की मीटिंग:बच्चों की असमय मौत का कारण समय से पहलेे पैदा होना, कम वजन व सही से फीड न करवाना

पटियाला3 महीने पहले
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अधिकारियों के साथ मीटिंग करते सिविल सर्जन डॉ. राजू धीर। - Dainik Bhaskar
अधिकारियों के साथ मीटिंग करते सिविल सर्जन डॉ. राजू धीर।

एक साल से कम उम्र के बच्चों की मौत दर में कमी लाने के मकसद के साथ जिले में जनवरी से मार्च 2022 तक हुई 23 बच्चाें की मौतों के मौत के कारण का पता लगाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. राजू धीर के नेतृत्व में जिला टीकाकरण अॉफिसर डॉ. वीनू गोयल की अोर से संबंधित ब्लॉकों के मेडिकल अॉफिसर, बच्चों के माहिर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ रिव्यू मीटिंग की।

मीटिंग में मौतों से संबंधित दस्तावेजाें का निरीक्षण हुआ और ज्यादातर मौतों का कारण बच्चों का समय से पहला पैदा होना,जन्म के समय वजन का बहुत कम होना, ठीक तरह से दूध न पिलाना, कोई भी चीज खाने में देरी से डॉक्टर के पास ले जाने के कारण सामने आए।

जिला टीकाकरण अॉफिसर डॉ. वीनू गोयल ने बताया कि आमतौर पर महिलाएं नवजन्मे बच्चों को दूध पिलाने के बाद डकार न दिलाकर एकदम सीधा सुला देती हैं। इससे कई बार दूध बच्चों की सांस नली में चला जाता है जिससे बच्चे को सांस लेने में कठिनाई होती है। यह भी बच्चाें की मौत का कारण बन सकती है। इसलिए बच्चे को दूध पिलाने के तुरंत बाद कंधे से लगाकर डकार दिलाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कम वजन और हाई रिस्क निशानियां वाली गर्भवती महिलाओं को सेहतमंद खुराक खाने के साथ प्रसूता को समय से नियमित जांच करवानी चाहिए ताकि जन्म के समय बच्चे का वजन कम न हो।

सिविल सर्जन डॉ. राजू धीर ने अधिकारियों को पैरा मैडीकल स्टाफ को महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद कम से कम पहले 6 महीने तक अपना दूध पिलाने के लिए जागरूक करने को कहा। उन्होंने कहा कि आने वाले गर्मियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए बच्चों को दस्त लगने पर तुरंत ओआरएस का घोल देने और जिंक की गोलियां खिलाने संबंधी मां को जागरूक किया जाए। यूनिवर्सल टीकाकरण ग्लोबल रैकिंग्स व रेटिंग्स एजेंसी प्रोग्राम के अंतर्गत बच्चों के बरसाती बीमारियां जैसे पोलियो, खसरा, काली खांसी, दिमागी बुखार, हैपेटाइटिस आदि से बचाव के लिए हर बच्चे का संपूर्ण टीकाकरण यकीनी बनाया जाए।

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