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हंसते-हंसते सोए रोता छोड़ गए:बेड पर सो रहे थे दाे बच्चे, ज्यादा मलबा हाेने से 20 मिनट बाद निकाला जा सका, तब तक माैत

पटियाला9 दिन पहले
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  • बारिश से आफत - लक्कड़ मंडी, पातड़ां के गांव मतौली के बाद अब दूधनसाधां में गिरी छत
  • 35 घंटे में जिले में छत गिरने की तीसरी घटना

साेमवार शाम 5:30 बजे से बुधवार सुबह 4:30 बजे तक यानी करीब 35 घंटे जिले में तीन जगह छत गिरने की घटनाएं हुईं। लक्कड़ मंडी, पातड़ां के गांव मताैली के बाद अब देवीगढ़ राेड पर गांव दूधनसाधां में छत गिरी। बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे छत गिरने से परिवार के 7 लाेग दब गए थे। धमाके के बाद पड़ाेस के लाेग मदद को जुटे और मलबा हटाने का काम शुरू किया। 12 मिनट की मशक्कत के बाद लाेगाें ने परिवार के मुखिया, उसकी पत्नी सहित 5 लाेगाें काे बाहर निकला लिया।

ज्यादा मलबा गिरा हाेने से बेड पर साे रही 8 साल की तानिया और 10 साल के सचिन काे बाहर नहीं निकाला जा सका, इसलिए उनकी माैत हाे गई। मुखिया बिट्टू सहित उसकी पत्नी नीलम, हंस, मनीष और कपिल जख्मी हाे गए, उनकाे अस्पताल ले गए। पीड़ित बिट्टू ने बताया वह लेबर का काम करता है।

मंगलवार की रात वह परिवार के साथ खाना खाकर साे गया था। उसके घर की छत मिट्टी-बाल्लों से बनी हुई थी। दाे दिन की बारिश के चलते छत पर पानी रुक रहा था। पानी रिसने के कारण अचानक से हादसा हाे गया। बिट्टू ने बताया कि उसके चार बेटे और एक बेटी थी। हादसे में बेटी उसका साथ छोड़ गई। देर शाम दाेनाें बच्चाें का पाेस्टमार्टम कराया गया।

ठेकेदार ने दीवार के साथ खाेदी थी मिट्टी, 20 मिनट में सभी लोगों को मलबे से निकाला
पीड़ित के घर के साथ सरकारी सिविल अस्पताल की दीवार लगती है। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले ही नई दीवार बनाई गई थी। गांव के लोगों की मानें ताे दीवार के साथ जो मिट्टी की खुदाई की गई थी, उसे ठेकेदार ने वहां नहीं डाला। बरसात का पानी खुदाई वाली जगह पर भरा और मकान की नींव बैठने से हादसा हाे गया।

इसी के चलते छत गिर पड़ी। हालांकि परिवार के लाेगाें के इस कारण काे नकार दिया है। एसएमओ ने बताया कि अस्पताल की बाउंड्री वाल पुरानी है। उसका कुछ हिस्सा अभी बाकी है। वहां नरेगा के तहत सफाई के लिए कहा था। पीड़ित परिवार ने उनकी दीवार के साथ मकान की कच्ची दीवार बनाई थी। पानी भरने के कारण वह रिसता रहा। मामले की जांच भी करवा रहे हैं।

मददगार - 4:30 बजे शोर सुना तो तुरंत मौके पर गया
हादसे की जानकारी मिलते ही तुरंत मलबे में दबे परिवार की मदद के लिए रमेश कुमार पहुंचा। उसने बताया कि सुबह करीब 4:30 बजे पड़ोस के घर से शाेर सुनते ही वह उठकर भागा। लोगों की मदद से महज 12 मिनट में सभी को निकाला गया और जख्मियाें को अस्पताल भेजा। कहा कि उसे अफसाेस है कि सचिन और तानिया को नहीं बचा पाया। क्याेंकि वहां पर मलबा ज्यादा था। उनकाे निकाले में ज्यादा टाइम लग गया। 20 मिनट में सभी काे बाहर निकाल लिया गया था।

बच्चों को मिलेंगे 4-4 लाख मकान बनाने काे एक लाख
पीड़ित परिवार से अस्पताल में मिलने पहुंचे दूधनसाधां के तहसीलदार सरबजीत सिंह ने कहा कि सरकार से मिलने वाली हर संभव मदद परिवार को दी जाएगी। दोनों बच्चों की मौत के बाद 4-4 लाख रुपए उनके नाम से परिवार को जल्द दिए जाएंगे। मकान की छत बनाने काे सरकार से दिए जाने वाले 95,100 रुपए भी परिवार काे दिए जाएंगे। वह कोशिश करेंगे कि केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली मदद भी परिवार को दिलाई जा सके।

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