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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:मटीरियल न मिलने से जिले में लिंक सड़कों के काम ठप, 82 करोड़ से 329 सड़कों का होना है नवीनीकरण और मरम्मत

रोपड़एक महीने पहले
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ठौणकी से गुरपुरा सड़क का काम गटका व मिट्टी डालने के बाद बंद पड़ा है। - Dainik Bhaskar
ठौणकी से गुरपुरा सड़क का काम गटका व मिट्टी डालने के बाद बंद पड़ा है।
  • माइनिंग बंद होने, रेत बजरी की किल्लत और बढ़ रही महंगाई के चलते विकास प्रभावित

माइनिंग बंद होने, रेत बजरी की किल्लत और बढ़ रही महंगाई के चलते रोपड़ जिले में 329 सड़कों का काम अर्ध में लटक गया है। इनमें से ज्यादातर काम या तो बंद पड़ा है या बहुत धीमी रफ्तार से चल रहा है। कहीं ठेकेदार कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे हैं तो कहीं मटीरियल कम हैं।

इनमें से ज्यादातर लिंक सड़कों का काम 6 माह में पूरा होना था लेकिन ये 6 माह बीतने के बाद भी अधूरा है। आगे बरसाती सीजन भी शुरू होने वाला है। इससे पूरे जिले में करीब 82 करोड़ रुपए के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इन कार्य में ज्यादातर लिंक सड़कों का काम है जोकि एक गांव को दूसरे गांव तक जोड़ती है।

पीडब्ल्यूडी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक रोपड़ जिले के आनंदपुर साहिब हलके में 65 लिंक सड़कों का काम 24.78 करोड़ से चल रहा है। इसी तरह इसी क्षेत्र में स्पेशल रिपेयर के तहत 112 सड़कों का काम 19.11 करोड़ से चल रहा है। चमकौर साहिब मार्केट कमेटी के तहत पड़ने वाली 12 सड़कों का 60 किलोमीटर की लंबाई का काम 9.13 करोड़ में स्पेशल रिपेयर का काम चल रहा है।

स्पेशल रिपेयर के तहत रोपड़ की 17 सड़कों की 13 किलोमीटर की लंबाई का काम 1.36 करोड़ से होना है। इसी तरह चमकौर साहिब क्षेत्र की 37 सड़कें जिनकी लंबाई 39 किलोमीटर है, वह 13.84 करोड़ रुपए से बननी थी। रोपड़ की 49 किलोमीटर लंबी 63 सड़कें 13.30 करोड़ रुपए से बनाई जानी थी। चमकौर साहिब क्षेत्र की 3 लिंक सड़कों (13.92 किलोमीटर) के चौड़ीकरण पर 7.92 करोड़ रुपए खर्च होने थे।

ठेकेदार बोला- सबसे बड़ी समस्या माइनिंग मटीरियल न मिलना, इससे हर चीज के रेट बढ़ गए

इस संबंध में जब भास्कर टीम ने ग्राउंड लेवल पर हालात जानने की कोशिश की तो ज्यादातर सड़कों का काम या तो रुका हुआ था या बहुत ही धीमी रफ्तार से चल रहा था। एक ठेकेदार ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें सबसे बड़ी समस्या माइनिंग मटीरियल न मिलने के चलते आ रही है, जिसके चलते उनका काम रुका हुआ है। माइनिंग मटीरियल न मिलने से हर चीज के रेट बढ़ गए हैं जिससे उन पर दोहरी मार पड़ रही है।

रेत-बजरी न मिलने से काम थोड़ा प्रभावित : एक्सईएन

वहीं, इस संबंधी में जब पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन दविंदर कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि माइनिंग से रेत बजरी न मिलने के चलते थोड़ा काम प्रभावित हुआ था लेकिन विभाग द्वारा इन सड़कों पर मई व जून में लुक डालने का काम चल रहा है।

रेत बजरी का माल स्टॉक किया हुआ है। उन्होंने कहा कि लुक डालने के बाद सड़कों का काम शुरू हो जाएगा और जब तक नया स्टॉक मिलना शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि काम सही समय पर पूरा होने की उम्मीद है।

5 माह बीते, धीमा चल रहा सिहोमाजरा-गोंसला-दुलचीमाजरा सड़क का काम

वहीं, जब मौके पर देखा गया तो ठौणकी से गुरपुरा जाने वाली 1.20 किलोमीटर लंबी सड़क का काम गटका-मिट्टी डालने के बाद काम बंद पड़ा है। इसी तरह जनवरी में शुरू हुए सिहोमाजरा-गोंसला- दुलचीमाजरा सड़क का काम जनवरी में शुरू हुआ था लेकिन 5 माह बीत जाने के बाद भी इस 4.42 किलोमीटर लंबी सड़क का काम बहुत ही धीमी रफ्तार से चल रहा है। इस सड़क को 10 फीट से 16 फीट किया जा रहा है और इस पर 3 करोड़ 44 लाख रुपए खर्च होने है। अगर देखा जाए तो 6 महीने में इस सड़क का काम पूरा नहीं हो सकता।

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