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  • Government Approves Financial Approval Of 2.36 Crore For Beawar Ring System

अच्छी खबर:ब्यावर के रिंग सिस्टम के लिए सरकार ने 2.36 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी

ब्यावर9 दिन पहले
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  • लाइन में फॉल्ट होने पर घंटों नहीं रहेगी बिजली गुल, 6 किलोमीटर के दायरे में स्थापित सभी 6 जीएसएस एक-दूसरे से जुड़ेंगे

(शशांक त्रिपाठी) मेगासिटी की तर्ज पर अब ब्यावर में भी लाइन में फॉल्ट आने पर उपभोक्ताओं को कुछ ही देर में सप्लाई मिलने लगेगी। ऐसा संभव होगा रिंग सिस्टम के विकसित होने से। इसके लिए सरकार ने 2 करोड़ 36 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी है।
मंजूरी मिलने के बाद अब डिस्कॉम ने योजना पर काम शुरु कर दिया है। अब तक व्यवस्था यह थी कि यदि 33 केवी लाइन में फॉल्ट होता तो संबंधित जीएसएस की पावर सप्लाई रोक दी जाती थी। जब तक फॉल्ट दूर नहीं होता तब तक उपभोक्ताओं को भी बिना बिजली के ही रहना पड़ता था। रिंग सिस्टम पूरा हाेने के बाद घंटों तक विद्युत कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। शहर के सभी 6 जीएसएस एक-दूसरे से जोड़े जाएंगे।
विद्युत वितरण निगम, ब्यावर के अधिशासी अभियंता दिनेश सिंह के मुताबिक निगम ने शहर में रिंग सिस्टम विकसित करने के लिए हाल में ब्यावर डिवीजन को 2 करोड़ 36 लाख 23 हजार 127 रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की है। योजना के तहत मुख्य रूप से शहरी क्षेत्र में करीब 6 किलोमीटर दायरे में स्थित 6 जीएसएस को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। इनका कंट्रोल अजमेर रोड स्थित 220 केवीए जीएसएस से हो सकेगा।

दो किलोमीटर तक अंडरग्राउंड बिछेगी केबल
रिंग सिस्टम के तहत 1.01 किलोमीटर तक ओवरहेड लाइन खींची जाएगी। घनी आबादी वाले क्षेत्र में लगभग 2.40 किलोमीटर अंडर ग्राउंड केबल डाली जाएगी। जीएसएस छावनी पावर हाउस, जय मंदिर पावर हाउस, गोविंदपुरा, सेदरिया, गढ़ी थोरियान आदि जीएसएस एक दूसरे से कनेक्ट कर दिए जाएंगे। तकनीकी खराबी या अन्य कारणों से किसी भी एक लाइन में फाल्ट आने पर उक्त जीएसएस की लाइन को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य जीएसएस की लाइन से जोड़ दी जाएगी। जिससे उपभोक्ताओं को कई घंटों तक विद्युत कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा।

आंकड़ों पर एक नजर
शहर में कितने जीएसएस - 6
कितने किलोमीटर में स्थापित 6 जीएसएस - 6 किलोमीटर के दायरे में
कितने उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा - 40 हजार
अब तक क्या थी व्यवस्था - 33 केवी लाइन में यदि कोई फॉल्ट होता तो संबंधित जीएसएस पूरा प्रभावित होता था।
कब मंजूर हुई योजना - अप्रैल 2020
कितनी आएगी लागत - 2 करोड़ 36 लाख रुपए
वित्तीय स्वीकृति मंजूर - जुलाई 2020 में

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