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काेराेना कहर:विडंबना: आठ महीनों में एक भी काेराेना मरीज को नहीं मिली वेंटीलेटर की सुविधा

ब्यावर2 महीने पहले
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  • 2328 मरीज हुए भर्ती काेराेना के, 90 से ज्यादा रैफर,इनमें से 5 गंभीर मरीजों की हुई मौत

अमृतकौर अस्पताल में काेराेना मरीजों काे लेकर एक चाैंकाने वाला तथ्य सामने आया है। काेराेना महामारी आरंभ हाेने से लेकर पिछले आठ महीनों में अब तक एक वेंटीलेटर का भी कोरोना मरीज की जान बचाने के लिए उपयोग नहीं किया है। स्थिति थोड़ी सी भी गंभीर होते ही यहां से मरीजों को रैफर किया जा रहा है।

आठ महीनों के दौरान अमृतकौर अस्पताल के कोरोना वार्ड में 2 हजार से ज्यादा मरीजों को भर्ती किया गया, वेंटीलेटर होने के बावजूद 90 से ज्यादा मरीजों को हायर सेंटर रैफर किया गया। इनमें से 5 मरीजों ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि बायाेपेप मशीन का उपयाेग किया जा रहा है जाे वेंटीलेटर का ही काम करती है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि वेंटीलेटर चलाने के लिए एनेस्थिसिया विशेषज्ञ की जरूरत होती है। एकेएच में दो एनेस्थेटिक हैं और दोनों ओटी में व्यस्त रहते हैं। अन्य स्टाफ को अभी तक प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ऐसे में मरीजों को वेंटीलेटर का फायदा नहीं मिल पा रहा है। कोरोना वायरस शरीर की श्वसन प्रणाली पर हमला करता है। कोरोना के शिकार कम से कम 30 फीसदी मामलों में देखा गया है कि वायरस फेफड़ों इतना डैमेज कर देता है कि मरीज के लिए सांस लेना ही मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जल्द से जल्द वेंटीलेटर लगाने की जरूरत पड़ती है।

कैसे काम करते हैं वेंटीलेटर
फेंफड़े जब काम करना बंद कर दें तब शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और ना ही शरीर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकल पाती है। फेफड़ों में तरल भर जाता है। ऐसे में हृदय भी काम करना बंद कर देता है और कुछ ही मिनटों में मरीज की मौत हो सकती है। ऐसे में वेंटीलेटर के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। यह ऑक्सीजन फेफड़ों में पहुंचती है जहां बीमारी के कारण तरल भर चुका होता है। वेंटीलेटर मरीज की जरूरत के हिसाब से शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। पीसीवी (प्रेशर कंट्रोल्ड वेंटीलेटर) सांस की नली और फेंफड़ों की कोशिकाओं के बीच कुछ इस तरह दबाव बनाते हैं कि शरीर में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन पहुंच सके। जैसे ही सही प्रेशर बनता है शरीर से कार्बन डाय ऑक्साइड निकलने लगती है।

आठ महीनों में 90 से ज्यादा रैफर
काेराना प्रदेश में मार्च में सक्रिय हुआ था। 23 मार्च से लेकर 24 नंवबर तक आठ महीने के दौरान एकेएच के कोविद वार्ड में 2 हजार 328 कोरोना पॉजिटिव मरीज भर्ती हुए। इनमें से अधिकतर खुद रिकवर हो गए। लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण 90 मरीजों को हायर सेंटर रैफर करना पड़ा वहीं एकेएच में उपचार के दौरान 4 मरीजों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार रैफर किए गए मरीजों में से भी 5 की मौत हो गई।

इनका कहना है
पीएम केयर फंड से अस्पताल में कोविद के मरीजों के लिए आई बायोपेप मशीन मरीजों के उपयोग में आ रही है। यह भी वेंटीलेटर का ही काम करती है। जरूरत पड़ने पर ही गंभीर रैफर मरीजों को रैफर किया गया है। वेंटीलेटर और बायोपेप एक तरह का ही काम करती है। वेंटीलेटर में कुछ उपकरण बाकी हैं, इसके लिए कंपनी का प्रतिनिधि आकर गया है।”
डॉ. आलोक श्रीवास्तव, पीएमओ एकेएच ब्यावर

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