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अच्छी खबर:विद्वानों ने माना, संगीत के माध्यम से रोगों का उपचार संभव

ब्यावरएक महीने पहले
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  • एसडी कॉलेज में वैश्विक महामारी से उत्पन्न अवसाद निस्तारण में साहित्य और संगीत का योगदान विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार
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शहर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय के संगीत विभाग व हिन्दी साहित्य विभाग की ओर से रविवार को गुरू पूर्णिमा के अवसर पर वैश्विक महामारी से उत्पन्न अवसाद निस्तारण में साहित्य और संगीत का योगदान विषय पर अंतराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का शुभारंभ संगीत विभागाध्यक्ष दुष्यंत त्रिपाठी ने ईश वंदना से किया।

इसके बाद लखनऊ संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति श्रुति साडोलीकर काटकर ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि संगीत और साहित्य का भारत में विशेष स्थान है। वैदिक जीवन ने हमें जीवन जीना सिखाया है। आयुर्वेद यह मानता है कि संगीत के माध्यम से उपचार संभव है। उन्हाेंने कहा भारतीय संस्कृति में भजन-आरती का विशेष स्थान है। जिसके माध्यम से हम प्रातः व संध्या आरती कर मन को आनंदित करते हैं। मीरा बाई, कबीर ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो भक्ति एवं संगीत अाराधना का प्रमाण देते हैं। डाॅ.काटकर ने कहा कि वर्तमान में जिस प्रकार का उदासीन माहौल बना है उसे मिटाने के लिए संगीत का विशेष महत्व है।

किसी उपचार के लिए केवल दवाईयों का उपयोग करना ही काफी नहीं है, हम संगीत का उपयोग कर उसे रोग से जल्द निजात पाने का प्रयास कर सकते हैं। वेबिनार में संबोधित करते हुए क्रोएशिया विश्वविद्यालय के चांसलर पद्मश्री डाॅ. श्याम सिंह शशि ने राजस्थान की लोक संस्कृति के महत्व पर कहा कि राजस्थान की संस्कृति को जीवंत बनाने के लिए लोक कलाकारों को संवर्धन देना आवश्यक है, क्योंकि नींव वहीं है।

अगर उनका उत्थान होगा तो संस्कृति अपने आप उन्नत होगी। वक्ताओं ने कहा कि अवसाद निवारण के लिए हमे अपनी संस्कृति की ओर लौटना ही होगा।

नीदरलैंड की प्रोफेसर पुष्पिता अवस्थी, आगरा घराने के गुरू डाॅ. राजेश केलकर, इण्डोनेशिया के दिवांश सक्सेना व ध्रुपद गायिका डाॅ. मधु भट्ट तैलंग आदि ने भी संबोधित करते हुए अवसाद निस्तारण में संगीत व साहित्य के महत्व पर जानकारी दी। वेबिनार के दौरान महाविद्यालय के डा. एमआर सिंगारिया ने आयुक्तालय काॅलेज शिक्षा का संदेश वाचन किया गया।

वेबिनार में कनाडा, फ्रांस, नीदरलैण्ड, क्रोएशिया, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, चीन, फ्रांस इत्यादि राष्ट्रों सहित भारत की 100 से अधिक यूनिवर्सिटी के 2 हजार से ज्यादा प्रोफेसर, रिसर्च स्काॅलर, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक आदि प्रतिभागी ऑनलाइन सम्मिलित हुए। कॉलेज प्राचार्य सुप्रतीक पाठक ने वेबिनार के सफल आयोजन पर आयोजन समिति, वेबिनार मे शामिल वक्ताओं सहित प्रतिभागियों का अभिवादन किया।

इस अवसर पर सुनीता अवस्थी, धीरज पारीक, नरेश चेजारा, सुमिता गुरनानी, जलालुद्दीन काठात, नलिनि पारीक, दुष्यन्त त्रिपाठी, सुशांत एरिल, योगेश सिंगारिया, निकिता भारती, मयंक सहित संगीत विभाग के विद्यार्थी उपस्थित थे।

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