कोराेना का असर / काराेबार घट गया, व्यवहार बदल गया, जमा पूंजी समाप्त हाे गई, फूंक-फूंक कर रख रहे हैं कदम

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  • काेराेना और लॉकडाउन ने बदल कर रख दी है लोगाें की दिनचर्या

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

ब्यावर. काेराेना वायरस ने आम आदमी की जिंदगी पी गहरा असर डाला है। लॉकडाउन के कारण न केवल समूची कारोबारी गतिविधियां ठप हाेकर रह गईं बल्कि लोगाें के परस्पर व्यवहार और रिश्तों पर भी गहरा असर पड़ा है। लोगाें की दिनचर्या बदल गई है, कारोबारी व्यवहार बदल गया है, ग्राहक और दुकान मालिक के बीच का व्यवहार बदल गया है। भास्कर ने गुरुवार काे आम लोगाें से इस बारे में जाना कि उनके जीवन में क्या बदलाव आया है।
आधी से भी कम रह गई दूध की बिक्री
निकटवर्ती ग्राम कुंडिया का बाड़िया से बरसों से दूध सप्लाई करने आ रहे गोपाल सिंह का कहना है कि लॉकडाउन ने जहां एक ओर जिंदगी के मायने बदले तो दूसरी ओर इसकी वजह से कई व्यापार पर इसका सीधा असर भी पड़ा। इन्हीं में से एक है दूध सप्लाई व्यापार। पिताजी के समय से सप्लाई का काम चल रहा है मगर ऐसा पहली बार हुआ जब दूध की बिक्री आधी से भी कम रह गई। इसकी वजह है कई लोगों का कोरोना के डर से दूध लेना ही बंद कर देना और होटल व अन्य प्रतिष्ठान का बंद होना। ऐसे में लॉकडाउन से पहले जहां रोजाना 90 लीटर से अधिक दूध बेचते थे वहां आज 30-35 लीटर दूध भी नहीं बिक रहा। इसका असर गांव के उन पशुपालकों पर भी पड़ा जिनसे हम दूध खरीदते हैं। मजबूरी में हमें भी उनसे कम मात्रा में दूध लेना पड़ रहा है।
दो माह से बंद पड़ी है चाय की दुकान
जमालपुरा निवासी नेमीचंद चौहान चांग चितार रोड पर चाय की दुकान संचालित करते हैं। वे बताते हैं कि लॉकडाउन से पहले सुबह चार बजे से ही ग्राहक आना शुरू हो जाते थे। जहां शाम 6 बजे दुकान मंगल कर घर भी चले जाते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते दो माह पूरी तरह दुकान बंद रहने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सरकार की ओर से लॉकडाउन 4.0 में रियायत देने के बाद दुकान सुबह 6 बजे खोलता हूं, लेकिन ग्राहकी बिल्कुल नहीं है। सरकार के आदेश पर दुकान शाम 5 बजे बंद कर चला जाता हूं। कोरोना वायरस के कारण न तो ग्राहक आते हैं और न ही मैं अब लोगों को दुकान पर बैठाता हूं। जिससे आमदनी पर असर पड़ रहा है। दुकान खोलने के साथ ही पहले भी सफाई की जाती थी, लेकिन अब सफाई के साथ सेनेटाइज किया जाता है, यही कार्य दुकान बंद करने से पहले भी किया जाता है।
शिक्षकों ने निभाया धर्म, बने कोरोना वॉरियर्स
लॉकडाउन के बाद शिक्षकों की जीवन व कार्यशैली में भी परिवर्तन आया। कोविड-19 में शिक्षक भी कोरोना वॉरियर्स के तौर पर काम कर रहे हैं। कुम्हारों का बाड़िया निवासी राजेंद्र प्रजापति स्थानीय राजकीय पटेल स्कूल में शिक्षक हैं। लॉकडाउन से पहले वे सुबह 6 बजे उठते थे और 7 से 12.30 बजे तक स्कूल में दिन बीतता था। लॉकडाउन के दौरान कोरोना होम आइसोलेशन में ड्यूटी लगी। इस दौरान सुबह 7 से दोपहर एक बजे तक ड्युटी करते हैं। अपने साथ मास्क व हैंड सेनेटाइजर के साथ पीने के लिए पानी की बोतल लेकर जाते हैं। जिससे संक्रमण से खुद को बचा सके। साथ ही वह विद्यार्थियों की शिक्षण संबंधी अन्य परेशानियों को भी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की सेवा में 
भी जुटे हैं।
लॉकडाउन में खत्म हो गई जमापूंजी
शहर के पुष्करगंज में रहने वाले किशोर लालवानी की रेलवे स्टेशन पर मल्टीपरपज स्टॉल है। पूरे परिवार में एक मात्र कमाने वाले सदस्य हैं। लॉकडाउन के बाद 22 मार्च से न सिर्फ ट्रेनों का संचालन बंद है बल्कि उनकी स्टॉल भी बंद है। उन्हें स्टेशन पर जाने की परमिशन भी नहीं है। लॉकडाउन के दौरान परिवार के साथ ही घर में रहे। पूरे साल में गर्मियों की छुट्टियों में ही सीजन रहता है। 
इसी पर पूरे साल की इनकम निर्भर होती है, लेकिन इस बार कुछ नहीं हो सका। जो जमा पूंजी थी वह भी लगानी पड़ी। रेलवे को तो ठेके की राशि जमा करवानी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि अभी तो रेलवे द्वारा ट्रेनों के संचालन को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भी राहत की उम्मीद नहीं है।

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