भास्कर एक्सक्लूसिवखुद को मरा बताया, नए नाम-आधार से सेना में भर्ती:ओवरएज हो गया तो रची साजिश, ट्रेनिंग भी कर ली फिर अचानक खुला राज

किशनगढ़ (अजमेर)2 महीने पहलेलेखक: रोहित पारीक

एक युवक ओवरएज होने के कारण सेना में भर्ती नहीं हो पाया तो खुद को मरा हुआ घोषित कर दिया। डेथ सर्टिफिकेट तक बनवा लिया। इसके बाद आधार कार्ड में नाम बदलवा लिया और उम्र भी कम दिखा दी। आधार कार्ड में अपडेट के लिए उसने दसवीं की परीक्षा भी दोबारा दी।

युवक जालसाजी करके सेना में भर्ती होने में कामयाब भी हो गया। सेना में ट्रेनिंग के बाद महीने के 45 से 50 हजार रुपए का वेतन मिलता, लेकिन उससे पहले ही रक्षा मंत्रालय के महानिदेशालय को मिली एक चिट्‌ठी ने उसका पूरा राज खोल दिया। सेना ने तुरंत उसे बर्खास्त कर दिया। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है।

किसी फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह लगने वाली ये कहानी है अजमेर जिले में किशनगढ़ पास बांदरसिंदरी थाना इलाके की काकनियावास स्थित देसवाली ढाणी की। गांव का मोइनुद्दीन पुत्र मोहम्मद नूर ने पहले अपना डेथ सर्टिफिकेट बनाया और मोहिन सिसोदिया के नाम से सेना में भर्ती हो गया। इस जालसाजी में उसके परिवार के साथ ग्राम पंचायत और निजी स्कूल की भूमिका भी सामने आ रही है।

मोइनुद्दीन नाम ने साल 2013 में पहली बार 10वीं की परीक्षा पास की, इसके बाद फर्जी तरीके से जन्मतिथि बदलकर साल 2019 में फिर से 10वीं पास की
मोइनुद्दीन नाम ने साल 2013 में पहली बार 10वीं की परीक्षा पास की, इसके बाद फर्जी तरीके से जन्मतिथि बदलकर साल 2019 में फिर से 10वीं पास की

मोइनुद्दीन की जालसाजी जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

46 साल का नूर मोहम्मद गांव में खेती करता है। परिवार में पत्नी फातिमा, बड़ा बेटा मोइनुद्दीन, छोटा बेटा आसिफ और एक बेटी सलमा बानो है। जिसकी शादी हो चुकी है। मोइनुद्दीन का जन्म 6 नवंबर 1998 को हुआ और आसिफ का जन्म 5 जुलाई 2001 को हुआ। मोइनुद्दीन ने 2013 में दसवीं पास की। 2018 में सेना भर्ती हुई और उसके छोटे भाई आसिफ का उसमें चयन हो गया। मोइनुद्दीन भी सेना में जाना चाहता था, लेकिन वह ओवरएज हो रहा था।

इसके बाद मोहनुद्दीन ने साजिश रची। खुद को मरा हुआ बताया और अपना मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। डेथ सर्टिफिकेट में लिखा था- मोइनुद्दीन की 18 अगस्त 2019 को मौत हो चुकी है। इसके बाद मोइनुद्दीन ने मोहिन सिसोदिया के नाम से 2019 में दसवीं की परीक्षा दी।

पास होने के बाद मोहनुद्दीन को मोहिन सिसोदिया के नाम से बोर्ड मार्कशीट मिल गई। इस पर पिता का नाम नूर मोहम्मद, माता का नाम फातिमा बानो ही रहा, लेकिन डेथ ऑफ बर्थ 6 नवंबर 1998 से बदलकर हो गई 6 नवंबर 2001। यानी मोइनुद्दीन उम्र में अपने छोटे भाई से भी छोटा हो गया।

ऐसे किया फर्जीवाड़ा : पहले डेथ सर्टिफिकेट बनवाया

मोइनुद्दीन को सेना में जाने के लिए अपनी उम्र कागजों में कम दिखानी थी। इसके लिए जरूरी था कि उसकी दसवीं की मार्कशीट और आधार कार्ड पर नई जन्म तारीख हो, लेकिन यह संभव नहीं था। ऐसे में पहले उसने खुद का डेथ सर्टीफिकेट बनवाया। जिसके लिए उसके पिता मोहम्मद नूर ने पंचायत से मिलीभगत की। 2019 में सरपंच ने मोइनुद्दीन की मौत की पुष्टि कर अनुशंषा कर दी।

इसके बाद आवेदन ग्रामसचिव ने वेरिफाई किया और फिर तहसीलदार ने। कहीं काेई जांच नहीं हुई और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो गया। जिस पर मौत की तारीख लिखी गई 18 अगस्त 2019। इस तरह आसानी से मोइनुद्दीन का मृत्यु प्रमाण पत्र बन गया।

नए नाम के लिए मोनुइद्दीन ने अपने आधार कार्ड में नाम और जन्म की तिथि को बदलवाया, जिसमें उसने उम्र कम करने के लिए साल 2001 में अपना जन्म दिखाया।
नए नाम के लिए मोनुइद्दीन ने अपने आधार कार्ड में नाम और जन्म की तिथि को बदलवाया, जिसमें उसने उम्र कम करने के लिए साल 2001 में अपना जन्म दिखाया।

छोटा बेटा बनकर दी दसवीं की परीक्षा

इसके बाद मोइनुद्दीन ने पास के ही नलू गांव के एक स्कूल बाल कृष्णा भारती में मोहिन सिसोदिया नाम से एडमिशन लिया। वहां यह नौंवी का स्टूडेंट बना। इसी स्कूल से 2019 में दसवीं की परीक्षा दी। फार्म में उसने अपना नाम मोहिन सिसोदिया लिखा और जन्म तिथि लिखी 6 नवम्बर 2001। वर्ष 2020-21 में इसी स्कूल से बारहवीं उतीर्ण की।

अब उसके पास मोहिन सिसोदिया के नाम से बोर्ड की दो-दो कक्षाओं की मार्कशीट हो गई और जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में दसवीं की मार्कशीट पर नई तारीख भी आ गई। इन्हीं मार्कशीट के आधार पर उसने पहले राशन कार्ड में और बाद में आधार कार्ड में अपने नाम और जन्म तारीख में बदलाव किया।

आधार कार्ड के नंबर नहीं बदले

मोइनुद्दीन ने बड़ी चालाकी से अपना मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। इसके बाद नए नाम और जन्मतिथि से दसवीं व बारहवीं की मार्कशीट भी ले ली। अब उसे मोहिन सिसोदिया के नाम से आधार कार्ड की जरूरत थी। जिस पर उसकी नई डेथ ऑफ बर्थ होती, लेकिन वह नया आधार कार्ड नहीं बनवा सकता था, क्योंकि पुराने आधार कार्ड के रिकॉर्ड में उसका बायोलोजिकल रिकॉर्ड था। यदि वह फ्रिंगर प्रिंट देता तो तुरंत पकड़ में आ जाता।

इसलिए उसने दसवीं की नई मार्कशीट के आधार पर ऑनलाइन ही पुराने आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि बदल ली। जिसके बाद आधार कार्ड में भी उसका नाम मोइनुद्दीन से मोहिन सिसोदिया और जन्मतिथि 6 नवंबर 1998 से 6 नवंबर 2001 हो गई, लेकिन आधार कार्ड का नंबर एक ही रहा, जो 364404673716 है।

युवक ने जनआधार कार्ड में भी अपना नाम और उम्र बदलवा ली, इसके बाद जनआधार कार्ड में वह अपने छोटे भाई से छोटा हो गया।
युवक ने जनआधार कार्ड में भी अपना नाम और उम्र बदलवा ली, इसके बाद जनआधार कार्ड में वह अपने छोटे भाई से छोटा हो गया।

आखिर क्यों किया इतना फर्जीवाड़ा

मोइनुद्दीन का छोटा भाई आसिफ 2018 में सेना में सैनिक की पोस्ट पर चयनित हुआ था। उसका वेतन अच्छा था। जिसे देख बड़े भाई मोइनुद्दीन ने भी सेना में जाने की सोची, लेकिन उस वक्त भर्ती रैली नहीं हुई और फिर कोरोनाकाल आ गया। सेना भर्ती के लिए आवेदक की उम्र साढ़े 17 साल से 22 साल के बीच होनी चाहिए थी। मोइनुद्दीन का जन्म 1998 में हुआ था। परिवार जानता था कि वह ओवरएज हो रहा है।

इसीलिए मोइनुद्दीन ने पहले कागजों में खुद को मृत बताया और फिर नए नाम से दसवीं की परीक्षा देकर वह मोहिन बना और जन्मतिथि भी बदलकर आसिफ का छोटा भाई बन गया। इसी बीच अजमेर में आर्मी रैली भर्ती 11 जुलाई 2022 से 2 अगस्त 2022 तक हुई थी। इसमें आवेदन 24 मई 2022 से 27 जून 2022 तक लिए गए। मोइनुद्दीन यदि कागजों में हेराफेरी नहीं करता तो इस भर्ती के समय उसकी उम्र 24 साल होती और वह अयोग्य हो जाता।

रिलेशनशिप कोटे से चयन, छोटे भाई की भूमिका संदिग्ध

इस पूरे मामले में मोइनुद्दीन के भाई छोटे भाई आसिफ की भूमिका भी संदिग्ध है। वह पहले से ही सेना में भर्ती हो चुका था। अब अपने बड़े भाई को भी वह यह नौकरी दिलाना चाहता था। सेना में भर्ती के लिए रिलेशनशिप श्रेणी में पांच प्राथमिकताएं है। इनमें तीसरी प्राथमिकता के तहत सेवारत सैनिक अपने एक सगे भाई के लिए सिफारिश कर सकता है।

यदि वह सेना के मापदंड पूरे करता है तो उसका चयन हो जाता है। उसने इसी कोटे का फायदा उठाया और मोइनुद्दीन से मोहिन बने अपने बड़े भाई को छोटा भाई बताकर आर्मी रिलेशनशिप कोटे के लिए सिफारिश कर दी। आसिफ वर्ष 2018 में सेना की राजपूताना राइफल्स में चयनित हुआ था। वह अभी जयपुर स्थित बटालियन नंबर 24 में कार्यरत है।

सेना ने बर्खास्त किया, पुलिस जांच कर रही

यह पूरा मामला सेना को मिली एक चिट्‌ठी के आधार पर खुला। जिसमें साली गांव के गफूर खान ने पूरी जानकारी सेना के अधिकारियों को दी। शिकायत के बाद इसकी जांच हुई तो पूरा मामला खुल गया। जिसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। सेना की ओर से भेजे गए दस्तावेजों के आधार पर मोइनुद्दीन उर्फ मोहिन सिसोदिया के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। यह जांच अराई थानाधिकारी गुमान सिंह कर रहे हैं।

सजा मिलनी चाहिए

इस मामले में मोइनुद्दीन ने अपने छोटे भाई आसिफ, पिता मोहम्मद नूर और मां फातिमा के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेजों के सहारे सेना में नौकरी हासिल की है। फर्जी दस्तावेज तैयार करने में और भी लोगों की मिलीभगत भी है। जिनकी जांच होनीचाहिए।

-गफूर खां, शिकायतकर्ता, ग्राम साली

पिता ने कर दिया बात करने से ही इनकार

इस संबंध में आरोपित के पिता मोहम्मद नूर से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले में किसी भी तरह का बयान देने से इनकार कर दिया। बात को घुमाने का प्रयास करते रहे और अंत में आवाज नहीं आने का कहकर फोन काट दिया।

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