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  • The Chief, Son And Grandson Are Playing Chess Together, The Elders Are Recounting Their Memorable Tales, The Children Are Listening To Lori From Grandma Nani

विश्व परिवार दिवस पर विशेष:मुखिया, बेटे और पोते एक साथ खेल रहे हैं शतरंज, बुजुर्ग सुना रहे हैं अपने यादगार किस्से, बच्चे सुन रहे हैं दादी नानी से लोरी

किशनगढ़5 महीने पहले
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  • कभी एक दूसरे के पास बैठने का टाइम नहीं था, आज पूरा परिवार एक साथ बिता रहा है समय

(विकास टिंकर/सुरेंद्र वैष्णव)

भागदौड़ भरी जिंदगी और भौतिकवादी युग में लोगों के पास जरा सा भी टाइम नहीं था। परिवार के बुजुर्गों के पास बैठकर उनकी बातें सुनना और एक दूसरे को समय देना भी मानो बहुत मुश्किल भरा था। दिन रात व्यापार, पैसा कमाने की चाह में अपनों से अपने ही दूर होते जा रहे थे। लेकिन लॉकडाउन ने बरसों पुराना वक्त फिर से लौटा दिया। जब परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर समय बिता रहे हैं।

बुजुर्ग अपने पुत्र, पुत्री, पोते-पोतियों के साथ शतरंज, कैरम, चंगा पोह सहित अन्य मनाेरंजनात्मक गतिविधियों के जरिए बोरिंग दिनों के बोझ को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं। दादी-नानियां छोटे बच्चों को लोरियां सुना रही है। बुजुर्ग अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण और यादगार किस्से परिवार के सदस्यों को सुना रहे हैं। कुल मिलाकर हंसता खेलता स्वस्थ परिवार इस महामारी का सामना करने के लिए एक दूसरे की हौंसला अफजाई कर रहा है। भास्कर ने विश्व परिवार दिवस पर ऐसे ही कुछ परिवारों को करीब से जाना।

पोतों के साथ मिल रहा है रहने का मौका

ओसवाली मोहल्ला निवासी मार्बल, ग्रेनाइट व्यापारी सुरेश कुमार पहाडिया (66) लॉकडाउन में अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। परिवार के सदस्य प्रतिदिन दो से तीन घंटे लूडो, कैरम, छत पर क्रिकेट खेलते हैै। उनके इकलौते पुत्र पार्षद पंकज पहाडिया है। पहाडिया का कहना है कि लॉकडाउन से पहले किसी को समय नहीं था। दोनों पाेते प्रथम और प्रियम स्कूल चले जाते थे। शाम को ट्यूशन। ऐसे में उनके साथ समय मिलना मुश्किल था। लेकिन अब 24 घंटे पोतों के साथ रहते है। वहीं माता ललिता देवी का कहना है कि वे बहू पूर्व पार्षद निधि पहाडिया के साथ प्रतिदिन चटपटे व्यंजन बनाती है। इस काम में पंकज भी मदद करवाते हैं। बच्चों को दादा-दादी के जीवन से जुड़े किस्से और कहानियां भी सुनने को मिलती है।

परिवार को मिल रही है बुजुर्गों की सीख

राधासर्वेश्वर कॉलोनी निवासी व्यापारी बिरदीचंद जैन (65) और उनकी पत्नी उषा देवी (62) लॉकडाउन में अपने दोनों बेटे और उनके परिवार का पूरा ख्याल रख रहे हैं। परिवार में दस सदस्य एक साथ कैरम, ताश खेलकर दिन बिता रहे हैं। खेलने के दौरान बुजुर्ग दंपत्ति अपने गोठियाना गांव से जुड़ी यादें और किस्से साझा करते हैं। जिसे परिवार के सदस्य बड़ी चाव से सुनते है। उनके पुत्र पिंटू कंवाड और छोटे भाई नितेश कंवाड का कहना है कि आज हमारे बच्चों को उनके दादा-दादी का पूरा प्यार मिल रहा है। जैन का कहना है कि बच्चों की परवरिश के बाद आज मौका मिला है जब पूरा परिवार एक साथ एक दूसरे के साथ समय बिता रहा है। बुजुर्ग दंपत्ति बच्चों से लेकर बड़ों को सेनेटाइज करने, मास्क लगाने का पूरा ध्यान रखते है। बाहर नहीं निकलने देते।

परिवार के साथ करते हैं पूजा पाठ
विनायक नगर निवासी कपड़ा व्यापारी भगवानदास (84) और पत्नी गीता देवी (79) लॉकडाउन में अपने पूरे परिवार का ख्याल रख रहे हैं। प्रतिदिन सुबह अपने साथ परिवार को भी पूजा पाठ के लिए प्रेरित करते है। उसके बाद धार्मिक सीरियल, कृष्णा, महाभारत दिखाते हैं। परिवार में 13 सदस्य एक साथ मिलकर एक जगह सभी कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं। दिन में रेस्ट करने के बाद चौपड, ताश, कैरम खेलते है। अपने पुराने यादगार लम्हों को भी वह सभी से साझा करते है। खास बात यह है कि पोते के साथ वह पड़पोते को भी खिला रहे है। दादी बच्चों को अपने जमाने की लोरियां सुनाती है। बड़े अनिल और छोटे अरूण मांधना का कहना है कि लॉकडाउन ने ऐसा पल हमें दे दिया है जो शायद कभी नहीं आएगा। पूरा परिवार एक साथ समय बिता रहा है।

तीन पीढ़ी के लोग एक साथ खेल रहे शतरंज

70 वर्षीय विष्णु प्रसाद उनके सबसे बड़े पुत्र जितेंद्र कुमार शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वे भी एक निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य करते हैं। जितेंद्र कुमार की पत्नी छाया शर्मा भी शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी हुई है उनका एक पुत्र अर्पित बीएससी फाइनल ईयर का स्टूडेंट है। अब दिन में 11.30 बजे के बाद सब अपने-अपने कार्यों से निवृत्त होकर मनोरंजन के कार्यों में लग जाते हैं। विष्णु प्रसाद, जितेंद्र कुमार, अर्पित एक साथ मिलकर शतरंज खेलते हैं। वहीं घर की महिलाएं भी परंपरागत खेल जैसे चौपड़ वगैरह खेलकर हंसी खुशी के साथ में अपना समय व्यतीत कर रही हैं। अर्पित ने बताया कि ऐसा समय बहुत दिनों बाद आया है कि पापा व दादा के साथ खेलने का मौका मिला है। दादा दादी के जीवन से जुड़े किस्से सुनने को मिल रहे हैं।

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