परेशानी / मजदूरों के लिए हुई इधर कुआं, उधर खाई वाली स्थिति

There was a well here for laborers, there was a ditch situation
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There was a well here for laborers, there was a ditch situation

  • फैक्ट्री में रहकर वह परिवार से दूर थे तो अब परिवार के साथ रहकर काम धंधे से महरूम

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

मदनगंज. लॉकडाउन की वजह से मार्बल एरिया में फंसे करीब दो हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर अपने गांव लौट गए। लेकिन इन मजदूरों के सामने इधर कुआं उधर खाई वाली स्थिति बन गई है। गांव लौटने के बाद भी मजदूरों के दो वक्त की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। मजदूरों के घर लौटने के बाद ही पीछे से मार्बल एरिया की अधिकांश यूनिटों में काम शुरू हो गया। ऐसे में अब लंबी मशक्कत के बाद घर पहुंचे मजदूर वापस आने की मंशा बना रहे है। लेकिन पर्याप्त साधनों के अभाव की वजह से घर छोड़कर आना मजदूरों के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं।
मजदूरों का कहना है कि दोनों ही जगह उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा है। फैक्ट्री में रहकर वह परिवार से दूर थे तो अब परिवार के साथ रहकर काम धंधे से महरूम हो रखे हैं।
जानकारी के अनुसार मार्बल एरिया में करीब ढ़ाई हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर काम करते है। इनमें से अधिकांश मजदूर बिहारी, उत्तरप्रदेश के रहने वाले है। लॉकडाउन में डेढ़ माह से ज्यादा वक्त बीत जाने के बावजूद अपनों से दूर मजदूरों ने काफी जद्दोजहद के बाद अपने घर लाैट गए। कई मजदूर पैदल ही गांव के लिए निकल गए। मजदूरों के गांव पहुंचने के साथ ही लॉकडाउन में ढील और मार्बल यूनिटें खुलना शुरू हो गई।
बिहार के कांस गंज निवासी मजदूर रामेश्वर यादव ने बताया कि लंबे समय से वह मार्बल एरिया में यूनिटों पर पत्नी, बच्चों के साथ रहकर फैक्ट्री खुलने का इंतजार कर रहे थे। जब फैक्ट्रियां नहीं खुली तो आखिर परेशान होकर वे घर गए। घर जाने की वजह भी यह थी कि फैक्ट्री में रहकर परेशान हो गए और अपने परिजनों की याद सताने लगी। लेकिन अब गांव में आने पर यहां रहना और मुश्किल हो गया है। गांव में अपनों के बीच तो है लेकिन खाने के लाले पड़ रहे हैं।
बिहार के किशनगंज निवासी मजदूर सुरेंद्र कुमार से बातचीत में बताया कि किशनगढ़ छोड़कर उन्होंने गलती की है। लेकिन उनकी यह मजबूरी बन गया था। फैक्ट्री में खाने पीने की दिक्कत आने लग गई।

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