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धर्म समाज:11 श्रावक-श्राविकाओं ने अठाई तपस्या की, वरघोड़ा महावीर काॅलोनी से निकाला

अजमेर5 दिन पहले
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एश्वी प्रिन्सी जैन का वरघोड़ा। - Dainik Bhaskar
एश्वी प्रिन्सी जैन का वरघोड़ा।
  • महावीर काॅलोनी में लगे तपस्या के ठाठ

पुष्कर रोड स्थित महावीर काॅलोनी में पर्युषण महापर्व के ठाट लगे हुए हैं। जैनियों की इस काॅलोनी में इस बार युवा वर्ग तपस्या की ओर ज्यादा तल्लीन है। रिखब सुराना ने बताया कि महावीर काॅलोनी निवासी 16 वर्षीय एश्वी प्रिन्सी जैन ने 8 उपवास, 20 वर्षीय रिषिका रांका ने 8 उपवास, 21 वर्षीय प्रियल रांका ने 8 उपवास, 19 वर्षीय हर्षिता चाैरड़िया ने 11 उपवास, 21 वर्षीय सिद्दकी चाैरड़िया ने 10 उपवास, 27 वर्षीय नम्रता चिन्की कोठारी ने 9 उपवास, मनोज रांका ने 8 उपवास, मनीष गौतम रांका ने 8 उपवास, जिनेन्द्र मिथूल भंडारी ने 8 उपवास, विनोद ढाबरिया ने 8 उपवास और मंजू सुराना ने 9 उपवास की तपस्या पूर्ण कर रविवार को पारणा किया।

\रविवार को सुबह एश्वी प्रिन्सी जैन का वरघोड़ा महावीर काॅलोनी से होता हुआ अरिहन्त काॅलोनी वीर लोकशाह काॅलोनी पुष्कर रोड होता हुआ पुनः महावीर काॅलोनी पहुंचा जहां जैन समुदाय के पदाधिकारियों ने तपस्वी का अभिनन्दन किया। वरघोड़े में मनोहर सिंह चाैधरी, पारसमल रांका, अनिल कोठारी, रिखब सुराना, सरदार सिंह चीपड़ राजकुमार बोहरा, गौरव पीपाड़ा विनीत गांधी शशांक भंडारी सहित श्रावक-श्राविकाएं भगवान महावीर के जयकारे लगाते चल रहे थे।

पर्युषण महापर्व आत्मबुद्धि का पर्व

पर्युषण महापर्व आत्म बुद्धि का पर्व है। जैन समाज त्याग, तपस्या और शांति की मिसाल देने वाला समाज है। मन में भरी कामनाओं का त्याग करके ही मानव अपनी आत्म शुद्धि कर सकता है। पर्युषण पर्व के दौरान मन और तन से साधना की जाती है। साधक के मन में संयम होना बहुत जरूरी है। संयम संकल्प से ही प्राप्त किया जा सकता है, जिसका मन सदैव उत्कृष्ठ विचारों से भरा होता है वह स्वर्ग के अक्षय सौन्दर्य एवं आनन्द से आप्लावित रहता है।

यह विचार शतावधानी संगठन प्रेरिका मनोहर महाराज ने शनिवार को श्री खरतरगच्छाचार्य श्री जिनदत्तसूरि दादाबाड़ी में मंजू सुराना के 9 दिवसीय तपस्या पूर्ण होने पर आयोजित पारणे के पूर्व शासन माता अम्बिका देवी की पूजा अर्चना के पश्चात व्यक्त किए।

प्रवक्ता संजय कुमार जैन ने बताया कि उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर नित्य नियम पूजन, श्री दशलक्षण धर्म महामंडल विधान पूजन का आयोजन हुआ और अर्घ समर्पित किए गए। पूजन करने वालो में शांतिलाल पाटनी, सुमेर बज, प्रकाश गोधा, कमल बाकलीवाल, निर्मल गंगवाल, निर्मल गदिया, प्रकाश पल्लीवाल, विकास पाटनी आदि थे।

विधानाचार्य व अध्यक्ष डाॅ. राजकुमार गोधा ने अपने उद्बोधन में आर्जव धर्म पर कहा कि मनुष्य अपने मन से कपट करना, धोखा देना, चोरी करना ऐसे भावों को निकाल देता है व अपने स्वभाव को सरल व विनय से युक्त बना लेता है उसे उत्तम आर्जव धर्म कहते हैं।

सालभर के पश्चाताप-आलोचना का दिन है संवत्सरी

पुष्कर अजमेर रोड स्थित बांगड़ बगीची में चल रहे युवा मनीषी आचार्य प्रवर सुदर्शनलाल मा.सा. के चातुर्मास प्रवास के दौरान रविवार को जैन समाज बंधुओं की ओर से संवत्सरी पर्व मनाया गया। इस मौके पर आयोजित सत्संग में उपस्थित जैन श्रावकों को उपदेश देते हुए सुदर्शन महाराज ने कहा कि संवत्सरी साल भर का लेखाजोखा का दिन है। साल भर में क्या अच्छा किया और क्या बुरा किया। जो बुरा किया उसका पश्चाताप इसी दिन किया जाता है।

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