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शिक्षा बोर्ड:21. 60 लाख विद्यार्थियों का परिणाम तैयार करना चुनौती, आरबीएसई, टेस्ट हुए ना अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं

अजमेर9 दिन पहलेलेखक: आरिफ कुरैशी
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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षाओं के विद्यार्थियों का परिणाम तैयार करना बड़ी चुनौती हाेगी। एक तथ्य यह भी है कि प्रदेश के 21.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं, फर्स्ट और सेकंड टेस्ट तक आयोजित नहीं हुए हैं। इनमें 12:60 लाख से अधिक 10वीं और समकक्ष परीक्षा के और 9 लाख से अधिक 12वीं व समकक्ष परीक्षाओं के विद्यार्थी शामिल हैं। परिणाम का आधार क्या हाेगा यह तय करना भी चुनौतीपूर्ण हाेगा। अब प्रदेश भर में विद्यार्थी और अभिभावकों के साथ ही टीचर भी बोर्ड की तरफ निगाहें लगाए हैं।

अर्द्ध वार्षिक नहीं हुई है प्रदेश में | कोरोना के चलते स्कूलों में सत्र भी देर से शुरू हुआ। फिर वापस लॉकडाउन लग जाने के कारण विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा तक नहीं हो पाई। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक यूडी खान ने बताया कि कोरोना के चलते शिक्षा सत्र 2020-21 बुरी तरह प्रभावित हुआ। फरवरी 21 में 12वीं के विद्यार्थियों को केवल प्रेक्टिकल तैयारी के लिए बुलाया जा सका। इंटरनल एसेसमेंट के नाम पर कुछ भी नहीं हो पाया।

दसवीं के छात्र नवीं से भी प्रमोट होकर आए हैं
शिक्षा सत्र 2019-20 में भी कोरोना के चलते लॉकडाउन लागू था, स्कूल नहीं खुले थे। ऐसे में राज्य सरकार ने कक्षा नवी और ग्यारहवीं के विद्यार्थियों को अगली कक्षाओं में प्रमोट कर दिया था। यह सभी बच्चे इस साल बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं देने वाले थे ।

अब तक केवल सेक्शनल अंक ही भेजते रहे स्कूल
राजस्थान बोर्ड से जुड़े स्कूल विद्यार्थी के केवल सत्रांक भेजते हैं। यह मात्र 20 अंकों का होता है। जबकि सैद्धांतिक परीक्षा में 80 अंकों का पेपर होता है। ये 80 अंकों में से विद्यार्थी को कितने अंक, कैसे दिए जाएंगे, इसका निर्धारण अब तक नहीं हो सका है।

12वीं की प्रायोगिक परीक्षाएं भी पूरी नहीं हो सकीं
प्रदेश में लॉक डाउन के चलते स्कूल बंद कर दिए गए। ऐसे में बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में से एक बड़ी संख्या में 12वीं के विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित नहीं हाे सकीं। बोर्ड को 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाएं बीच में ही स्थगित करनी पड़ी थी।

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