जानिए! 84 की उम्र में कोरोना को कैसे हराया:47 साल बेटी की सेवा और विल पॉवर से बुजुर्ग ने जिंदगी को जीता, मां को बेटी ने दिया हौसला, कहा-मां, तू चिंता मत कर, यमराज से भी छीन लाऊंगी

अजमेर6 महीने पहले
खुशी जताते पिता-पुत्री

रेलवे से रिटायर्ड 84 साल के बुजुर्ग अजमेर के धाैलाभाटा निवासी विनय कुमार भारद्वाज उन सभी लाेगाें के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं, जाे इन दिनाें काेराेना महामारी से जूझ रहे हैं। भारद्वाज का HRTC 17 और ऑक्सीजन लेवल 85 था। तबीयत बिगड़ने पर घर से अस्पताल ले जाने के लिए जब एंबुलेंस घर के बाहर पहुंची ताे उनकी पत्नी की आंखाें से आंसू बहने लगे और यही शब्द निकले कि बेटी क्या तेरे पिता घर वापस ताे आएंगे?

बेटी का जवाब सुनकर आप स्तब्ध रह जाएंगे- बेटी ने कहा मां तू चिंता मत कर मैं यमराज से पिता काे छीन कर ले आऊंगी। हुआ भी यही, 25 दिनाें के जीवन-मरण के संघर्ष के बाद भारद्वाज काेराेना से जंग ही नहीं जीते बल्कि उन सभी लाेगाें के लिए मिसाल बन गए हैं जाे इन दिनाें डर-सहमे अपने घर के लाेगाें काे बचाने के लिए अस्पतालाें के चक्कर काट रहे हैं।

यह बेटी श्रवण कुमार से कम नहीं

विनय कुमार भारद्वाज यहां अपनी बेटी-दामाद के साथ रहते हैं। भारद्वाज की बेटी 47 वर्षीय गुंजन जाैली द्वारा की गई सेवा के बारे में जब जानेंगे ताे यही कहेंगे कि- यह बेटी श्रवण कुमार से कम नहीं। गुंजन के पति विनाेद जाैली बताते हैं- करीब 25 दिनाें पहले ससुर की तबीयत अचानक बिगड़ी ताे उन्हें रेलवे अस्पताल भर्ती कराया। वहां HRTC स्काेर 17 आया और ऑक्सीजन लेवल 85 था। RT-PCR में पाॅजिटिव आने के बाद घरवाले चिंतित थे। यहां से तुरंत जयपुर रेफर कर दिया गया।

दवा से लेकर, भाेजन, परहेज, माॅर्निंग-ईवनिंग वाॅक का रखा पूरा ध्यान

जाैली ने बताया कि जयपुर के एक निजी अस्पताल में करीब 9 दिनाें तक ट्रीटमेंट चला, फिर जांच की गई ताे रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई। लेकिन, ऑक्सीजन लेवल बढ़ने लगा। इस पर गुंजन वहां के चिकित्सकाें से सलाह लेकर पिता काे घर ले आई और साेलह दिनाें तक दिनरात एक कर सेवा की। दवा लेने से लेकर, भाेजन, एक्सरसाइज, माॅर्निंग व ईवनिंग वाॅक आदि पर पूरा ध्यान दिया। घर पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कर ली। गुंजन की यह मेहनत रंग लाई और सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे।

बेटी हमेशा यही बाेलती- आप ठीक हाे पिताजी

गुंजन ने कहा कि उन्हाेंने अपनी मां से वादा किया था कि पिता बिलकुल स्वस्थ्य हाेकर लाैटेंगे। अस्पताल में हमेशा पिता काे यही कहा कि आप बिलकुल ठीक हैं, घर पर लाने के बाद राेजाेना इसी बात काे कई बार दाेहराया। पिता का पूरा ध्यान बीमारी से हटा दिया। गुंजन ने कहा कि पिता पिछले 30-35 सालाें से सुबह-शाम वाॅक पर जाते हैं, और याेगासन भी करते हैं। उनकी विल पाॅवर अच्छी है, इसी का फायदा काेराेना से जंग जीतने में मिला।

यह संदेश हर किसी के लिए है कारगर

काेराेना पाॅजिटिव हाेने पर डरें नहीं, घरवाले भी घबराएं नहीं। हमेशा यही बाेलें कि आप स्वस्थ्य हैं, कुछ नहीं हाेगा, किसी भी तरह का पैनिक क्रिएट नहीं करें। अस्पताल में यदि बैड फुल हैं, ताे चिकित्सक की सलाह पर घर पर ट्रीटमेंट करके भी काेराेना से जंग जीती जा सकती है। बस जरूरत है विल पाॅवर की और सेवाभाव की। अमूमन अस्पतालाें में भर्ती लाेगाें की उनके घरवाले सेवा नहीं कर पा रहे हैं।

(रिपोर्ट : अतुल सिंह)

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